The Rig Veda (ऋग्वेद) is the oldest of the four Vedas and one of the most ancient religious texts in the world. Composed in Vedic Sanskrit by the Rishis (sages) of ancient India, it is a collection of 1,028 hymns (Suktas) organized into 10 books called Mandalas. These hymns are addressed to various deities — Agni (fire), Indra (king of gods), Soma (sacred plant), Varuna (cosmic order), Surya (sun), and many others.

Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం  Sanatana Dharm సనాతన ధర్మం
stroms  Srimad Bhagavad Gita  Valmiki Ramayanam/Valmiki Ramayanam

Rig Veda - ऋग्वेद


Mandalas 1 - (2006 verses)



Mandala 1 · Verse 1
कृष्णुष्प पाजः प्रसितिं याहि राजेवामों इभेन. तुष्वीमनु प्रसितिं द्रुणोऽस्तासि विश्वं रक्षसस्तपिष्ठैः.. (१)

O Krishna, advance with strength and might, like a king with his army. You have destroyed all demons with your most potent weapons.

हे अग्नि! बहेलिया जिस प्रकार जाल फैलाता है, उसी प्रकार तुम अपने भयनाशक तेजसमूह को फैलाओ. राजा जिस प्रकार अपने मंत्री के साथ चलता है, उसी प्रकार तुम भी अपने तेजों के साथ आगे बढ़ो. तेज चलने वाली शत्रुसेना के पीछे चलते हुए तुम उसका नाश करो एवं अपने अत्यंत तप्त तेजों से राक्षसों का हनन करो. (१)


Mandala 1 · Verse 2
तव भ्मास आशूया पतन्त्यु स्पृश धृषता शोशुचानः. तपूष्प्यग्ने जुह्वा पतज्ञानसेन्द्रितो वि सृज विश्वगुल्काः.. (२)

O Agni, your brilliant flames swiftly ascend, touching the sky with bold radiance. With your tongue of fire, you consume offerings and spread your all-pervading light.

हे अग्नि! तुम्हारी घूमने वाली एवं शीघ्रगामिनी किरणें सब जगह फैलती हैं. तुम अत्यंत दीप्त होकर हराने वाले तेज से शत्रुओं को जलाओ. हे शत्रु द्वारा निरुद्ध न होने वाले अग्नि! तुम अपनी ज्वालाओं द्वारा तेज चिनगारियों तथा उल्काओं को चारों ओर फैलाओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
प्रति स्पशो वि सृज तूणितमो भावा पायुर्विंशो अस्या अदब्धः. यो नो दूरे अपशंसे यो अन्त्येमे माकिष्ठे व्यथिरा दधर्षितृ.. (३)

May the swift-moving senses be released, and the unassailable mind be established within. Let no one, whether far or near, disturb or afflict us.

हे अग्निशय वेगशालि अग्नि! शत्रुओं को बाधा पहुंचाने वाली किरणों को विशेष रूप से फैलाओ। हे हिंसारहित अग्नि! जो दूर रहकर हमारा बुरा चाहता है अथवा पास रहकर हमारे अनिष्ट की इच्छा करता है, तुम उससे हम लोगों की रक्षा करो। हम तुम्हारे हैं, कोई हमें हरा न सके। (३)

Mandala 1 · Verse 4
उदग्ने तिष्ठ प्रत्यू तनुष्व न्यश्मिाँ ओषतातिग्महेते. यो नो अरातिं समिधान चके नीचा तं धक्षतसं न शुष्क्म्. (४)

O Agni, rise and spread forth, consuming our enemies with your fierce heat. May you burn down our foe, who has kindled enmity against us, like dry grass.

हे अग्नि! तुम ज्वालाओं वाले अग्नि! उठो एवं राक्षसों के नाश में लगो, शत्रुओं के विरुद्ध अपनी ज्वालाएँ फैलाओ एवं तेज-समूह द्वारा शत्रुओं को जलाओ। हे भली प्रकार प्रज्वलित अग्नि! जो व्यक्ति हमसे शत्रुता रखता हो उस नीच को सूखी लकड़ी के समान जला दो। (४)

Mandala 1 · Verse 5
ऊर्ध्वो भव प्रति विव्याध्यस्मदाविष्कृष्ष्णैव दैव्याग्ने. अव स्थिरा तनुहि यातुजूनां जामिमजांमिं प्र मृणीहि शत्रून्.. (५)

O divine fire, rise and pierce through our obstacles, illuminating us. Spread your steadfast power, destroy the demons, and annihilate our enemies, both kin and stranger.

हे अग्नि! तुम तैयार हो जाओ और हमसे अधिक बलशाली राक्षसों को एक-एक करके मारो, अपने दिव्य तेज का आविष्कार करो, प्राणियों को क्लेश देने वाले राक्षसों के धनुषों को डोरी से हीन बनाओ तथा हमारे द्वारा पराजित अथवा अपराजित सभी शत्रुओं को समाप्त करो। (५)

Mandala 1 · Verse 6
स ते जानाति सुमतिं यविष्ठ य ईवते ब्रह्मण गातुमैरत्. विश्वाभ्यस्मै सुदिनानि रायो घुम्मान्यर्तो वि दुरो अभि धित्.. (६)

He who has attained the highest knowledge knows the wise one, who has reached the path of Brahman. For him, the radiant one bestows days of prosperity and opens the doors of abundance.

हे अतिशय युवा, गमनशील एवं श्रेष्ठ अग्नि! तुम्हारी स्तुति करने वाला व्यक्ति तुम्हारा अनुग्रह प्राप्त करता है. हे यज्ञस्वामी अग्नि! तुम उसके लिए संपूर्ण रूप से उत्तम दिवस, धन एवं रत्नों को लेकर उसके घर के सामने प्रकाशित बनो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
मेदग्ने अस्तु सुभगाः सुदानुर्यस्य त्वं उक्थैः. पिप्रिषष्टि स्व आयुषि दुरोणे विश्वेऽस्मिं सुदिना सासदृष्टिः.. (७)

May our wealth be blessed with prosperity and generosity, O Agni, when praised by hymns. May he who worships you live long and happily in his home, and may all his days be auspicious.

हे अग्नि! जो व्यक्ति तुम्हें नित्य हव्य एवं मंत्रों से प्रसन्न करना चाहता है, वह शोभन-धन वाला एवं दानशील हो, कठिनता से मिलने वाली सौ वर्ष की आयु प्राप्त करे, उसके सभी दिन उत्तम हों एवं उसका यश फल देने वाला हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अग्निं ते सुमतिं घोष्वार्क्स ते वावाता जरतामियं गीः. स्वश्वास्त्वाSurthā मर्यमास्मे क्षत्राणि धारयेरनु धून.. (८)

May Agni, the fire god, grant us good fortune and strength, and may this hymn be praised by the wise. May the swift horses and the Maruts uphold our dominion and power.

हे अग्नि! हम तुम्हारी शोभन-बुद्धि की उपासना करते हैं. बार-बार तुम्हें प्राप्त होने के विचार से बोली गई वाणी गूंजती हुई तुम्हारी स्तुति करे. हम सुंदर घोड़ों एवं शोभन रथों से युक्त होकर तुम्हें अलंकृत करें. तुम प्रतिदिन हम लोगों को धनसंपन्न बनाओ. (८)

Mandala 1 · Verse 9
इदमु त्यन्महि महामनीकं यदुस्त्रिया सचरं पूर्वं गौः। ऋतस्य पदेऽधि दीघानं गुहा ऋच्यदृष्यदृग्वे.. (९)

This great, radiant light, moving with the dawn, has been sung by the wise. It stretches forth in the realms of Truth, unseen yet perceived by the seer.

यह महान् यदुस्त्रिया (स्त्री) गौ (पृथ्वी) के साथ पूर्व में चरती है। ऋत के पद पर दीघान (दीर्घकाल तक) गुहा में ऋच्यदृष्यदृग्वे (ऋचाओं से देखने योग्य) है। (९)

Mandala 1 · Verse 10
अथ द्युतानः पितरोः सचासामनुत गुहां चारु पृष्ठेः। मातुष्पदे परमेऽन्ति षड्गोवृष्णिः शोचिषः प्रयत्तस्य जिह्वा.. (१०)

The fathers, having enjoyed the game, followed the hidden path on the beautiful back. The tongue of the well-prepared radiance reached the highest place of the mother.

अथ द्युतानः (हे द्युलोकवासी पितरों!) तुम सचासाम (समान रूप से) चारु पृष्ठे (सुंदर पीठ पर) गुहा में अनुत (अनुसरण करते हो)। मातुष्पदे (माता के पद पर) परमे (परम) षड्गोवृष्णिः (छः वृष्णि) शोचिषः (प्रकाशमान) प्रयत्तस्य (प्रयत्नशील) जिह्वा (जिह्वा)। (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अकारि ब्रह्म समिधान तुभ्यं शंसात्यक्वं यजते व्यु धाः. होतारमग्निं मनुषो नि षेदुर्नमस्यन्त उशिजः शंसमायोः.. (११)

The wise, worshipping the divine fire, offer praise to the Creator, the source of all knowledge. They honor the Agni, the priest of humanity, who is the embodiment of Brahman.

हे प्रज्वलित अग्नि! तुम्हारे लिए हमने स्तोत्र बनाया है. उसी को होतागण बोलते हैं. यजमान तुम्हारे निमित्त यज्ञ करते हैं. इसलिए तुम हमें धन दो. ऋत्विज् मानवों द्वारा प्रशंसनीय व देवों को बुलाने वाले अग्नि की पूजा करने के लिए हम धन की कामना से बैठे हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
tvam indra naryo yām̐ avo nṝn tiṣṭhā vātasya suyujo vahiṣṭhān | yaṁ te kāvya uśanā mandinaṁ dād vṛtrahaṇam pāryaṁ tatakṣa vajram

Mandala 1 · Verse 13
tvaṁ sūro harito rāmayo nṝn bharac cakram etaśo nāyam indra | prāsya pāraṁ navatiṁ nāvyānām api kartam avartayo 'yajyūn

Mandala 1 · Verse 14
tvaṁ no asyā indra durhaṇāyāḥ pāhi vajrivo duritād abhīke | pra no vājān rathyo3 aśvabudhyān iṣe yandhi śravase sūnṛtāyai

Mandala 1 · Verse 15
mā sā te asmat sumatir vi dasad vājapramahaḥ sam iṣo varanta | ā no bhaja maghavan goṣv aryo maṁhiṣṭhās te sadhamādaḥ syāma

Mandala 1 · Verse 1
अयमिह प्रथमो धायि धातृभिर्होता यजिष्ठोऽध्वरेष्वाऽऽ यमप्रवानो भगवी विरूचर्युनेषु चित्रं विश्वं विशेविशे.. (१)

This first offering, by the creators, is the most worshipful priest in sacrifices. He, the brilliant, the radiant, brings forth the wondrous, all-pervading light for every being.

यह अग्नि, जिसे देवताओं ने प्रथम धारण किया, यज्ञों में सबसे उत्तम होता (यज्ञ करने वाला) और सब यज्ञों में विशेष रूप से दीप्तिमान है। (१)

Mandala 1 · Verse 2
अग्ने कदा त आनृभुवदेवस्य चेत-नम्, अथा हि त्वा जग्भिरे मतार्सो विश्वीड्यम्.. (२)

O Agni, when will the divine consciousness awaken within you, for the wise have already embraced you, the universally adored.

हे अग्नि! कब तुम देवों के ज्ञान को प्राप्त हुए? क्योंकि हे विश्व में पूजनीय! तुम्हें ऋषियों ने ही ग्रहण किया है। (२)

Mandala 1 · Verse 3
ऋतवानं विचेतसं पश्यन्तो घामिव स्तुभिः विश्रेष्ठभधराणां हsqrtरं दमे.. (३)

Seeing the radiant, conscious, and supreme beings, the divine powers are pleased.

ऋतुओं के अनुसार चलने वाले, ज्ञानवान, प्रकाशमान अग्नि को देखकर, ऋषियों ने उसे प्रत्येक यज्ञशाला में धारण किया। (३)

Mandala 1 · Verse 4
आशुं दूतं विवस्वतो विश्वं यश्नृणीरभि. आ जभ्रुः केतुमायवो भृगवाणों विशेविशे.. (४)

Swift messengers of the Sun, who have seen all, the Bhrigus, bearing the banner of knowledge, have brought it to every home.

हे सूर्यपुत्र! तुम शीघ्रता से जाने वाले दूत हो, तुम सब यज्ञांगों को धारण करने वाले हो, हे भृगुपुत्र! तुम सब में विशेष रूप से प्रवेश करते हो। (४)


Mandala 1 · Verse 5
मनुष्य समस्त प्रजाओं को पराजित करने वाले, तीव्रगति, यजमान के दूत, झंडे के समान ज्ञान कराने वाले एवं दीप्तिमान् अग्नि को सभी प्रजाओं के कल्याण के लिए लाते हैं. (५)

They bring forth the radiant Agni, swift and victorious over all beings, the messenger of the sacrificer, illuminating like a banner, for the welfare of all creation.

मनुष्य समस्त प्रजाओं को पराजित करने वाले, तीव्रगति, यजमान के दूत, झंडे के समान ज्ञान कराने वाले एवं दीप्तिमान् अग्नि को सभी प्रजाओं के कल्याण के लिए लाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तमी होतारमानुष्पचिकचिवत्संनि बेदिरे. रणं पावkaçोचिषं यजिष्ठं सप्त धामभिः.. (६)

They invoked the Hotri, the divine priest, the swift-moving one, the most excellent sacrificer, with seven sacred fires.

हे अग्नि! तुम होते हो, तुम मनुष्यों के बीच में रहने वाले, पवित्र प्रकाश वाले, यज्ञों में सबसे उत्तम और सात लोकों में निवास करने वाले हो। (६)

Mandala 1 · Verse 7
stuṣe sā vāṁ varuṇa mitra rātir gavāṁ śatā pṛkṣayāmeṣu pajre | śrutarathe priyarathe dadhānāḥ sadyaḥ puṣṭiṁ nirundhānāso agman

The ancient sages, wise and radiant, established the sacred Agni, the invoked of the gods, adorned with seven splendors, the foremost sacrificer.

ऋत्विज् आदि मानवों ने प्रसिद्ध, क्रमशः देवों को बुलाने वाले, ज्ञानसंपन्न, रमणीय, पवित्र प्रकाश वाले, श्रेष्ठ यजकर्ता एवं सात तेजों से युक्त अग्नि को स्थापित किया था. (७)

Mandala 1 · Verse 8
तं शश्वतीषु मातृवन आ वीतमश्रितम्. चित्रं सन्तं गुहा हितं सुवेदं कूचिदर्थम्.. (८)

The radiant One, dwelling within the cave of the heart, is the eternal mother, the refuge of all. He is the source of all knowledge, the wondrous being, ever present.

हे अग्नि! तुम सब में व्याप्त हो, तुम सब के स्वामी हो, तुम सब के भीतर हो, तुम सब को धारण करते हो, तुम सब के लिए प्रिय हो, तुम सब को जानते हो, तुम सब के लिए कल्याणकारी हो। (८)

Mandala 1 · Verse 9
माता के समान जलसमूह में एवं वृक्षों में वर्तमान, सुंदर, जलने के डर से प्राणियों द्वारा असेवित, विचित्र, गुहा में छिपे हुए, शोभन धनयुक्त एवं सभी जगह हव्य की अभिलाषा करने वाले अग्नि को ऋत्विजों ने स्थापित किया था. (९)

The priests established the fire, present in water and trees like a mother, beautiful yet avoided by creatures fearing its burn, dwelling in strange caves, possessing splendid wealth, and desiring oblations everywhere.

माता के समान जलसमूह में एवं वृक्षों में वर्तमान, सुंदर, जलने के डर से प्राणियों द्वारा असेवित, विचित्र, गुहा में छिपे हुए, शोभन धनयुक्त एवं सभी जगह हव्य की अभिलाषा करने वाले अग्नि को ऋत्विजों ने स्थापित किया था. (९)

Mandala 1 · Verse 10
सहो जातस्य ददृशानमोजो यदस्य वातो अनुवाति शोचिः। वृणक्ति तिग्मामतसेषु जिह्वां स्थिरा चिद्राव्यते वि जभ्मै.. (१०)

The inherent power of the newborn is revealed as the wind fans its flame. Even the firm earth is split open by its sharp, piercing tongue.

अरणियों (लकड़ियों) के पश्चात् उत्पन्न अग्नि का तेज ऋत्विजों को दिखाई देता है. जब अग्नि की लपटों को लक्ष्य करके हवा चलती है तो अग्नि अपनी ज्वाला को वृक्षों से मिला देते हैं एवं स्थिर काष्ठों को अपने तेज से जला देते हैं। (१०)

Mandala 1 · Verse 11
तृषु यदग्ना तृषणां ववक्षं तृषु दूतं कृणुते यद्दो अग्निः। वात्स्यं मेळ्ळे सचते निजुर्वर्णाशुं न वाजयते हिन्चे अवी.. (११)

When the fire of desire burns intensely, it becomes the messenger of thirst. The one who embraces this inner fire, though seemingly bound, is not truly defeated.

अग्नि अपनी लपटों द्वारा लकड़ियों को शीघ्र ही जला देते हैं. महान् अग्नि स्वयं को तेज चलने वाला दूत बनाते हैं एवं लकड़ियों को विशेष रूप से जलाते हुए वायु की शक्ति से सहायता लेते हैं. जिस प्रकार सवार घोड़े को शक्तिशाली बनाता है, उसी प्रकार अग्नि अपनी किरणों को बल युक्त करते हैं. (११)
Mandala 1 · Verse 12
etaṁ śardhaṁ dhāma yasya sūrer ity avocan daśatayasya naṁśe | dyumnāni yeṣu vasutātī rāran viśve sanvantu prabhṛtheṣu vājam

Mandala 1 · Verse 13
mandāmahe daśatayasya dhāser dvir yat pañca bibhrato yanty annā | kim iṣṭāśva iṣṭaraśmir eta īśānāsas taruṣa ṛñjate nṝn

Mandala 1 · Verse 14
hiraṇyakarṇam maṇigrīvam arṇas tan no viśve varivasyantu devāḥ | aryo giraḥ sadya ā jagmuṣīr osrāś cākantūbhayeṣv asme

Mandala 1 · Verse 15
catvāro mā maśarśārasya śiśvas trayo rājña āyavasasya jiṣṇoḥ | ratho vām mitrāvaruṇā dīrghāpsāḥ syūmagabhastiḥ sūro nādyaut

Mandala 1 · Verse 1
दूतं वो विश्ववेदसं हव्यवाहममत्त्यम्। यजिष्ठमृज्जे गिरा.. (१)

May the divine messenger, the all-knowing, the bearer of offerings, the immortal, be praised by our righteous words.

हम स्तुति द्वारा समस्त धनों के स्वामी, देवों को हवि पहुंचाने वाले, मरणरहित, अतिशय यज्ञापत्र एवं देवदूत अग्नि को बढ़ाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स हि वेदो वसुधिर्तिं महों आ रोधनं दिवः स देवां एइ वक्षति.. (२)

He is the Veda, the sustainer of the earth, the light of heaven, and He leads the gods.

वे महान् अग्नि यजमान के धन का दान हैं एवं स्वर्ग की सीढ़ियों को जानते हैं. वे देवों को इस यज्ञ में लावें. (२)

Mandala 1 · Verse 3
स वेद देव आनमं देवां ऋतायते दमे. दाति प्रियाणि चिद्रसु.. (३)

He who worships the divine with devotion and truth, offering his heart and possessions, receives beloved boons.

वे तेजयक्त अग्नि यजमानों से क्रमशः देवों के प्रति नमस्कार कराना जानते हैं एवं यज्ञशाला में यजमान को प्रिय धन देते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
स होता सेदु दूत्यं चिकित्वां अन्तर्रीयते. विद्वां आ रोधनं दिवः.. (४)

He is the Hotri priest, the messenger, the wise one who enters the inner space, the knower who ascends to the heavens.

देवों का आह्वान करने वाले अग्नि दूतकर्म एवं स्वर्ग की सीढ़ियों को जानकर धरती-आकाश के मध्य में चलते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
ते स्याम ये अगनये ददाशुहृव्यदातिभिः. य ई पुष्यन्त इन्धते.. (५)

May we become those who, with offerings, give to Agni, who nourishes and ignites.

जो यजमान अग्नि को द्रव्य देकर प्रसन्न करते हैं, बढ़ाते हैं एवं समिधाओं द्वारा प्रज्वलित करते हैं, हम उन्हीं के समान बनें. (५)

Mandala 1 · Verse 6
ते राया ते सुवीर्येः ससवांसो वि शुण्विरे. ये अगना दधिरै दुवः.. (६)

Those who are strong and possess great might, and who have achieved victory, are heard by the divine.

जो यजमान अग्नि की सेवा करते हैं, वे अग्नि की सेवा से धन पाकर एवं प्रसिद्ध पुत्र-पौत्रादि द्वारा प्रसिद्ध बनते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अस्मे रायो दिवेदिंवे सं चरन्तु पुरूषृषः. अस्मे वाजास ईरताम्.. (७)

May abundant wealth flow to us daily, and may nourishment come to us.

ऋत्विज आदि द्वारा चाहा गया धन प्रतिदिन हम यजमानों के समीप आवे एवं अन्न हमें यज्ञ की प्रेरणा दे. (७)

Mandala 1 · Verse 8
स विप्रश्रृणीनां शवसा मानूषणांम्. अति क्षिप्रं विध्यति.. (८)

He swiftly pierces the minds of those who are eager to learn, with his strength.

मेधावी अग्नि अपनी शक्ति द्वारा मानव प्रजाओं के नष्ट करने योग्य पाप सर्वथा नष्ट करते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अग्ने मृळ महाँ असि य ईमा देवयुं जनम्. इयेथ बहिरासदम्.. (९)

O Agni, be gracious, for you are great and protect those who worship you. You are the one who comes to the assembled worshippers.

Mandala 1 · Verse 10
तं युवं देवावश्विना कुमारं सहदेव्यम्. दीर्घायुष्ं कृणॊतन.. (१०)

O divine Ashvins, make this youth, Sahadevya, long-lived.

हे तेजस्वी अश्विनीकुमारो! तुम सहदेव के पुत्र कुमार को दीर्घ आयु वाला बनाओ। (१०)

Mandala 1 · Verse 11
समिन्द्रो गा अजयत्सं हिरण्यां समश्रिष्या मघवा यो ह पूर्वीः। एभिर्निभ्र्णुतमो अस्य शाकैं रायो विभक्ता सम्भ्रश्व वस्वः.. (११)

Indra, the mighty one, conquered cows and gained golden wealth, bestowing these riches upon his followers.

धनस्वामी इन्द्र ने असुरों को जीता। उनके रमणीय धन, अश्वसमूह एवं सेनाओं की जीता। इन्द्र अपनी शक्तियों द्वारा सभी मनुष्यों में श्रेष्ठ, स्रोताओं की स्तुति सुनकर धन को बांटने वाले एवं धन धारणकर्ता हैं। (११)

Mandala 1 · Verse 12
कियत्स्विदिन्द्रो अध्येति मातुः कियत्पितुर्जर्निर्तुयोर् जनां। यो अस्य शुष्मं मुहुकैरिंयति वातो न जूतं: स्तनयद्दिरेभः.. (१२)

How much does Indra know of his mother, and how much of his father's lineage? The wind, like his swift chariot, carries his mighty power, and the clouds thunder forth.

इन्द्र अपने माता एवं पिता के पास से कितना अधिक बल प्राप्त करते हैं? इंद्र ने अपने पिता प्रजापति के पास से इस संसार को उत्पन्न किया है एवं उनके पास से बार-बार संसार का बल प्राप्त करते हैं। स्तोता हवि देने के लिए इंद्र को इस प्रकार बुलाते हैं, जैसे हवा बादलों को प्रेरित करती है। (१२)

Mandala 1 · Verse 13
क्षियन्तं त्वमक्षियन्तीं कृणोतीयर्तिं रेणुं मघवा समोहमू. विभज्जनुरशनिमां इव घौरत स्तोतारं मघवा वसो धात्.. (१३)

The powerful Indra, the bestower of wealth, makes the imperishable, the suffering, and the dust-like disappear, and grants strength to the worshipper like a thunderbolt.

हे धनस्वामी इंद्र! तुम निर्धन को धनवान् बनाते हो। वज्रधारी, आकाश के समान व

Mandala 1 · Verse 1
अयं पन्था अनुवितः पुराणो यतो देवा उदयाजन्त् विश्वे. अतश्चिदा जनषिष्ट प्रवृद्धो मा मातरमुया पतवे कः.. (१)

This ancient path, by which all gods have arisen, has also produced this mighty one, who ascended to the mother for flight.

इंद्र बोले—"योनिसं से जन्म लेने का मार्ग परंपरागत एवं सनातन है. समस्त देव एवं मनुष्य उसी मार्ग से निकले हैं. गर्भ में वृद्धि प्राप्त करने वाले तुम भी इसी मार्ग से जन्म लो. दूसरा मार्ग अपना कर माता की मृत्यु का काम मत करो." (१)

Mandala 1 · Verse 2
नाहमतोनिरया दुगंहैतिरश्रुता पार्श्वागिर्माणि. बहूनि मे अकृता कृतानि युध्ये त्वेन सं त्वेन पृच्छे.. (२)

I am not afraid of hell or suffering, nor do I fear the consequences of my actions. I have many deeds, both done and undone, and I will face them all with you.

वामदेव ने कहा—"हम इस दुर्गम योनि-मार्ग से जन्म नहीं लेंगे. हम तिरछे होकर बगल से निकलेंगे. हमें बहुत से बिना किए हुए काम करने हैं—किसी के साथ युद्ध एवं किसी के साथ वादविवाद." (२)

Mandala 1 · Verse 3
परायतीं मातरमनवच न नानु गान्यनु गमानि. त्वदृग्हे अपिबत्सोममिन्द्रः शतंन्यं चवोः सुतस्य.. (३)

Indra, drinking the Soma of your son, gazed upon your departing mother, not following her, nor being followed.

इंद्र बोले—"यदि हम पुरातन योनि-मार्ग से नहीं निकलेंगे तो हमारी माता मर जाएगी. इस प्रकार हम शीघ्र बाहर निकलेंगे."

Mandala 1 · Verse 4
किं स ऋद्धक्णवद् सहस्रं मासो जभार शरदश्च पूर्वीः। नही न्वस्य प्रतिमानमस्त्यन्तजतिषुत ये जनिन्त्वाः.. (४)

No one has ever seen or heard of a thousand months, nor the preceding autumns, that have borne him. Truly, there is no equal to Him among those born.

Mandala 1 · Verse 5
अवधैव मन्माना गुहाकरिन्द्रं माता वीर्येण न्यम्, अथोदस्थात्स्वयमतकं वसान आ रोदसी अपृणाज्ज्वायमानः.. (५)

The divine being, with mind fixed on Him, arose with great power, adorned in light, and pervaded the heavens and earth.

अंधेरे सूतिका घर में पैदा होने वाले इंद्र को निंदा के योग्य समझकर माता अदिति ने परम शक्तिशाली बना दिया. इंद्र अपने तेज को धारण करके उठ खड़े हुए और जन्म लेते ही उन्होंने धरती-आकाश को घेर लिया. (५)

Mandala 1 · Verse 6
एता अर्भन्त्यललाभन्तीर्ऋतवस्तरीव सङ्क्रोशमानाः। एता वि पृच्छ किमिदं भनन्ति कामापो आदिं परिधिं रुजन्न्ति.. (६)

These young ones, like deer, cry out in unison. Ask them what they are saying, for they break the boundaries of desire.

पानी से भरी हुई नदियां इस प्रकार गर्जन करती हुई बह रही हैं, जैसे इंद्र की महत्ता का घोष कर रही हैं. उनसे पूछो कि ये क्या कहती हैं? इंद्र ने जल को रोकने वाले मेघ को भेदा था. क्या वे नदियां उसी का वर्णन कर रही हैं? (६)


Mandala 1 · Verse 7
किमु ष्बिदस्मै निविदो भन्नतेन्द्रस्यावद् दिधिषन्त आपः। ममैतानपुत्रो महता वधेन वृत्रं जघन्वाँ असृजद्दि सिन्धून.. (७)

The waters, desiring to protect Indra, sang praises to him. This son of the earth, with a mighty blow, slew Vritra and released the rivers.

इंद्र को जो ब्रह्महत्या का पाप लगा है, उस संबंध में विद्वानों का क्या कहना है? यह पाप जल में(फैन)रूप से उपस्थित है. मेरे पुत्र इंद्र ने बलपूर्वक वज्र चलाकर वृत्र को मारा. इसके बाद नदियों को बहाया. (७)

Mandala 1 · Verse 8
ममच्चन त्वा युवतिः परस ममच्चन त्वा कृष्वा जगात्। ममच्चिदापः शिसिवे मम्डुर्ममच्चिदिन्द्रः सहसोदतिष्ठत्.. (८)

The divine essence pervades all, from the youthful maiden to the dark earth. The waters are purified by it, and Indra, the lord of strength, arises from it.

वामदेव कहने लगे—"हे इंद्र! मतवाली युवती माता अदिति ने तुम्हें जन्म दिया. इसी समय कृष्वा नाम की राक्षसी ने मतवाली बनकर तुम्हें निगल लिया. जलों से मस्त होकर तुम्हें सुख पहुंचाया. इंद्र प्रसन्न होकर सूतिकागृह में ही उस राक्षसी को मारने लगे." (८)

Mandala 1 · Verse 9
ममच्चन ते मघवन्त्यसो निविविद्धाँ अप हन् जघान। अथा निविद्ध उत्तरो बभूवाजिच्छरो दास्यस्य सं पिणग्ग्धधन.. (९)

He, O Indra, has slain the enemies, and has become superior. He has crushed the weapons of the Dasyus.

हे धन के स्वामी इंद्र! व्यंस नामक राक्षस ने मतवाला बनकर तुम पर आक्रमण किया एवं तुम्हारी नाक और ठोंढ़ी पर चोट की। इसके बाद तुम अधिक शक्तिशाली बन गए एवं तुमने अपने वज्र से उसका सिर काट दिया। (९)

Mandala 1 · Verse 10
दृष्टिः ससृव स्थविरं तवागामनादृष्यं वृषभं त्वमिन्द्रम् । अरीव्हं वत्सं चरथाय माता स्वयं गातुं तन्व इच्छमानम्.. (१०)

The mother, desiring to nourish her calf, has brought forth the strong bull, Indra, whom you, O Indra, have seen as ancient and unapproachable.

एक बार ब्याई हुई गाय जिस प्रकार बछड़े को जन्म देती है, उसी प्रकार अदिति ने अपनी इच्छा से कामवश एवं अजय इंद्र को जन्म दिया. वे अधिक अवस्था वाले, बलसंपन्न, प्रेरणा करने वाले एवं चलने के लिए शरीर के इच्छुक हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
उत माता महिषमन्वेदमदं त्वा जहति पुत्र देवाः। अथाब्रवीदृष्ट्रमिन्द्रो हनिष्यन्त्सखे विष्णो वितरं वि क्रुम्स्.. (११)

The mother cow, the great one, has come to you, O son, the gods have abandoned you. Then Indra, about to strike, spoke, "O friend Vishnu, strike him down!"

माता अदिति अपने महान् पुत्र इंद्र से पूछने लगी—“हे पुत्र! वे देवगण तुम्हारा त्याग कर रहे हैं.” इसे सुनकर इंद्र ने विष्णु से कहा—“हे मित्र विष्णु! तुम पराक्रम करके वृत्र को मारो.” (११)

Mandala 1 · Verse 12
कस्ते मातरं विधावामचक्रच्छुं कस्त्वमिजिघांसच्चरन्तम्। कस्ते देवो अधि मार्डीक आसीद्यप्राक्षणाः पितरं पादगृह.. (१२)

Who has made your mother a widow, who desires to kill you as you wander? What god has been your protector, when you, the son, have sought your father's feet?

हे इंद्र! तुम्हारी माता को विधवां किसने बनाया? तुम्हारे सोते समय तुम्हें किसने मारने की इच्छा की थी? तुम्हारी अपेक्षा सुख देने वाला देव कौन सा है? किसने तुम्हारे पिता के पैर पकड़कर उनकी हत्या की? (१२)

Mandala 1 · Verse 13
अवत्स्यां शून आन्त्राणि पेचे न देवेषु विविदे मडितारम्। अपश्यं जायामहीयमानां मे श्येनो मधा जभार.. (१३)

My entrails were cooked in emptiness, and I found no one to praise me among the gods. I saw my wife dishonored, and a hawk seized my flesh.

हमने खाने योग्य वस्तुओं के न होने पर कुत्ते की आंतों को पकाया था. उस समय कोई देव हमारी रक्षा करने वाला नहीं मिला. हम अपनी पत्नी को अपमानित होता देखते रहे. हमें केवल इंद्र ने ही आनंदित किया. (१३)

Mandala 1 · Verse 1
एवा त्वामिन्द्र वज्रिचित्र विश्वे देवासः सुहवास ऊमाः। महामुभे रोदसी वृद्धमूष्वं निरेकमिदवृतं वृत्रह्त्ये.. (१)

O Indra, wielder of the Vajra, all the gods, with their auspicious powers, have made you great and mighty, the sole victor in the slaying of Vritra.

Mandala 1 · Verse 2
अवाऽसुजन्त जिव्रयो न देवा भुषः सम्राळिन्द्र सत्ययोनिः। अहन्नहि परिणायनमणः प्र वर्तनीररदो विश्वधैनाः...(२)

The gods, the leaders, the mighty Indra, the true source, have brought forth life. He has slain the serpent, the protector, and set the flowing waters free for all.

हे इन्द्र! देवताओं के स्वामी, सत्य के आधारभूत, आप ने अपने शत्रु वृत्र को मारा, जिससे सब को सुख मिला। (२)

Mandala 1 · Verse 3
इमं यजं त्वमस्माकमिन्र्द पुरो दधत्स्वनिष्प्सि कृत्तुं नः, श्रुष्णीव वज्रिन्सन्सनये ध्नानां त्वया वयमर्यं आजिज्जयेम.. (३)

O Indra, the wielder of the thunderbolt, accept this sacrifice from us. With your strength, may we conquer all our enemies and achieve victory.

हे इंद्र! हमारे इस यज्ञ में सामने उपस्थित होकर तुम इसे पूर्ण करो. हे वज्रधारी इंद्र! शिकारी जिस प्रकार हिरणों का शिकार करता है, उसी प्रकार हम भी धन पाने के लिए तुम्हारी शक्ति के द्वारा संग्राम में विजय प्राप्त करें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
उशन् णु षणः सुमन उपाकै सोमस्य नु सुपुस्तस्य स्वधावः, पा इन्द्र प्रतिभृतस्य मध्यः समन्धसा मम्मदः पृष्ठचेन.. (४)

O Soma, you are the radiant, life-giving essence, the source of strength and nourishment. May you fill us with your divine energy and grant us well-being.

हे अन्न के स्वामी इंद्र! तुम प्रसन्न मन से हमारे पास आओ एवं हमारी कामना करते हुए भली प्रकार निचोड़े गए नशीले सोमरस को पियो. तुम माध् यदि न सवन में बोली जाती हुई स्तुतियां सुनते हुए सोमरस पियो एवं प्रसन्न बनो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
वि यो ररश्ष ऋष्भिर्निर्वैर्भिर्वृक्षो न पक्वः सूण्यो न जेता, मयों न योषाभिमन्म्यमानोऽच्छ विवक्मि पुरूहूतमिन्द्रम्.. (५)

He who is praised by the Rishis, not withered like a tree, not defeated like a conqueror, and not subdued like a woman, him I invoke, the much-invoked Indra.

पके हुए फलों वाले वृक्ष एवं आयुधसंचालन में कुशल युद्ध विजेता वीर के समान, न ऋषियों द्वारा अनेक प्रकार से स्तुत एवं बहुत से यजमानों द्वारा बुलाए गए इंद्र की हम उसी प्रकार प्रशंसा करते हैं, जैसे कामो पुरुष सुंदर नारी की प्रशंसा करता है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
गिर्निं यः स्वतःवः ऋष्प इन्द्रः सनादेव सहसे जात उग्रः, आदत्तां वज्रं स्थविरं न भीमं उद्तेव कोर्शं वसुना न्यृष्म्.. (६)

The mighty Indra, born with immense strength, wields the thunderbolt, a formidable weapon, to bestow prosperity.

पर्वत के समान विशाल, तेजस्वी, शत्रुओं को पराजित करने वाले एवं प्राचीन काल में उत्पन्न इंद्र पानी से भरे हुए पात्र के समान पूर्ण ओजस्वी एवं वज्र को धारण करने वाले हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
उद्‌द्‌ावृष्‌ाणस्तविष्‌ीव उग्रास्मभ्यं दाद्‌द्‌ि पुरुहूत रायः.. (७)

O powerful Indra, invoked by many, bestow upon us abundant wealth and strength.

हे इंद्र! जब से तुम उत्पन्न हुए हो, तभी से न तो कोई तुम्हें रोकने वाला है और न तुम्हारे द्वारा यज्ञों के निमित्त दिए हुए धन को कोई नष्ट कर सकता है। हे कामवर्शी, शक्तिशाली, तेजस्वि एवं बहुत से यजमानों द्वारा बुलाए गए इंद्र! हमें धन दो। (७)

Mandala 1 · Verse 1
आ यात्विन्द्रोऽवस् उप न इह स्तुतः सधमादस्तु शूरः। वावृधांनस्तविष्‌ीर्यस्य पूर्वीधौने क्षत्रमभिभूति पुष्यात्.. (१)

May Indra, the mighty, come to us, praised and joyous, to strengthen our dominion and nourish our power.

हमारे साथ प्रसन्न होने वाले, शूर, शत्रुपुराभवकारी व शक्ति को बढ़ाने वाले इंद्र हमारी स्तुतियां सुनकर हमारी रक्षा के लिए यहां यज्ञ में पधारें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
तस्येदिह स्तववृष्याणि तुविद्युम्नस्य तुविराघसो नृन्, यस्य क्रतुर्विद्धयोऽ न सम्राट् साहाग्नरुत्तो अभ्यस्ति कृष्टीः.. (२)

His mighty deeds, O Indra, are praised by the strong, whose power is vast, and who, like Agni, protects all mankind.

हे स्तोताओं! तुम इस यज्ञ में नेता मरुतों की स्तुति करो, जो इंद्र के बलस्वरूप हैं. अतिशय यशस्वी एवं असीमित धनसंपन्न इंद्र का शत्रुओं को हराने वाला एवं भक्तों की रक्षा करने वाला कर्म शत्रु की प्रजाओं को उसी प्रकार पराभूत कर देता है, जिस प्रकार यज्ञ की योग्यता रखने वाला राजा सबको हराता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
आ यावन्दिन्द्रो दिव आ पृथिव्या मधु सम्रादुत वा पुरीषात्, स्वर्णरदवसे नो मरुत्वान् परावतो वा सदनादृतस्य.. (३)

May Indra, the mighty lord, bring forth sweetness from the heavens, the earth, and the waters, and from his own celestial abode, bestowing prosperity upon us.

हम लोगों की रक्षा के निमित्त इंद्र मरुतों के साथ स्वर्ग, धरती, अंतरिक्ष, जल, आदित्य मंडल, दूरवर्ती स्थान अथवा जल के स्थान मेघ से यहां आवें. (३)


Mandala 1 · Verse 4
स्थूरस्य रायो बृहतो य ईशे तमु हवाम विविचिन्द्रम्, यो वायुना जयति गोमतीषु प्र धृष्णुया नयति वस्यो अच्छ.. (४)

He who rules over vast wealth, we invoke Indra, the resplendent. He who conquers with the wind, fearlessly leads us to abundant prosperity.

हम स्थूल एवं विशाल धन के स्वामी, प्राणवायु रूप बल द्वारा शत्रु सेना को विजय करने वाले, प्राप्य एवं स्तुतिकर्ताओं को उत्तम धन प्रदान करने वाले इंद्र को लक्ष्य करके स्तुति करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
उप यो नमो नमसि स्तभायत्रियति वाचं जनयन्त्यजधै, ऋज्जानसानः पुरवार उक्थैरेन्द्रं कृणवीत सदनेषु होता.. (५)

May the invoked, who is praised with hymns and who generates speech, become the priest in our assemblies, making Indra strong.

समस्त लोकों का स्तंभन करके, यज्ञ के निमित्त गर्जनरूपी ध्वनि करने वाले, हव्य ग्रहण करके वर्षा द्वारा लोगों को अन्न देने वाले एवं उत्तम स्तोत्रों द्वारा स्तुति करने योग्य इंद्र को हम बुलाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
धिषा यदि धिष्प्यन्तः सरण्यान्तसदन्तो अदिमौशिसजस्य गोहे, आ दुरोषाः पास्यस्य होता यो नो महान्तस्वरणेषु वहिः.. (६)

May the divine wisdom, the source of all knowledge, protect us, as the sun dispels darkness, guiding us through the vast expanse of existence.

इंद्र की स्तुति के इच्छुक एवं यजमान के घर में रहने वाले स्तोताओं के स्तुति करते हुए समीप उपस्थित होते ही इंद्र आवें एवं युद्ध में हम लोगों के सहायक हों. इंद्र यजमानों के होता एवं असहनीय क्रोध वाले हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
गुहा यदीमौशिस्य गोहे प्र यद्धिये प्रायसे मदय.. (७)

In the cave of the heart, where the divine light shines, may my mind rejoice in its radiant presence.

हे इन्द्र! जो मनुष्य यज्ञ करने की इच्छा से, अपने घर में स्थित होकर, प्रजापति के पुत्र और कामवर्षि इन्द्र की शक्ति की स्तुति करके, यजमानों का पालन करने के लिए, गुफा रूपी हृदय में उत्पन्न होती है, यजमान के गृह व यज्ञकर्म में स्थित रहती है, यजमानों की अभिलाषापूर्ति एवं प्रसन्नता के लिए उत्पन्न होती है तथा यजमानों का पालन करती है। (७)

Mandala 1 · Verse 1
ब्रह्म स्तोमं मघवा सोममुक्था यो अश्मानं शक्सा बिभ्रदेति.. (१)

The mighty Indra, praised with hymns and Soma, carries the stone, and thus proceeds.

जो महान् एवं शक्तिशाली इंद्र हमारे हव्य अन्न का सेवन करते हैं एवं उसकी अभिलाषा करते हैं, वे धन के स्वामी हैं. बलपूर्वक वज्र को धारण करके आने वाले इंद्र हव्य, अन्न, स्तुतिसमूह, सोम रस एवं उक्थ को स्वीकार करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
वृष्ा वृष्णिं चतुःश्रिभस्यचनुग्रो बाहुभ्यां नृतमः शचीवान्, श्रिये परुष्णीमुषणाम ऊर्णां यस्याः पर्वाणि सख्याय विव्ये.. (२)

He who is mighty and strong, with four arms, is the most excellent dancer, adorned with splendor. He clothed himself in wool for prosperity, and his joints were woven for friendship.

वृष्णि बन्धन, चतुःश्रिभस्यचनुग्रो बाहुभ्यां नृतमः शचीवान्, श्रिये परुष्णीमुषणाम ऊर्णां यस्याः पर्वाणि सख्याय विव्ये.. (२)

Mandala 1 · Verse 3
यो देवो देवतमो जायमानो महो वाजेभिरभद्धिद्रं शुभेः दघानो वज्रं बाहुभ्युरशनं द्यायमेने रज यत्र भूम.. (३)

He who, as He is born, is the most divine among gods, is radiant with great glories and strength, holding the thunderbolt in His arms, the sustainer of the sky and earth.

Mandala 1 · Verse 4
विश्वा रोधांसि प्रवत्स्य पूर्वीदौर्ऋऋष्वाज्जनिमनेजत् क्षा, आ मात्रां भरति शुष्या गोर्नवत्वरिमजन्नो नुवन्त वात.. (४)

The universe, having overcome all obstacles, is born from the primordial waters, and the divine mother nourishes it, just as a cow gives milk, and the wind sings its praise.

Mandala 1 · Verse 5
ता तू त इन्द्र महतो महानि विश्वेष्विष्टवनेषु प्रवाच्या, यच्छूर धृष्णो धृषता दधृष्वांहि वज्रेण शवसाविवेशी.. (५)

O mighty Indra, your great deeds are sung in all assemblies; with your thunderbolt and strength, you have powerfully entered and conquered.

Mandala 1 · Verse 6
ता तू ते सत्या तुविन्नृण विश्वा प्र धेनवः सिषते वृष्ण उडनः अथा ह त्वदृष्टभ्रमणो भियानाः प्र सिन्धवो जवसा चक्रम्न्त.. (६)

The cows, truly yours, O powerful one, are the source of all sustenance, offering their milk to the strong. Then, the rivers, filled with fear, flow with great speed, turning like a wheel.

Mandala 1 · Verse 7
अत्राह ते हरिस्त्व उ देवीरवोभिरिन्द्र स्तवन्तं ससारः। यत्सीमनु प्र मुचो बद्धधाना दीर्घमनु प्रसिनिं स्यन्दयध्वै.. (७)

Here, Hari, the Lord, has come to you with praises, O Goddesses, and Indra has followed, singing your glory. May you, who are bound by the cords of devotion, flow forth with abundant grace.

हे इन्द्र! तुम देवियों के स्तुति गान से युक्त होकर, जो बन्धन से मुक्त होकर बहने वाली नदियों के समान हैं, उन पर प्रसन्न हुए। (७)

Mandala 1 · Verse 8
पिपीळे अंशुर्मेधो न सिन्धुरा त्वं शमी शशमानस्य शक्तिः। अस्मद्र्यशुशुचानस्य यम्या आशुर्न रश्मिंTuyyojans गोः.. (८)

May the sun's rays, the wind, and the waters be our strength, and may the swiftness of the divine empower us.

जैसे कोई छोटा कीड़ा अपने पंखों से (उड़ता हुआ) आगे बढ़ता है, उसी प्रकार तुम भी तेज चलने वाले सवार जिस प्रकार घोड़े की लगाम पकड़कर उसे आगे बढ़ाता है, उसी प्रकार तुम भी तेजस्वी स्तोता की स्तुतियों को हमारे पास आने के लिए प्रेरित करो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अस्मे वर्षिष्ठा कृणृहि ज्येष्ठा नृम्णानि सत्रा सहुरे सहसि। अस्मभ्यं वृत्रा सुहनानि रन्धि जहि वर्धनुष्पो मर्त्यस्य.. (९)

Grant us, O mighty one, abundant and supreme strength, and victory in all endeavors. Subdue our enemies and destroy the mortal's might.

हे सहनशील इन्द्र! तुम शत्रुओं को हराने वाला, श्रेष्ठ एवं उन्नत बल हमें सदा प्रदान करो, मारने योग्य शत्रुओं को हमारे वश में लाओ एवं हिंसक लोगों के आयुधों का नाश करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अस्माकमित्सु शृणृहि त्वमिन्द्रास्मभ्यं चित्राँ उप माहि वाजान्। अस्मभ्यं विश्वा इषणः पुरन्धीरस्माकं सु मघवन्बोधि गोदाः.. (१०)

O Indra, hear our plea and grant us wondrous boons and sustenance. Bestow upon us all nourishment and wisdom, O generous giver of cows.

हे इन्द्र! तुम हमारी स्तुतियां सुनो, हमें विविध प्रकार का अन्न दो, सभी बुद्धियां हमें प्रदान करो तथा हमारे लिए गाय देने वाले बनो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
नृ ष्टुत इन्द्र नृ गुणान इषं जरित्रे नडी३ न पीपः। अकारि ते हरिबो ब्रह्म नव्यं धिया स्याम रथः सदासाः.. (११)

O Indra, praised by men, you have filled the singer with strength and nourishment. Your new praise has been made with devotion, may we always be your companions.

नूतन इन्द्र न गुणों इषं जरित्रे नडी३ न पीपः। अकारि ते हरिबो ब्रह्म नव्यं धिया स्याम रथः सदासाः.. (११)

Mandala 1 · Verse 1
कथा महामवृतकस्य होतुर्यज्ञं जुषाणो अभि सोममूधः। पिबन्शुशानो जुषमाणो अन्धो वक्ष ऋषवः शुवते धनाय.. (१)

The Soma-drinking, praise-singing Rishis, delighting in the sacrifice, drink the Soma, and through their devotion, obtain wealth.

Mandala 1 · Verse 2
को अस्य वीरः सधमादमाप समानंश सुमतिभिः को अस्य. कदस्य चित्रं चिकिते कदूती वृधे भुवच्छशमानस्य यज्योः.. (२)

Who among the mighty can attain the same glory through their wisdom? Who, with his understanding, can grasp the wondrous nature of the divine, and by what means can he achieve growth through worship?

कौन वीर व्यक्ति इंद्र के साथ संग्राम में जाता है एवं कौन इंद्र की कृपादृष्टि प्राप्त करता है? पता नहीं इंद्र का विचित्र धन कब वितरित होगा? इंद्र स्तुति करते हुए यजमान की वृद्धि और रक्षा के लिए कब प्रवृत्त होंगे? (२)

Mandala 1 · Verse 3
कथा शृणोति हयमानमिन्द्रः कथा शृणवन्नवसामस्य वेद. का अस्य पूर्वीरूपामातयो ह कथैनमाहुः पपुर्ये ज itrरे.. (३)

Indra hears the story of the horse, and through its essence, he knows the truth. The ancient hymns speak of its form, and the gods themselves have drunk its essence.

इंद्र न जाने किस प्रकार स्तुतिकर्ता की स्तुतियाँ सुनते हैं एवं स्तुति करने वाले की रक्षा के उपायों को जानते हैं. इंद्र के प्रसिद्ध दान कौन से हैं? (३)

Mandala 1 · Verse 4
कथा सबाधः शशमानो अस्य नशदभि द्रविणं दीध्यानः. देवो भुवनवेदा म ऋतानां नमो जगृभ्वां अभिज्जजुजोष्त्.. (४)

The radiant sun, the lord of the sky, has risen, dispelling darkness and bringing forth wealth. The divine being, knowing all worlds and the order of things, is worthy of our worship and praise.

शत्रुओं द्वारा पीड़ित होने पर इंद्र की स्तुति करने वाले एवं यजकर्म करके प्रसिद्ध होने वाले यजमान इंद्र द्वारा दी हुई संपत्ति किस प्रकार प्राप्त करते हैं? हव्य रूप अन्न को ग्रहण करके इंद्र जब प्रसन्न होते हैं तभी हमारी स्तुतियों को विशेष रूप से जानते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
कथा कदयस्य उषसो व्युष्टौ देवो मर्तस्य सख्युं जुजोष. कथा कदयस्य सखिभ्यो ये अस्मिन्कामां सुयुजं ततसे.. (५)

The divine friend rejoices in the dawn's awakening, and for his companions, he spreads forth desires, perfectly yoked.

इंद्र उषाकाल आरंभ होने पर कब और किस प्रकार मनुष्यों की मैत्री स्वीकार करते हैं? जो स्तोता इंद्र के प्रति शोभन हवि एवं स्तोत्र प्रदान करते हैं, उनके प्रति इंद्र अपनी मित्रता किस प्रकार प्रकट करते हैं? (५)


Mandala 1 · Verse 6
किमादम्त्रं सख्युं सखिभ्यः कदा नु ते भ्रातृं प्र ववाम. श्रियै सुदृशो वपुस्स्य सर्गाः स्वंर्ण चित्रतममिश आ गोः.. (६)

When will we, O friend, praise our brother, whose radiant form, adorned with golden splendor, is the most wondrous of all creations, bringing prosperity?

हे इंद्र! हम यजमान शत्रुओं का पराभव करने वाले तुम्हारी मैत्री एवं भ्रातृ प्रेम को अपने मित्र स्तोताओं से कब कहेंगे? इंद्र के सभी उद्योग स्तोताओं के कल्याण के लिए होते हैं. सूर्य के समान गतिशील इंद्र के सुंदर शरीर को सभी चाहते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
द्रुहं जिघान्स-ध्वरसमनिन्द्रां ततितके तिग्मा तुजसे अनीका. ऋणा चित्रं ऋणया न उग्रो दूरे अज्ञाता उषसो बबाधे.. (७)

The sharp weapon of the divine warrior pierces the enemy's army, dispelling darkness and ignorance, and banishing all that is unknown far away.

इन्द्रं द्रोहं करने वाले, हिंसाकारियों एवं इन्द्र को न जानने वाली राक्षसी को मारने की इच्छा से अपने तेज, आयुधों को अधिक तेज बनाते हैं। उषःकाल में हमें ऋण बाधा पहुंचाते हैं. ऋणहंता इन्द्र हमारे अनजाने ही दूर से इन उषओं को पीड़ित करते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
ऋतस्य हि शरुषः सन्ति पूर्वीर्ऋतस्य धीतिवृजिनानि हन्ति. ऋतस्य श्लोको बधिरं ततर्द कर्णां बुधानः शुयमान आयोः.. (८)

The strength of Truth destroys crookedness and ignorance. The glory of Truth pierces the deaf ears of the foolish, bringing forth understanding.

ऋतदेव प्रभूूत जल के स्वामी हैं. उनकी स्तुति पापों को नष्ट करती है. ऋतदेव की ज्ञानजनक एवं दीप्त स्तुति वचन बहरे आदमी के कानों में भी प्रवेश करता है. (८)

Mandala 1 · Verse 1
का सुश्रुतिः शवसः सूनुमिन्द्रमर्वाचीनं राधस आ वर्वतत्. ददिहिं वीरो गुणते वसुनि स गोपतिर्निषिभ्वां नो जनासः.. (१)

Who, O Indra, son of strength, has brought forth this new wealth, this abundant gift? May the hero, the lord of cattle, bestow upon us riches, and may we, O people, be free from want.

किस प्रकार की शोभन स्तुति परम बलशाली एवं हमारे सामने वर्तमान इंद्र को हमें धन देने के लिए प्रेरित कर सकती है? हे यजमानो! वीर एवं पशु आदि धन के स्वामी इंद्र हम स्ततिकर्ताओं को हमारे शत्रुओं की संपत्ति दें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स वृत्रह्त्ये हव्यः स ईड्यः स सुष्टुत इन्द्रः सत्यराधाः स यामन्वा मधवा मत्त्यं ब्रह्मण्यते सुष्ये वरिणो धात्.. (२)

Indra, the slayer of Vritra, is worthy of offerings, praise, and hymns, the giver of true boons. He, the mighty one, bestows upon the worshipper, who praises him with devotion, abundant prosperity.

वह वृत्र को मारने के लिये हव्य है, वह पूजनीय है, वह उत्तम स्तुति वाला इन्द्र सत्य-धन वाला है। वह युद्ध में धनवान होकर ब्रह्म के लिये वरणीय हो। (२)

Mandala 1 · Verse 3
तमित्रो वि ह्यन्ते समीके रिक्ववास्तस्तन्वः कृण्वत त्राम्. मिथ्यो यत्यागमुभयासो अगन्नरस्तोक्स्य तनयस्य साती.. (३)

The sun, the source of all light, dispels darkness, and the wise, through their actions, create a radiant existence. Those who abandon their duties and embrace falsehood will find no sustenance for their offspring.

शत्रु दूर भाग जाते हैं, वे युद्ध में अपने शरीर को फैलाकर त्राम (रक्षा) करते हैं। वे परस्पर मिलकर पुत्र और पौत्रों को प्राप्त करते हैं। (३)

Mandala 1 · Verse 4
कृत्यन्ति क्षितियो योग उग्राशुभाणसो मिथों अर्णसाती. सं यद्गिशोववृन्तं युधमा आदिनेम इन्द्रयन्त अभोके.. (४)

When the earth is agitated by the fierce and inauspicious forces of the ocean, the wise, through yoga, unite with the divine, thereby overcoming all obstacles.

वे योग से उग्र होकर एक दूसरे के साथ मिलकर कार्य करते हैं। जब वे इन्द्र को प्राप्त करते हैं, तब वे युद्ध में इन्द्र के समान हो जाते हैं। (४)

Mandala 1 · Verse 5
आदिद्ध नेम इन्द्रियं यजन्त् आदित्यपतिः पुरोळाशं रिरिच्यात्. आदित्समो वि पपच्युआसुष्पीनादिज्जुजोष् वृषभं यजध्वै.. (५)

May the Lord of the Sun, the controller of senses, offer the sacrificial cake, and may the Sun, the best of all, cook the offering, so that you may worship the powerful one.

इन्द्र को आदि में इन्द्रियों से युक्त होकर पुरोडाश (यज्ञ का भाग) अर्पण करते हैं। वे इन्द्र को प्राप्त करने के लिए वृषभ (बैल) के समान बलवान होकर यज्ञ करते हैं। (५)

Mandala 1 · Verse 6
कृणोत्यस्मै वरिबो य इत्थेन्द्राय सोममुशते सुनोति. सधीचीनेन मनसाविनेन्तमिस्खायं कृणुते समत्सु.. (६)

He who presses Soma for Indra, to him the Lord grants protection and strength. With a unified mind, he makes the Soma-presser victorious in battles.

जो इन्द्र के लिए सोम निचोड़ता है, इन्द्र उस यजमान को धनी बनाता है। जो आनंदभाव से इन्द्र को चाहते हैं एवं सोम रस निचोड़ते हैं, उन्हें इन्द्र मित्र बनाते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
य इन्द्राय सुनवत्सोममह्यं पंचात्पकीकृतं भुञ्जाति धानाः. प्रति मनायोश्चानि ह्यन्तस्मिन्दृढवृषणं शुष्मिन्द्रः.. (७)

He who, having pressed the Soma for Indra, eats the cooked grains, that strong Indra, with firm testicles, enters him.

जो इन्द्र के लिए सोम निचोड़ते हैं, पुरोडाश पकाते हैं एवं जो भूनते हैं, उन्हें स्तोताओं की स्तुतियां स्वीकार करके इन्द्र यजमान के निमित्त इच्छा पूरी करने वाला बल धारण करते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
हं. (७) यदा समर्यं व्यचेद्वावा दीर्घं यदाजिमभ्यख्यदयंः। अचिक्रदद् वृष्ाणं पत्त्यच्छा द्रोण आ निशितं सोमसुद्धिः.. (८)

When the mighty one, the chariot, was seen, and the long battle was declared, the strong hero, Drona, cried out, urging the swift-footed to attack.

जब इन्द्र ने यज्ञ किया, तब वह दीर्घकाल तक शत्रु को मारने वाला महान् इन्द्र संग्राम में जब शत्रुओं को जानकर दीर्घ काल तक संलग्न रहते हैं, उस समय इन्द्र की पत्नी यशशाला में ऐसे इन्द्र को बुलाती है जो ऋत्विज् द्वारा निचोड़े गए सोम रस को पीकर उत्तेजित हो जाते हैं एवं मनोकामनाएं पूरी करते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
भृयसा वस्तमचरक्नीयोऽविक्रीतो अकानांषं पुनर्नर्न्। स भृयसा कनीयो नारिचीदीनां दक्षा वि दुहन्ति प्र वाणम्.. (९)

The Self, unborn and unslain, is never diminished nor increased. The wise, with their sharp intellect, perceive this unchanging essence.

किसी व्यक्ति को अधिक द्रव्य का थोड़ा मूल्य मिला. वह खरीदार से बोला—“मैं ने यह वस्तु नहीं बेची. अभी मुझे और मूल्य दो.” खरीदार ने मूल्य नहीं बढ़ाया और कहा—“मैं बहुत देख चुका हूं. समर्थ या असमर्थ कैसा भी व्यक्ति हो, बेचते समय जो मूल्य निश्चित हो जाता है, उसी पर जमा रहता है.” (९)

Mandala 1 · Verse 10
क इमं दशभिमर्मेन्द्रं क्रीणाति धेनुभिः। यदा वृत्राणि जधनदथैनं मे पुनर्ददत्.. (१०)

Who would buy this Indra, the lord of senses, for ten cows? When he has slain the obstacles, then he will return him to me.

इस इन्द्र को दस गायों के बदले कौन मोल लेता है? शर्त यह है कि जब इंद्र तुम्हारे शत्रुओं का वध कर चुके हों तो इन्हें लौटा देना. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
न हूत इन्द्रं न गुणान इषं जरित्रे नधोऽ न पीपः। अकारि ते हरिबो ब्रह्म नव्यं धिया स्याम रथ्यः सदासाः.. (११)

The hymn is not sung for Indra, nor are his glories sung for the singer; your new hymn, O Haribos, has been made by thought, may we always be chariot-borne and seated together.

हे इंद्र! जिस प्रकार जल सरिता को पूर्ण करता है, उसी प्रकार तुम पूर्ववर्ती ऋषियों की तथा हमारी स्तुतियां सुनकर उन्हें स्वीकार करो एवं हमारा अन्न बढ़ाओ. हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! हमने तुम्हारे निमित्त नवीन स्तुतियां बनाई हैं. हम रथ के स्वामी एवं तुम्हारे सेवक बनें. (११)

Mandala 1 · Verse 1
को अद्य नर्यां देवकाम उशिनिन्द्रस्य सखं जुजोष. को वा महेऽउसे पाययि समिद्धे अग्नौ सुतसोम इट्र.. (१)

Who today, desiring the gods, has pleased Indra, the friend of Ushinin? Who, having offered the soma-juice, has given him to drink in the well-kindled fire?

आज कौन मानवहितैषी, देवाभिलाषी एवं कामनापूर्ण मनुष्य इंद्र के साथ मित्रता करना चाहता है? सामरस निचोड़ने वाला कौन सा यजमान अग्नि प्रज्वलित होने पर महान् तथा पार पहुंचाने वाले आश्रय के लिए इंद्र की स्तुति करता है? (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वा युजा नि खिदत्सूर्यस्येन्द्रश्रक्रं सहसा सह इन्द्रो. अधि ष्पुणा बृहता वर्तमानं महो दुहो अप विश्वायु धायि.. (२)

By the strength of Indra, the sun is made to shine brightly, and the great cosmic order is established, sustaining all life.

हे सोम! इंद्र ने तुम्हारा सहारा लेकर तुरंत प्रेरक सूर्य के दो पहियों वाले रथ के एक पहिए को महान् बल से तोड़ डाला. वह रथ महान् अंतरिक्ष में ऊपर वर्तमान था. इंद्र ने अपने परम शत्रु सूर्य के सर्वत्रगामी रथ का पहिया नष्ट कर दिया. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अहन्निन्द्रो अदहन्निन्द्रो पुरा दस्युम्मध्येन्दिनादभीके. दुर्गं दुरोणे कृत्वा न यातां पुस् सहसा शर्वा नि बर्हत्.. (३)

Indra, the mighty, burned the Dasyu in the midst of battle. He made the fortresses and dwellings impassable, and with his thunderbolt, he destroyed them.

हे सोम! युद्ध में तुम्हें पाकर शत्रु शक्तिशाली बने. इंद्र और अग्नि ने दोपहर से पहले ही शत्रुओं को समाप्त कर दिया. जैसे चोर रक्षा रहित एवं जनशून्य स्थान से जाने वाले धनी लोगों को मार डालता है, उसी प्रकार इंद्र ने हजारों की संख्या वाली सेनाएं समाप्त कर दीं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अबाधेथामृतं नि शत्रूनविन्देथामपचितिं वधैः.. (४)

May you be free from obstacles and attain immortality, and may your enemies be vanquished without bloodshed.

हे इंद्र! तुमने इन दस्युओं को सब गुणों से हीन किया एवं यज्ञकर्मरहित दासों को निंदित बनाया. हे इंद्र एवं सोम! तुम दोनों शत्रुओं को बाधा पहुंचाओ, उन्हें मारो और उनकी हत्या के बदले में यजमानों से पूजा स्वीकार करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
एवा सत्यं मधवाना युवं तदिन्द्रश्च सोमोर्वमश्यं गोः। आददत्तमपिहितान्द्यां रिचिथुः क्षाभ्रिञ्चतृदाना.. (५)

The divine twins, Indra and Soma, have taken the radiant cow, and with their power, they have revealed the hidden heavens and the earth.

हे सोम! तुम और इंद्र—दोनों ने अश्वों एवं गायों का समूह दान किया. तुमने पणियों द्वारा रोकी गई गायों को एवं उन पणियों की भूमियों को बल द्वारा मुक्त किया था. हे इंद्र एवं सोम! तुम दोनों शत्रुनाशकारियों ने जो किया, वह सत्य है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
यत्रोत्तं मत्त्यरिण इन्द्र सूर्यम्. प्रावः शचीभिरतशम्..(६)

Where the mighty Indra, with his powers, protected the sun.

हे इन्द्र! उस संग्राम में तुमने एतश ऋषि की रक्षा के लिए सूर्य की हिंसा की एवं एतश ऋषि को बचाया.(६)

Mandala 1 · Verse 7
किमादुतासि वृत्रहन्मघवन्-न्युमत्तमः. अत्राह दानुमातिः..(७)

O slayer of Vritra, O Maghavan, what is this great darkness? Here the Danava, Matin, has been struck down.

Mandala 1 · Verse 8
उत स्मा सह इत्यपरि शशमानाय सुन्वते, पुरु चिन्मंसे वसु.. (८)

He who offers sacrifices with devotion, though seemingly small, is greatly honored by the divine, who bestows abundant wealth.

हे इंद्र! तुम स्तुतिकारी और सोमाभिषवकारी यजमान को पल भर में बहुत सा धन देने वाले हो. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अभि त्वा गोतमा गिरानृषत प्र दावने. इन्द्र वाजा य घृष्यये.. (९)

O Indra, the Gomatas praise you, the giver of strength, for the mighty and glorious.

हे इन्द्र! गौतम नामक ऋषि ने धन एवं अधिक मात्रा वाले अन्न को पाने के लिए वाणी द्वारा तुम्हारी स्तुति की. (९)

Mandala 1 · Verse 10
प्र ते वोचाम वीर्याऽ३ या मन्दसान आरुजः. पुरो दासीरभित्य.. (१०)

I shall declare your mighty deeds, O Indra, which you performed when exhilarated, shattering the forts of the Dasyus.

हे इन्द्र! तुमने सोमरस पीने के कारण प्रसन्न होकर आक्रमणकारी असुरों के नगरों में

Mandala 1 · Verse 1
प्र ऋभुभ्यो दूतमिव वाचमिष्य उपस्तिरे श्ेतरीं धेनुमीळे. ये वातजूतास्तरणिभिरैवैः परि छां सहो अपसो बभ्रुवः.. (१)

Like a messenger to the Rishis, I invoke the swift speech, offering a white cow. Those who, driven by the wind and swift steeds, have embraced strength and deeds.

हम ऋभुओं के समीप अपनी स्तुतियों को दूत के समान भेजते हैं. हम सोम-रस तैयार करने के लिए ऋभुओं से दुधारू गाय मांगते हैं. ऋभुण वायु के समान तीव्र गतिशील तथा संसार के उपकारक कर्म करने वाले हैं एवं वेगशाली घोड़ों की सहायता से तुरंत आकाश को सभी ओर से घेर लेते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यदार्मक्रऋभवोः पितृभ्यां परि विष्ट्ी वेषणा दंसनाभिः. आदिदेवानामउप सख्यमायनधीरासः पुष्टिमवहनम्नये.. (२)

Those who, with devotion and strength, embrace the divine father and mother, attain the friendship of the primeval gods and receive abundant nourishment.

जिस समय ऋभुओँ ने अपने माता-पिता को परिचर्या द्वारा वृद्ध से युवा बनाया एवं अन्य उत्तम कार्यों द्वारा शोभा प्राप्त की, उसी समय इंद्र आदि देवों की मित्रता उन्हें प्राप्त हुई. धीर ऋभुगण यजमान के लिए गौ आदि संपत्तियों द्वारा पुष्टि धारण करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
पुनश्चे चक्रुः पितरा युवाना सना यूपेव जरणा शयाना. ते वाजो विश्वॉ ऋतुरिन्द्रवन्तो मधुत्सरसो नोऽवन्तु यज्ञम्.. (३)

May the youthful parents, resting like ancient sacrificial posts, and the powerful, life-giving ones, full of sweet essence, protect our sacrifice.

ऋभुओँ ने कटे हुए काठ के समान जीर्ण एवं पडे रहने वाले अपने माता-पिता को नित्य तरुण बना दिया. वे वाज, विभु और ऋभु इंद्र के साथ मिलकर सोमरस का पान करें एवं हमारे यज्ञों की रक्षा करें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यत्संस्तवमभो गामरक्षन्त्यत्संस्तवमभो मा अपिंशन्. यत्संस्तवमभर-भासो अस्यास्ताभिः शमीभिरमृतत्वमाशुः.. (४)

By His praise, the earth was protected; by His praise, the waters nourished me. Through His praise, the radiant lights of the sky attained immortality.

ऋभुओँ ने एक वर्ष तक मरी हुई गाय की रक्षा की. वे एक वर्ष तक उसके शरीर की प्रभा को सुरक्षित रखे रहे. एक वर्ष ऋभुओँ ने गाय के अवयवों को रखा था. इन कार्यों से ऋभुओँ को अमर पद प्राप्त हुआ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
ज्येष्ठ आह चमस द्वा कतेति कनीयान्-कृष्णवामेत्याह. कनिष्ठ आह चतुष्करंरेति त्वष्टं ऋभवस्तत्पन्नयदृवो वः.. (५)

The elder said, "Two cups!" The younger replied, "Black and white!" The youngest said, "Four-handled!" The Ribhus fashioned them, and the gods accepted them.

बड़े ऋभु ने कहा—“हम चमस को दो बनावेंगे.” उससे छोटे ऋभु ने कहा—“हम एक चमस के तीन करेंगे.” सबसे छोटा ऋभु बोला—“हम चमस के चार भाग करेंगे.” हे ऋभुओ! तुम्हारे गुरु त्वष्टा ने चमस के चार भाग करने वाली बात मान ली. (५)

Mandala 1 · Verse 6
सत्यमूचर्नं एवा हि चक्रुः स्वधांमभवो जगमुरेताम्. विभ्राजमानांश्चमसॉं अहवावेनस्त्वा चतुगे ददृक्षान्.. (६)

The truthful ones, having performed their duties, attained their rightful place. They saw the shining vessels, and the divine light, dispelling all sins.

मानव रूपधारी ऋभुओँ ने सच्ची बात कही थी. उन्होंने जैसा कहा था, वैसा किया. चमस के चार भाग करने के तुरंत बाद ऋभुगण तृतीय सवन में स्वधा के भागी बने. दिवस के समान तेजस्वी चार चमसॉं को देखकर त्वष्टा ने उन्हें लेने की अभिलाषा प्रकट की. (६)

Mandala 1 · Verse 7
द्वादश छन्दोगोऽस्यातिथ्ये रणंभवः ससन्तः. सुक्षेत्राकृषन्नयनन्त सिन्धून्-धवातिष्ठेष्णेष्ठोऽधिनिर्ममापः.. (७)

He who is the twelfth, a chanter of hymns, is honored in hospitality, and is a protector in battle. He cultivates fertile fields, controls the waters, and is the most beloved in the heart.

जिसे छिपाया नहीं जा सकता, ऐसे सूर्य के घर में ऋभुगण अतिथि के रूप में सत्कार पाते हुए बारह दिन तक सुखपूर्वक रहते हैं. जब वे सूने खेतों को वर्षा द्वारा फसलों से भरा- पूरा एवं नदियों को प्रवाहशील बनाते हैं, उस समय जलरहित स्थान में औषधियां उत्पन्न होती हैं एवं निचले स्थान में पानी भर जाता है. (७)

Mandala 1 · Verse 1
tvayā vayam maghavan pūrvye dhana indratvotāḥ sāsahyāma pṛtanyato vanuyāma vanuṣyataḥ | nediṣṭhe asminn ahany adhi vocā nu sunvate | asmin yajñe vi cayemā bhare kṛtaṁ vājayanto bhare kṛtam

O beautiful Ribhus and Vasus! Just as you accept human sacrifices to make the days glorious, so too, by the paths of the gods, come to our sacrifice.

हे सुंदर ऋभुओ एवं वाजगण! जिस प्रकार तुम दिवसों को शोभन बनाने के लिए मनुष्यों का यज़ धारण करते हो, उसी प्रकार देवमार्गों द्वारा हमारे यज़ में आओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
ते वो हृदे मनसे सन्तु यज्ञा जुष्टासो अद्य घृतनिर्ण्णिजो गुः। प्र वः सुतासो हरयन्त पूर्णाः कृत्वे दक्षाय हर्षयन्त पीताः.. (२)

May these offerings, pleasing and rich with ghee, be for your hearts and minds today. May the pressed libations, vibrant and full, gladden you, strengthening your power and joy.

आज हमारे वे सभी यज़ तुम्हारे मन को प्रसन्न करने वाले बनें एवं घी से मिला हुआ सोमरस तुम्हें प्राप्त हो. चमस में भरा हुआ सोमरस तुम्हारी इच्छा करता है. वह पीने के पश्चात् तुम्हें यज़कर्म के लिए प्रेरित करे. (२)

🔊
Mandala 1 · Verse 3
ऋजृदाय देवहितं यथा वः स्तोमो वाजा ऋभुक्षणो ददे वः। जुह्वे मनुष्वदपरसु विष्णु युष्मे SCA बृहदिदेषु सोमम्.. (३)

May our praise, pleasing to the gods, reach you, O mighty ones, as Soma, the nourisher, is offered by us with devotion.

हे वाजगण एवं ऋभुगण! तीनों सवनों में पीने योग्य एवं देवहितकारी सोम को जो लोग तुम्हें देते हैं, इसी प्रकार के लोगों के बीच एकत्र होकर एवं परम दिव्य प्रकाशयुक्त देवों के मध्य मनु के समान बनकर हम तुम्हारे उद्देश्य से सोम धारण करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
पीवोअश्वाः शुचद्रथा हि भूतायः शिप्रा वाजिनः सुनिष्काः.. इन्द्रस्य सुनो श DMSO नपातोऽनु वश्चेत्यग्रियं मदाय.. (४)

The swift, strong, and well-adorned horses of Indra, the son of Heaven, draw the chariot for his delight.

हे ऋभुओ! तुम स्वस्थ घोड़ों एवं दीप्तिपुत्र रथ वाले हो. तुम्हारी ठींडियां लोहे के समान हैं. तुम अन्न के स्वामी एवं उत्तम दानशील हो. हे इंद्र के पुत्रों एवं बल की संतानों! यह प्रातःकाल का यज़ तुम्हारी प्रसन्नता के लिए किया गया है. (४)


Mandala 1 · Verse 5
ऋभुमृभुक्षणो रयिं वाजे वाजिन्तमं युजम्, इन्द्रस्वन्तं हवामहे सदासाततममश्विनम्.. (५)

We invoke the ever-present, swift, and powerful Indra, the most energetic and youthful, the Ashwin twins.

हे ऋभुओ! हम अत्यंत रूप से बढ़ने वाले धन, संग्राम में परम शक्तिशाली रक्षक तथा सदा दानशील, अश्वों से युक्त एवं इंद्र से संबंधित तुम्हारे गण को पुकारते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
सेद्भवो यमवथ यूयमिन्द्रश्च मय्यम्, स धिभिरस्तु सनिता মেধसाता सो अवर्ता.. (६)

May you, O Indra, and all others, be born in me, and may you be the giver of wealth and wisdom, and may you be my protector.

हे ऋभुओ! तुम एवं इंद्र जिस व्यक्ति की रक्षा करते हो, वही श्रेष्ठ बुद्धियों से युक्त एवं यज्ञ में अश्वयुक्त बनता है. (६)

Mandala 1 · Verse 1
उतो हि वां दात्रा सन्ति पूर्वा या पुरुस्रसदस्युनिं तोशे। क्षेत्रासां ददथुर्वरासां घनं दस्युभ्यो अभितुमुग्रम्.. (१)

You have given us many gifts, O powerful ones, and have bestowed upon us abundant wealth, driving away the enemies.

हे द्युवा-पृथ्वी! प्राचीन काल में त्रसदस्यु नामक राजा ने धन पाकर मांगने वाले लोगों को दिया था. तुमने उसे घोड़ा, पुत्र एवं दस्युजनों को नष्ट करने योग्य बल दिया था. (१)

Mandala 1 · Verse 2
उत वाजिनं पुरूनिष्पिधं दधिक्रामुं ददथुर्विश्वकृष्टिम्। ऋष्षिभ्यं श्येनं पुषित्पसुमाशुं चकत्त्यमर्यो नृपतिं न शूरम्.. (२)

The swift, all-pervading, and powerful divine horse, Dadhikra, is offered to the sages, like a hawk carrying wealth, a king who is not merely a warrior but a true leader.

हे द्युवा-पृथ्वी! तुम दोनों गमनशील, बहुत से शत्रुओं को रोकने वाली, समस्त प्रजाओं की रक्षा करने वाली, शोभन-गति वाली, दीप्तिशालिनी, तेज चलने वाली एवं राजा के समान शूर दधिका को धारण करते हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
यं सीमनु प्रवते द्र्वन्तं विश्वः पूरुर्मदति हर्षमाणः। पड्भिर्ध्नन्तं मेघयुं न शूरं रथतुरं वातमिमं धृजन्तम.. (३)

The world rejoices in the swift, powerful one, who, like a warrior, strikes with six, bringing forth the clouds.

धरती-आकाश उस दधिका को धारण करते हैं, जिसकी स्तुति प्रसन्नतापूर्वक सभी मनुष्य किया करते हैं. जिस तरह जल नीचे बहता है, वे उसी तरह गतिशील, युद्ध की इच्छा करने वाले, वीर के समान दिशाओं को लांघने हेतु तत्पर, रथ पर बैठकर चलने वाले एवं हवा की तरह तेज चलने वाले हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यः स्मारुद्घानो गध्या समत्सु सनुरत्तरश्रुतिं गोषु गच्छन्। आविर्ऋजीको विदथा निचिक्यतिरं अरतिं पर्यपि आयोः.. (४)

He who, remembering, moves with the cows, reaching the highest heaven, is seen by the wise, and is free from all suffering.

जो देव मिले हुए पदार्थों को संग्राम में पृथक्-पृथक् करता हुआ उपभोग करने के लिए सभी दिशाओं में जाता है, जिसकी शक्ति प्रकट है, जो जानने योग्य बातों को जानता है एवं स्तुति करने वाले यजमान के शत्रुओं का तिरस्कार करता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
उत सन्नं वसमर्थि न तायमुनु क्रोशन्ति क्षितयो भरेषु। नीवायमानं जसुर्नि न श्येनं श्रवश्चच्छा पशमुच्च यूथम्.. (५)

Even when the earth is subdued and the people are in distress, they do not cry out. The swift, like a falcon, do not perish, and the herds are not scattered.

उत्पन्न वस्त्रों में न तो वे समर्थ हैं, न ही वे क्रोश करते हैं, न ही वे शीघ्रता से नीचे आते हैं, न ही वे बाज की तरह उड़ते हैं, न ही वे पशुओं के झुंड की तरह आते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
उत स्म प्रथः सरिष्यन्निव वेति श्रेणिभिः स्थानम्। सजं कृण्वानो जन्यो न शुष्वा रेणुं रेरिहत्किरणं ददृक्षान्.. (६)

The shining one, like a flowing river, approaches its place with rays. He, the creator, makes the earth fertile, and the sun's rays are seen to lick the dust.

दधिका देव असुरों की सेनाओं में जाने के इच्छुक होकर उन में श्रेष्ठ स्थान पाते हुए रथ की पंक्तियों के साथ चलते हैं. वे मानव-हितकारी घोड़े के समान अलंकृत हैं, धूल उड़ाते हैं एवं लगाम को बार-बार चबाते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
उत स्य वाजी सहूरिऋतावा शुष्ममाणोऽस्तन्नवा समर्यं। तुरं यतीषु तुरयन्जिष्योऽधि भुवोः kirate रेणुमज्जन.. (७)

The powerful, swift steed, full of strength and energy, moves with great force, conquering all obstacles and scattering dust in its wake.

दधिका देव इस प्रकार के घोड़ों के समान युद्ध में सहनशील, शत्रुओं के अन्न पर अधिकार करने वाले, अपने अंगों से ही अपनी सेवा करने वाले, सीधे चलने वाले, असुर सेनाओं में वेगपूर्ण, धूल उड़ाने वाले एवं उस धूल को अपनी ही भौंहों पर गिराने वाले हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 1
आशुं दधिकां तमु नृ ष्ट्वाम दिवस्पृ थिव्या उत चर्कराम। उच्छन्तीर्ममुषसः सूदयन्त्यति विश्वानि दुरितानि पर्षन्.. (१)

Seeing the swift, divine chariot, the sun rises, dispelling darkness and overcoming all evils.

हम शीघ्र गति वाले दधिका देव की जल्दी-जल्दी स्तुति करेंगे। हम धरती और आकाश से उनके सामने घास फेंगेंगे। अंधकार नाश करने वाली उषएं हमारी रक्षा करें एवं सब सुखों से हमें पार लगावें। (१)

Mandala 1 · Verse 2
महश्कर्मवृतः क्रतुप्रा दधिकावणः पुरवारस्य वृष्णः। यं पूरुभ्यो दीदिवांसं नागिनं ददथुर्मित्रावरुणां ततुरिम्.. (२)

Mitra and Varuna, you bestowed upon the Pūrus the swift, radiant, serpent-adorned Indra, who is the master of great deeds and sacrifices.

जो यजमान उष के फैलने एवं यज्ञ के प्रज्वलित होने पर अश्व रूपधारी दधिका देव की स्तुति करते हैं, दधिका देव अदिति, मित्र और वरुण के साथ मिलकर उसे पापरहित बनाते हैं। (२)

Mandala 1 · Verse 3
यश्चास्य दधिकावणो अकारीत्समृद्धे अग्ना उपसो व्युष्टै। अनागसं तमदितेः कृणोतु स मित्रोण वरुणोना सजोषाः.. (३)

May this offering, made with abundance to Agni at dawn, render us sinless, accepted by Aditi, and united with Mitra and Varuna.

दधिकावण इष ऊर्जां महो यदमनमहि मरूतां नामभद्रम्। स्वस्तये वरुणों मित्रमग्निं हवाहमइन्द्रं वज्रबाहुम्.. (४)


Mandala 1 · Verse 4
उत स्थ वाजी क्षिपणिं तुरण्यति ग्रीवायां बद्धोऽपिकक्ष आसनि । क्रतुं दधिक्रा अनु संतवीत्त्वत्पमडकांस्यवापनीफणत्.. (४)

Even when bound by the reins, the swift horse runs with great speed, its neck adorned. The powerful chariot, driven by the divine horse Dadhikra, rushes forward, its wheels turning with immense force.

उत स्थ वाजी क्षिपणिं तुरण्यति ग्रीवायां बद्धोऽपिकक्ष आसनि । क्रतुं दधिक्रा अनु संतवीत्त्वत्पमडकांस्यवापनीफणत्.. (४) अश्रुरूपी दधिक्रा देव ग्रीवा, कक्षा एवं मुख में बंधे होकर भी चलने के लिए शीघ्रता करते हैं. ये अधिक बलशाली होकर यज्ञ की ओर जाने वाले टेढ़े रास्तों पर सब जगह शीघ्र चलते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
हंसः शुचिषद्द्बुरन्त्क्षिरक्षद्द्दोता वेदिषद्द्तिथिर्दुरोणसत् । नृषद्दरसदद्व्योमसदद्गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतम्.. (५)

The swan, dwelling in purity, the divine guest, the sacrificer, the one who resides in the altar, the guest in the house, the one who sits among men, the one who sits on the earth, the one who sits in the sky, born of the earth, born of truth, born of the mountain, is the cosmic order.

हंसः शुचिषद्द्बुरन्त्क्षिरक्षद्द्दोता वेदिषद्द्तिथिर्दुरोणसत् । नृषद्दरसदद्व्योमसदद्गोजा ऋतजा अद्रिजा ऋतम्.. (५) सूर्य दीप्तिशाली आकाश में रहते हैं. वायु अंतरीक्ष में निवास करते हैं. होता वेदी पर स्थित रहते हैं. अतिथि घर में निवास करते हैं. ऋत मनुष्यों में, उत्तम स्थान में, यज्ञ में एवं आकाश में निवास करते हैं तथा जल, सूर्यकिरणों, सत्य एवं पर्वतों में उत्पन्न हुए हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तोके हिते तनय उर्वरासु सूरो दृशीके वृषणश्च पौस्ये. इन्द्रा नो अत्र वरुणा स्यातामवोभिर्दस्मा परितक्म्यायम्.. (६)

May Indra and Varuna, the powerful, protect us with their aid, as a father protects his son, and as the sun shines upon fertile lands.

हे इन्द्र एवं वरुण! हमें पुत्र-पौत्र के साथ-साथ उपजाऊ भूमि की प्राप्ति कराने, बहुत समय तक सूर्य के दर्शन कराने एवं संतान उत्पत्ति की शक्ति प्रदान करने के लिए अंधेरी रात

Mandala 1 · Verse 1
ऋतुं सचेन्ते वरुणस्य देवा राजामि कृतेरूपमस्य वद्रेः.. (१)

The gods, following the divine order of Varuna, the king, have established the seasons.

क्षत्रिय जाति में उत्पन्न एवं समस्त प्रजाओं के स्वामी हम लोगों का राज्य दो प्रकार का है, समस्त देव हमारे हैं, जैसे कि सारी प्रजा हमारी है, रूपवान् एवं समस्त प्रजाओं के धारणकर्ता हम लोगों के यज्ञ की सेवा देव करते हैं. हम सबसे श्रेष्ठ हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अहं राजा वरुणो मह्यं तान्यसुर्युणि प्रथमा धारयन्त. ऋतुं सचेन्ते वरुणस्य देवा राजामि कृतेरूपमस्य वद्रेः.. (२)

I am King Varuna, to whom the first waters were given. The gods obey Varuna's order, and I rule, embodying his form.

हम ही राजा वरुण हैं. देवगण असुरनाशकारी श्रेष्ठ-बल हमारे लिए ही धारण करते हैं. रूपवान् एवं समस्त प्रजाओं के धारणकर्ता हम लोगों के यज्ञ की सेवा देव करते हैं. हम सबसे श्रेष्ठ हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अहमिन्द्रो वरुणस्ते महित्त्वोर्वी गभ्मिरे रजसी सुमेके. त्वेव विश्वा भुवनानि विद्मन्त्समैर्ये रोदसी धार्यं च.. (३)

You are Indra and Varuna, the great ones, who hold the earth and sky. All worlds are known to be within you, and you sustain the heavens and the earth.

हम ही इंद्र और वरुण हैं. महत्ता के कारण विस्तृत, गंभीर एवं सुंदर रूप वाले धरती-आकाश भी हम हैं. विद्वान् हम त्वष्टा के समान समस्त प्राणियों को प्रेरणा देते हैं एवं धरती-आकाश को धारण करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अहमपो अविन्मुक्षमाणा धार्यं दिवं सदनं ऋतस्य. ऋतेन पुत्रो अदितिर्ऋतावोत त्रिधातु प्रथयद्धि भूम.. (४)

The waters, flowing forth, sustain the luminous abode of Truth. By Truth, the son of Aditi, the Truth-knowing one, expands the three-fold earth.

सींचने वाले जल को हमने ही बरसाया था एवं जल के स्थान आकाश को धारण किया था. जल के कारण ही हम अदिति-पुत्र अर्थात् यज्ञ के स्वामी बने थे. हमने ही व्याप्त आकाश को तीन भागों में बांटा था. (४)

Mandala 1 · Verse 5
मां नरः स्वक्ष्त्रा वाजवन्तो मां वृताः समरणे हवन्ते. कृणोम्याजिं मघवाहेमिन्द्र इयर्मि रेणुभिर्भूत्योजाः.. (५)

May men, rich in wealth and strong, invoke me in battle. I, Indra, the giver of riches, shall win the contest, adorned with dust.

सुंदर घोड़ों के स्वामी एवं युद्ध के अभिलाषी नेता हमारे ही पीछे चलते हैं एवं युद्धस्थल में एकत्र होकर हमें ही पुकारते हैं. हम ही इंद्र बनकर युद्ध करते हैं एवं शत्रु पराभवकारी बल से युक्त होकर धूल उड़ाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अहं ता विश्वा चकरं नकिर्मा दैवीं सहो वरते अप्रतीतम. यनमा सोमासो मदन्युक्थोभये भयेते रजसी अपारे.. (६)

I am the weaver of the universe, and no mortal power can resist my divine strength. The intoxicating Soma, joined by both, fills these boundless realms with joy and fear.

सब प्रसिद्ध काम हमने ही किए हैं. देवों के न हारने वाले बल से युक्त होने के कारण हमें कोई नहीं रोक सकता. जब सोम रस एवं स्तुतियां हमें मतवाला कर देती हैं, तब विस्तृत धरती-आकाश भी डर जाते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
विद्महे विश्वा भुवनानि तस्य ता प्र ब्रवीषि वरुणाय वेधः। त्वं वृत्राणि शृणोषि जघनवान् वृत्तो अरिणा इन्द्र सिन्धून्.. (७)

We know all worlds belong to Him; you, O Veda, proclaim them to Varuna. You, O Indra, slayer of Vritra, break open the rivers.

हे वरुण! तुम्हारे कामों को सारा संसार जानता है। हे स्तोता! वरुण के निमित्त स्तुति बोलो, हे इंद्र! ऐसा सुना जाता है कि तुमने बैरियों का वध किया था, तुमने ढकी हुई नदियों को प्रवाहित किया था. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अस्माकमत्र पितरस्त आसन्त्सप्त ऋषयो दीर्घे बध्यमाने. त आयजन्त्र त्रसदस्युम्स्या इन्द्रं न वृत्रतुरमधैम्.. (८)

Our fathers were here, the seven Rishis, when the great expanse was being formed. They invoked Indra, the slayer of Vritra, for the sake of Trasadasyu.

दुर्गह के पुत्र पुरुकुत्स जब कैद कर लिए गए तो सप्तऋषि हमारे इस राज्य के पालनकर्ता बने थे. उन्होंने पुरुकुत्स की पत्नी के कल्याण के लिए यज्ञ करके त्रसदस्यु को पाया था. वह इंद्र के समान शत्रुनाशक एवं आधा देव था. (८)

Mandala 1 · Verse 9
पुरुकुत्सानी हि वामदाशद्धव्येभिरिन्द्रावरुणा नमोभिः. अथा राजानं त्रसदस्युम्स्या वृत्रहणं दधुरधैम्.. (९)

Indra and Varuna, pleased by the oblations of Purukutsa, then established the mighty king Trasadasyu, the slayer of Vritra.

हे इंद्र एवं वरुण! सप्तऋषियों की प्रेरणा से पुरुकुत्स की पत्नी ने हव्य एवं स्तुतियों द्वारा तुम्हें प्रसन्न किया था. इसके बाद तुमने उसे शत्रुनाशकारी एवं आधे देव त्रसदस्यु को प्रदान किया था. (९)

Mandala 1 · Verse 1
क उ श्रवत्तमो यजियाणां वन्दारु देवः कतमो जुषाते. कस्येमां देवीममृतेषु प्रेष्ठां हृदि श्रेष्ठामं सुकृतिं सुहव्याम्.. (१)

Who is the most attentive among the worshippers, the most gracious and beloved deity who is pleased? To whom do I offer this divine, most precious, excellent, and easily invoked praise within the immortal ones?

यज्ञ के योग्य देवों में कौन देव इस स्तुति को सुनेगा? कौन वंदनशील देव इसे स्वीकार करेगा? हम इस अतिशय प्रिय, द्युति युक्त, शोभन-अन्न से युक्त, इस उत्तम स्तुति को किस देव के हृदय में स्थान दिलाएं? (१)

Mandala 1 · Verse 2
को मृळाति कतम आगामिषो देवानामु कतमः शम्भविष्ठः. रथं कामाहुर्ददक्षमाशुं यं सूर्यस्य दुहितावृणीत.. (२)

Who is the bestower of happiness, the most auspicious, whom the daughter of Surya chose as her chariot, swift and capable.

Mandala 1 · Verse 3
मध्वाह्नि ष्वा गच्छथ ईश्वतो घूनिन्द्रो न शक्तिं परितक्म्यायाम् । दिव आ जाता दिव्या सुपर्णा कया शचिनां भवथः शचिष्ठा.. (३)

You who are powerful and swift, like Indra, ascend to the heavens. Born of the divine, you soar with divine wings, becoming the most powerful among the powerful.

हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों उसी प्रकार गतीशिल होकर सोम निषोड़ने वाले दिनों में शीघ्र आओ। स्वर्ग से आए हुए, दिव्य गुणयुक्त एवं शोभन गति वाले तुम दोनों के कर्मों में कौन सा कर्म श्रेष्ठ है? (३)

Mandala 1 · Verse 4
का वां भूदुपमातिः कया न आश्विना गमथो हयूयमाना. को वां महश्चित्सजो अभीक उरुष्यत् माध्वी दक्षा न ऊती.. (४)

O Ashvins, what is your likeness, by what means do you come when invoked? Who, O sweet ones, protects you in battle, and by what strength do you aid us?

का वां भूदुपमातिः कया न आश्विना गमथो हयूयमाना। को वां महश्चित्सजो अभीक उरुष्यत् माध्वी दक्षा न ऊती.. (४)

Mandala 1 · Verse 5
उरु वां रथः परि नक्षति घाम यत्समुद्रादभि वर्तते वाम्. मध्वां माध्वी मधु वांPushayantyasi वां पृक्षो भुरजनत पक्वाः.. (५)

Your chariot, mighty and swift, carries you across the ocean. Sweetness flows from you, and ripe fruits nourish you.

हे अश्विनीकुमारो! तुम दोनों का रथ स्वर्गलोक के चारों ओर भली प्रकार चलता है एवं समुद्र से तुम्हारे पास आता है. हे जल-निर्माता एवं शत्रुविनाशक अश्विनीकुमारो! अध्वर्यु लोग मधुर दूध के साथ सोमरस मिलाते हुए भुनें हुए जो लेकर उपस्थित हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
सिन्धुर्ह वां रसया सिञ्चदश्विभ्याम् वयोऽरुषः परि गम्न. तद्बु वामजिरं चेति यानं येन यन्ति भवथः सूर्याः.. (६)

May the flowing waters of the Sindhu and Rasaya nourish you, O Ashvins, with your swift, reddish steeds. By this swift chariot, you travel, radiant like the sun.

बादल ने अपने जल से तुम दोनों के घोड़ों को भिगोया था. तुम्हारे दीप्तियुक्त घोड़े पक्षियों के समान तेज चलते हैं. तुम्हारा वह रथ भली प्रकार प्रसिद्ध है, जिस पर तुम सूर्यपुत्री को बैठाकर लाए थे. (६)


Mandala 1 · Verse 7
इहेह यद्धां समना पपष्े सयमस्मे सुमतिर्वाजरत्ना. उरुष्यत् जरितारं युवं ह श्रितः कामो नास्तत्या युवद्रिक.. (७)

May you two, with your minds united and bestowing abundant wealth and brilliance, protect the singer of praise, for he has taken refuge in you, desiring your favor.

हे समान मन वाले अश्विनीकुमारो! हम जो स्तुति तुम्हारे समीप भेजते हैं, वह हमारे लिए फल देने वाली हो. हे सुंदर अन्न वाले अश्विनीकुमारो! तुम स्तुति करने वाले की रक्षा करो. हे नासत्यो! हमारी कामना तुम्हारे ही आश्रित है. (७)

Mandala 1 · Verse 1
एष स्य भानुरुदयते युज्यते रथः परिज्म दिवो अस्य सानवि. पृक्षासो अस्मिन्निधुना अधि त्रयो दृतिस्तुरियो मधुग्नो वि रष्षते.. (१)

This is His radiant sun that rises, His chariot is yoked, and His glory fills the heavens. In Him, the three, the strong, the honey-givers, are established and shine forth.

यह सूर्य उदय होता है. तुम दोनों का रथ सभी ओर चलता है एवं चमकते हुए सूर्य के साथ ऊँचे स्थान में पहुँचता है. इस रथ के ऊपरी भाग में तीन प्रकार का अन्न मिला हुआ है तथा चौथी संख्या सोम-रस से भरे हुए चमड़े के पात्र की है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
उदग्ं पृक्षासो मधुमन्त ईरते रथा अश्वस उब्धसो व्युष्टिषु. अपोर्णुवन्तस्तम आ परीवृत् स्वर्णं शुक्रं तन्वन्त आ रजः.. (२)

The sun's rays, like honeyed arrows, ascend with the dawn, illuminating the sky with golden brilliance.

तीन प्रकार के अन्न से युक्त, सोम-रस-सहित एवं घोड़ों वाला तुम्हारा रथ उषा के आरम्भकाल में ही चारों ओर फैले हुए अंधकार को नष्ट करता हुआ एवं सूर्य के समान तेज को फैलाता हुआ सामने की ओर जाता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
मध्वः पिबतं मधुपेभिरासभिरुत प्रियं मधुग्ं युञ्जाथां रधम्. आ वर्तनिं मधुना जिन्वथस्पथो दृतिं वहैथे मधुमन्तमश्विना.. (३)

Drink the sweet nectar, O Ashvins, with your honey-drinking mouths, and join the beloved honey. Fill the path with sweetness, and carry the honey-filled vessel.

तुम सोम पीने वाले मुखों से सोम पियो. सोम पाने के लिए तुम अपना प्रिय रथ अश्वयुक्त करके यजमान के घर तक लाओ. हे अश्विनीकुमारो! तुम सोम-रस-पूर्ण चमड़े का पात्र धारण करके अपने मार्ग सोम-रस द्वारा प्रसन्नतापूर्ण बनाओ. (३)

Mandala 1 · Verse 1
अग्रं पिबा मधुनां सुतं वायो दिविष्वृ. त्वं हि पूर्वपा असि.. (१)

Drink the best of honey, O Vayu, in the heavens; for you are the first to drink.

हे वायु! स्वर्ग प्राप्त कराने वाले यज्रों में तुम सबसे पहले निचोड़े हुए सोमरस को पियो. तुम सबसे पहले सोम पीने वाले हो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
शतेना नो अभिशिभिन्युत्वां इन्द्रसारथिः. वायो सुतस्य तृम्पतम्.. (२)

O Indra, the charioteer, may you and Vayu be satisfied with the soma juice of the one who has been blessed a hundredfold.

हे वायु! तुम निपुण अर्थात् लोककल्याण वाले हो एवं इंद्र तुम्हारे सारथि हैं. तुम अगणित अभिलाषाएं पूर्ण करने हेतु आओ एवं निचोड़ा हुआ सोमरस पियो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
आ वां सहस्रं हरय इन्द्रवायु अभि प्रयः. वहन्तु सोमपीतये.. (३)

May a thousand swift, tawny steeds carry you, Indra and Vayu, to the joyous occasion of drinking Soma.

हे इंद्र एवं वायु! सोमरस पीने के लिए हजारों घोड़े तुम्हें यहां लावें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
रथं हिरण्यवन्-धुरमिन्द्रवायू स्वध्वरम्. आ हि स्थाथो दिविस्पृशम्.. (४)

O Indra and Vayu, you who are the lords of the chariot with golden yokes, ascend to the sky-touching heaven, having accomplished the excellent sacrifice.

हे इंद्र एवं वायु! तुम स्वर्णांनिर्मित आसन वाले, शोभन-यज्ञ-युक्त एवं स्वर्ग को छूने वाले रथ पर बैठो. (४)

Mandala 1 · Verse 1
वायो शुक्रे अयामि ते मध्यो अग्रं दिविष्टिषु. आ याहि सोमपीतये स्पार्हो देव नियुवता.. (१)

O Vayu, come to me, the purifier, the best among the divine powers, for the drinking of Soma. Come, O divine one, with your companions.

हे वायु! मैं व्रतचर्यादि द्वारा पवित्र होकर सबसे पहले तुम्हारे निमित्त मधुर सोम रस लाता हूँ, क्योंकि मैं स्वर्ग में जाना चाहता हूँ. हे अभिश्वणीय देव! तुम अपने अश्वों द्वारा सोमपान के लिए यहां आओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
इन्द्रश्च वायवेषां सोमानां पीतिमईर्थः. युवां हि यन्तीन्दवो निम्नमापो न सङ्घक्.. (२)

O Indra and Vayu, you are the recipients of the Soma's drink. As the flowing waters unite, so do you, when approached by the Soma drops.

हे वायु! तुम और इन्द्र इन सोमों को पीने की योग्यता रखते हो. इस तरह सोम तुम दोनों के पास जाते हैं, जैसे जल नीचे स्थान की ओर चलता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वायविन्द्रं शुष्मिणा सरथं श وسسپती. नियुत्वन्ता न ऊतय आ यात सोमपीतये.. (३)

Come, O Vayu and Indra, with your strength and chariot, you lords of sustenance, to our offerings and to drink Soma.

हे वायु! तुम और इन्द्र बल के स्वामी हो एवं घोड़ों से युक्त एक ही रथ पर चढ़ते हो. हम लोगों की रक्षा एवं सोमपान करने के लिए यहां आओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
या वां सन्ति पुरुस्पृहो नियुतॊ दाशुषे नरा. अस्मे ता यजवाहसेन्द्रवायू नि यच्छतम्.. (४)

O Indra and Vayu, bestow upon us the abundant riches and countless boons that you grant to the devoted sacrificer.

हे नेता एवं यज्ञपूर्णकर्ता इन्द्र व वायु! तुम्हारे पास बहुतों द्वारा अभिलषित अश्व हैं, उन्हें

Mandala 1 · Verse 5
वायो शतं हरीणां युक्वस्व पोष्याणाम्। उत वा ते सहसिणो रथ आ यातु पाजसा.. (५)

O Vayu, harness a hundred nourishing steeds, or let your powerful chariot approach with swiftness.

हे वायु! तुम सौ स्वस्थ अश्वों को अपने रथ में जोड़ो अथवा हजार को. उनसे युक्त तुम्हारा रथ शीघ्रता से आवे. (५)

Mandala 1 · Verse 6
सोममिन्द्राबृहस्पति पिबतं दाशुषो गृहे. मादयथां तदोकसा.. (६)

O Indra and Brihaspati, drink the Soma in the house of the sacrificer. May you be exhilarated there, dwelling together.

हे इंद्र एवं बृहस्पति! तुम हव्य देने वाले यजमान के घर में सोम पियो एवं वहीं निवास करके प्रसन्न बनो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
स इन्द्रजा प्रतिजन्यानि विश्वं शुष्मेण तस्थवाभि वीर्येण. बृहस्पतिं यः सुभुतं बिभर्ति वलग्पयति वन्दते पूर्वभाग्म्.. (७)

He, the supreme Lord, sustains all the diverse worlds with His might and power. He upholds the wise and benevolent, and is the first to be worshipped.

वही राजा अपनी शक्ति के द्वारा सभी शत्रुओं के बल को हराता है जो बृहस्पति का भली प्रकार भरण-पोषण करता है और सर्वप्रथम भाग पाने वाले के रूप में उनकी स्तुति करता है. (७)

Mandala 1 · Verse 8
स इक्ष्गतिं सुधित ओकसि स्वे तस्मा इळा पिन्वते विश्वदानीम्. तस्मै विशः स्वयमेवा नमन्ते यस्मिन्ब्रह्मा राजनि पूर्व एति.. (८)

He who contemplates within his own abode, from him flows nourishment for all. To him, people willingly bow, for the Brahma, the ruler, leads them.

वह इच्छा से युक्त होकर अपने घर में स्थित होकर, जिससे विश्व को दान देने वाला ब्रह्मा पूर्व में राजा के रूप में आता है, उसके लिए प्रजा स्वयं ही नमस्कार करती है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अप्रतीतो जयति सं धनानि प्रतिज्ञा-न्युत या सजन्या. अवस्येवो यः वरिवः कृणोति ब्रह्माणे राजा तमवन्ति देवाः.. (९)

The king who, without hesitation, conquers wealth and fulfills his vows, and who diligently serves the learned, is protected by the gods.

वह राजा बाधा के बिना शत्रुओं एवं अपनी प्रजाओं के धन पर अधिकार करके महान बनता है एवं देव उसी की रक्षा करते हैं, जो धनहीन एवं रक्षा के इच्छुक ब्राह्मण को धन देता है. (९)

Mandala 1 · Verse 10
इन्द्रश्च सोमं पिबते बृहस्पतेऽस्मिन् यज्ञे मन्दसाना वृष्णवसू. आ वां विशान्ति-च्छन्दवः स्वाभुवोऽस्मे रयिं सर्ववीरं नि यच्छतम्.. (१०)

O Indra and Brihaspati, drinking Soma in this sacrifice, rejoice and bestow upon us abundant wealth and heroic progeny.

हे बृहस्पति! तुम और इंद्र इस यज्ञ में प्रसन्न होकर यजमानों को धन दो एवं सोम-रस पियो. संपूर्ण शरीर को व्याप्त करने में समर्थ सोम तुम्हारे शरीर में प्रवेश करे. तुम हमें पुत्र-पौत्र युक्त धन प्रदान करो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
बृहस्पति इन्द्र वर्धतं नः सचा सा वां सुमतिर्भूवस्मे. अविष्ठ धियो जिगृतं पुरु-धी-जर्ज्जस्तमयो वणुभ्रामरातीः.. (११)

May Brihaspati and Indra grow us together with their favor; may their good will be ours. May they protect our thoughts and conquer all obstacles.

हे बृहस्पति और इंद्र! तुम हमें बढ़ाओ. हमारे प्रति तुम्हारी दया भावना एक ही साथ हो. तुम हमारे यज्ञकर्म की रक्षा करो, हमारी बुद्धियों को जगाओ एवं हम यजमानों के शत्रुओं से युद्ध करो. (११)

Mandala 1 · Verse 1
इदम् त्यपुरुतम् पुरस्ताज्जोयतिस्तमसो वयुनावदस्थात्. नूतं दिवो दुहितरो विभातीर्गातुं कृणवन्नृषसो जनाय.. (१)

This radiant light, born from the darkness, has arisen with knowledge. The new daughters of the sky shine forth, creating a path for humanity.

यह हमारे द्वारा स्तुति किया गया, सर्वप्रसिद्ध, परम विस्तृत एवं कान्ति युक्त तेज पूर्व दिशा में अंधकार से उदित हुआ था. निश्चय ही सूर्य की पुत्रीरूप एवं दीप्तिशालिनी उषाएँ यजमानों को गतिशील बनाने की सामर्थ्य रखती थीं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अस्थुर चित्र उषसः पुरस्तान्मिता इव स्वरवोऽश्वरेषु. व्यू व्रजस्य तमसो दारोच्छन्तीरवृच्छयः पावकाः.. (२)

The radiant dawn, like a mother, awakens the world with her golden rays, dispelling the darkness and bringing forth life's vibrant energies.

Mandala 1 · Verse 3
उच्चन्तीरघ चित्रयन्त भोज्ञाप्राधोदेयायोष्सो मघोनः। अचित्रे अन्त: पणय: ससन्तबुध्यमानास्तमसो विमध्ये.. (३)

The radiant dawn, dispelling darkness, awakens the divine wealth within, revealing the hidden treasures of the self, even amidst the deepest shadows.

आज अंधकार का नाश करती हुई एवं धन की स्वामिनी उषाएं भोजन देने वाले यजमानों को सोम रस आदि दान करने के हेतु उत्साहित करती हैं. चेतना रहित गाढ़े अंधकार में दान न देने वाले पण लोग चेतना रहित होकर पड़े रहे. (३)

Mandala 1 · Verse 4
कुविट्स देवी: सनयो नवो वा यामो बभ् yadubhaso वो अघ. येना नवग्ने अङ्गिरो दशग्ने सप्तास्ये रेवती रेवदूष.. (४)

May the divine mothers, the new and the ancient, protect us from all evil. By their grace, may we be blessed with abundance and prosperity.

हे प्रकाशयुक्त एवं धनशालिनी उषाओ! तुम्हारा वही पुराना या नया रथ आज यज्ञ में अनेक बार आवे, जिस रथ के द्वारा तुमने सात छंदरूप मुख वाले, नौ गायों अथवा दस गायों वाले अंगिरावंशीय ऋषियों को दीप्त किया था. (४)

Mandala 1 · Verse 5
यूयं हि देवीऋतयुग्भिरश्रै: परिप्रयाथ भुवनानि सहः। प्रबोधयन्तीरुपस: ससन्तं द्विपाच्चतुष्पाच्चरथाय जीवम्.. (५)

You, O Goddesses, with your radiant rays, pervade the worlds, awakening the sleeping life of bipeds and quadrupeds to movement.

हे दीप्ति युक्त उषाओ! तुम सोते हुए मनुष्य एवं पशु रूप जीवों को गमन के लिए जगाती हुई यज्ञ में जाने वाले घोड़ों की सहायता से सारे विश्व का तुरंत भ्रमण कर लो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
क्व स्विदासां कतमा पुराणी यया विधाना विदधुऋभृणाम्. शुभं यच्छुभा उपसश्रन्ते न वि ज्ञायन्ते सदृशीर्जर्याः.. (६)

Where is that ancient one, by whose rites the Rbhus fashioned? Whom the auspicious ones worship, but whose equals are not known.

वे प्राचीन उषाएं कहां हैं, जिनके लिए ऋभुओ ने चमस बनाने का काम किया था? जब तेजोविशिष्ट उषाएं प्रकाश फैलाती हैं, तब एक समान होने के कारण वे नई या पुरानी नहीं जान पड़तीं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
ता घा ता भद्रा उपसः पुरासुरभिष्टुह्यमा ऋजजात्सतयाः। यास्वीजान: शशमान उक्थै: स्तुवज्छन्दोविण सह आप.. (७)

The auspicious dawns, praised by the gods, arise with their radiant light, bringing forth the hymns of the devoted.

अपने आगमन मात्र से धन देने वाली, यज्ञ के निमित्त एवं सत्व फल देने वाली उषाएं कल्याणकारी रूप में पहले उत्पन्न हुई थीं। यज्ञ करने वाले मंत्रों द्वारा उन उषाओं की स्तुतियां करके एवं छंदों द्वारा प्रशंसा करके तुरंत धन लाभ करते थे. (७)

Mandala 1 · Verse 8
ता आ चरन्ति समना पुरस्तात्समनाः। ऋतस्य देवी: सदसो बुधानां गवा न सर्गा उषसो जरन्ते.. (८)

The divine goddesses of Truth, moving in unison, illuminate the path forward, their brilliance awakening the wise. Like the dawn's rays spreading, they banish darkness and bring forth new beginnings.

सर्वत्र समान एवं प्रसिद्ध उषाएं पूर्व दिशा में केवल आकाश से सब जगह घूमती हैं एवं

Mandala 1 · Verse 9
ता इन्द्र इव समना समानमीरितवर्णा उषसश्रन्ति. गृहन्तीरभयसितं रुशद्धिः शुक्रास्तनूभिः शुच्यो रुचानाः.. (९)

Like Indra, the dawns, with unified brilliance and color, arrive together, filling the sky with their radiant, pure, and fearlessly shining forms.

वे एक रूप वाली, समान व अनगिनत रंगों से युक्त उषारें अपने दीप्तिशाली शरीर द्वारा प्रकाश फैलाती हुई एवं अपनी किरणों से महान् अंधकार का नाश करती हुई विचरण करती हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
रयिं दिवो दुहितरो विभातीः प्रजावन्तं यच्छताऽऽसु देवीः. स्योनादा वः प्रतिबुध्यमानाः सुवीर्यस्य पतयः स्याम.. (१०)

May you, O radiant daughters of the sky, bestow upon us abundant wealth and progeny. Waking from your presence, may we become masters of great strength and heroism.

हे तेजस्वी सूर्य की पुत्रियो एवं दीप्तिशाली उषारो! तुम हमें पुत्र-पौत्रादि से युक्त धन दो. हम सुख प्राप्ति के कारण तुम्हें जगा रहे हैं. इस प्रकार हम पुत्र-पौत्र युक्त धन के स्वामी होंगे. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
तद्दो दिवो दुहितरो विभातीरूप ब्रुव उषसो यजकेतुः. वयं स्याम यशसो जनेषु तद्द्यौश्च धन्ता पृथिवी च देवी.. (११)

May we be glorious among people, as the daughters of the sky, the shining Ushas, and the divine Earth and Sky bestow their blessings.

हे तेजस्वी सूर्य की पुत्री रूपी उषारो! हम यज के ज्ञापक रूप में तुमसे प्रार्थना कर रहे हैं कि हम सब लोगों के मध्य में यश और अन्न के स्वामी बनें. स्वर्ग एवं दीप्तिपूर्ण धरती हमारा वह यश धारण करे. (११)

Mandala 1 · Verse 12
rathāya nāvam uta no gṛhāya nityāritrām padvatīṁ rāsy agne | asmākaṁ vīrām̐ uta no maghono janām̐ś ca yā pārayāc charma yā ca

Mandala 1 · Verse 13
abhī no agna uktham ij juguryā dyāvākṣāmā sindhavaś ca svagūrtāḥ | gavyaṁ yavyaṁ yanto dīrghāheṣaṁ varam aruṇyo varanta

Mandala 1 · Verse 1
प्रति ष्प्या सुनरी जनी व्युच्छन्ती परि स्वसुः. दिवो अदशर्ि दुहिता.. (१)

The radiant daughter of the sky, Dawn, awakens, illuminating the world with her brilliance.

भली प्रकार स्तुत, प्राणियों की कुशल नेत्री एवं उत्तम फलों को जन्म देने वाली सूर्यपुत्री उष दिखाई देती है एवं रात बीतने पर अंधेरे का नाश करती है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अश्वे चित्राएबी माता गवामृतावरी. सखाभृद्भिन्ोरुषाः.. (२)

The mother of the spotted horse, the nourisher of cows, and the radiant dawn are friends.

घोड़े के समान सुंदर, दीप्तिशालिनी, किरणों की माता एवं यज की स्वामिनी उषार अश्विनीकुमारों के साथ स्तुत हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उत सखास्यश्विनो रुत माता गवामसि. उतोश्वो वस्व ईशिषे.. (३)

You are the friend of the Asvins, the mother of cows, and the lord of wealth.

हे उषार! तुम अश्विनीकुमारों की सखा, किरणों की माता एवं धन की स्वामिनी हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यावद्ब्रह्मणस्त्वा চিকিৎসत्स्नूतावरि प्रति स्तोमैर्भूतसहः.. (४)

May we, with our hymns, praise and serve the Creator, the source of all beings, as long as the universe endures.

हे सत्य वचन वाली एवं शत्रुओं को दूर भगाने वाली उषा! हम स्तुतियों द्वारा तुझ ज्ञान कराने वाली को जगाते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
प्रति भद्रा अदृक्षत् गर्वा सगां न रश्मयः. ओषा अप्रा उरु जयः.. (५)

The radiant dawn, like the sun's rays, dispels darkness, bringing forth a vast and victorious light.

प्रशंसा के योग्य किरणें दिखाई देती हैं. उषा ने संसार को वर्षा की धारा के समान तेज से भर दिया है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
आपृष्पी विभावरि व्यावज्योतिषा तमः. उषो अनु स्वधमव.. (६)

O radiant dawn, you dispel the darkness with your light. Awaken us to your divine brilliance.

हे कान्तिशालिनी उषा! तुम जगत को तेज से पूर्ण करती हुई अंधकार को दूर भगाओ. इसके पश्चात् अस्त्र की रक्षा करो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
आ द्यां तनोषि रश्मिभिरान्तरिक्षनमु प्रियम्. उषः शुक्रेण शोचिषा.. (७)

O Dawn, you spread forth your beloved light through the heavens with your radiant rays.

हे उषा! तुम दीप्त आकाश से युक्त होकर किरणों द्वारा स्वर्ग एवं प्रिय अंतरिक्ष को व्याप्त करो. (७)


Mandala 1 · Verse 8
अग्निरीशे वसव्ययानिर्महः सौभाग्यस्य. तान्यस्मभ्यं रासते.. (८)

May Agni, the divine fire, bestow upon us abundant wealth and great fortune.

अग्नि धन एवं महान् सौभाग्य के स्वामी हैं. वे हमें धन एवं सौभाग्य प्रदान करें. (८)

Mandala 1 · Verse 9
उभो मध्योव्या वह सूतते वार्या पुरू. असभ्यं वाजिनीवति.. (९)

O powerful one, you who possess many horses, you who are the mother of all, you who are the source of all that is desirable, you are the one who sustains and protects all beings.

हे धनस्वामिनी, प्रिय-सत्य-रूप वाली एवं अन्नवती उषा! तुम हमें अधिक मात्रा में शोभन धन दो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
तत्सु नः सविता भगो वरुणो मित्रो अर्यमा. इन्द्रो नो राधसा गमत्.. (१०)

May Savitr, Bhaga, Varuna, Mitra, and Aryaman bestow their grace upon us, and may Indra come to us with abundance.

सविता, भग, वरुण, मित्र, अर्यमा एवं इंद्र जिस धन के साथ आते हैं, वह धन वे सब हमें दें. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
धामन्ते विश्वं भुवनमधि श्रितमन्तः समुद्रं ह्य१न्तरायुषि. अपांमनीके समिधे य आभृतस्तमश्याम मधुमन्तं त ऊर्मिम्.. (११)

Within the divine light, the universe resides, supported by the waters, and within the life-force. May we partake of that sweet, flowing essence.

तुम्हारा तेज सारे विश्व में व्याप्त है. वह सागर में वाडवाग्नि, आकाश में सूर्य, हृदय में वैश्वानर, अन्न में आहार, जलों में विद्युत व संग्राम में वीरता के रूप में है. इस प्रकार सभी प्राणी तुम्हारे तेज के आश्रित हैं. उसकी घृत-रूपी धारा का मधुर रस हम चखते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
अवोचाम कवये মেধाय वाचो वन्दार वृषभाय वृष्णे। गविष्ठिरो नमसा स्तोममग्नौ दिदीव रुक्ममुच्चेज्यमश्रेत्.. (१२)

I offer praise with devotion to the intelligent poet, the strong and energetic one, whose glory shines brightly like gold, worthy of worship.

हम मेघावी, पवित्र, कामवर्षा व युवा अग्नि के निमित्त वंदनापूर्ण स्तोत्र बोलते हैं. गविष्ठिर ऋषि आकाश में दीप्त एवं विस्तृत गति वाले आदित्य के समान अग्नि के प्रति नमस्कारपूर्ण स्तुति बोलते हैं. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
astāvy agniḥ śimīvadbhir arkaiḥ sāmrājyāya prataraṁ dadhānaḥ | amī ca ye maghavāno vayaṁ ca mihaṁ na sūro ati niṣ ṭatanyuḥ

Mandala 1 · Verse 1
कुमारं माता युवतिः समुग्धं गुहा बिभर्ति न ददाति पित्रे। अनीकमस्य न मिञ्जजनासः पुरः पश्यन्ति निहितमरतौ.. (१)

The young mother conceals the child, not giving him to the father. His companions cannot see his face, for he is hidden in the womb.

युवती माता ने कुमार को रास्ते में चलते समय घायल हो जाने पर गुफा में रखा, उसके पिता को नहीं दिया, लोग उसके हिसिंत रूप को नहीं देखते हैं, किंतु असुंदर स्थान में रखा हुआ देखते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
कमेतं त्वं युवते कुमारं पेषीं बिभर्षि महिषी जजान. पूर्वाहिं गर्भः शरदं वर्धपश्यं जातं यदूत माता.. (२)

You carry this young prince, this child of the queen, who was conceived in the morning and grows towards autumn, born from the mother.

हे युवती! तुम हिंसा करने वाली होकर भी कुमार को क्यों धारण करती हो? पूजनीया अरण्णि ने अग्निरूपी कुमार को जन्म दिया है, अरण्णि में गर्भरूप अग्नि कई वर्ष तक बढ़ते रहे. माता ने जिस पुत्र को जन्म दिया, उसे हमने देखा. (२)

Mandala 1 · Verse 3
हिरण्यदन्तं शुचिवर्णमारात्क्षेत्रादपश्यंयुधा मिमानम्। ददानो अस्मा अमृतं विपुक्वल्किं मामनिन्द्राः कृणवन्नुक्थाः.. (३)

The radiant, golden-toothed one, pure in form, approached from afar, bestowing immortality upon us. May the hymns of praise make us strong, O Indra.

हमने सुनहरी ज्वालास् रूपी दांतों वाले, उज्ज्वल-वर्ण एवं आयुधों के समान ज्वालाएं बनाने वाले अग्नि को देखा. हमने अग्नि की अविनाशी एवं सर्वव्यापी स्तुति की है. इंद्र के विरोधी एवं स्तुति न करने वाले हमारा क्या कर सकते हैं? (३)

Mandala 1 · Verse 4
क्षेत्रादपश्यं सनुतश्नरं सुमेधं न पुरु शोभमानम्। न ता अग्रभञ्जनिष्ट हि षः पलिक्नीरिधवत्यो भवन्ति.. (४)

The wise one, seeing the field and the farmer, does not desire the fleeting glory of men, for such things are impermanent like the shedding of leaves.

हमने क्षेत्र में गोसमूह के समान चुपचाप घूमते हुए एवं स्वयं अधिक रूप से सुशोभित अग्नि को देखा है. लोग पिशाची के आक्रमण के समय वाली अग्नि की पीली ज्वालाओं को स्वीकार नहीं करते, अग्नि पुनः उत्पन्न हुए एवं उनकी वृद्धा ज्वालाएँ युवा बन गईं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
के मे मदकँ वि यवन्तं गोभिनं येषां गोपा अरणश्रिदास. य ई जगभ्भुरव ते सृजन्त्वाजाति पश्थ उप नश्चिकित्वान्.. (५)

May those who are strong and possess abundant cattle, whose protectors are swift and devoted, and who have conquered all, now create for us a path for our cattle and bring us knowledge.

Mandala 1 · Verse 6
वसां राजानं वसतिं जनानामरातयो नि दुर्मर्त्येषु. ब्रह्माप्यनेरेव तं सृजन्तु निन्दितारो निन्दासो भवन्तु.. (६)

Who separated our nation from the cows? Was there no protector with those cows? May those who seize our nation be destroyed. May Agni, who knows our desires, bring our cattle near.

हमारे राष्ट्र को गायों से पृथक् किसने किया था? क्या उन गायों के साथ रक्षक नहीं था? हमारे राष्ट्र पर अधिकार करने वाले लोग नष्ट हों. हमारी अभिलाषा को जानने वाले अग्नि हमारे पशुओं को निकट लावें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
शुन्श्चिच्छेपं निदितं सहसाधुपादमुञ्चो अश्मिह हि षः. एवास्दमग्ने वि मुमुग्धि पाशान्होताश्रिकित्व इह तु निषध.. (७)

O Agni, the divine priest, release us from these bonds and fetters, for you are the remover of obstacles and the bestower of liberation.

हे अग्नि! तुमने भली प्रकार बंधे हुए शृणःशेप ऋषि को हजारों रूप वाले यूप से छुड़ाया था, क्योंकि उसने तुम्हारी स्तुति की थी. हे होता एवं ज्ञानसंपन्न अग्नि! इस वेदी पर बैठो एवं हमें सभी बंधनों से मुक्त करो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
हृणीयामानो अप हि मदेयः प्र मे देवानां व्रतपा उवाच. इन्द्रो विद्वाँ अनु हि त्वा चवक्ष तेनाहम्ने अनुशिष्टि आगाम्.. (८)

The one who is ashamed, even if he is intoxicated, has spoken to me, the vow-keeper of the gods. Indra, knowing this, has instructed me, and through that instruction, I have come.

हे अग्नि! तुम क्रुद्ध होने पर हमारे पास से चले जाते हो. देवों का व्रत पालन करने वाले इंद्र ने हमसे यह कहा था. विद्वान् इंद्र ने तुम्हें देखा था. हे अग्नि! उनके अनुशासन में रहकर हम तुम्हारे समीप आवेंगे. (८)

Mandala 1 · Verse 9
वि ज्योतिषा बृहता भात्यग्निरविर्विश्र्वानि कृणुते महित्वा. प्रादेवीर्मायाः सहते दुरेवाः शिशिते शृङ्गे रक्षे विनिक्षे.. (९)

The radiant sun, like a great fire, illuminates all with its brilliance, and through its majesty, it creates the universe. It withstands the wicked illusions, sharpening its horns to destroy the demons.

अग्नि महान् तेज द्वारा विशेष प्रकार से चमकते हैं. एवं अपनी महिमा द्वारा सभी पदार्थों को प्रकट करते हैं. वे प्रज्वलित होकर आसुरी दुःखजनक माया को नष्ट करते हैं एवं राक्षसों को नष्ट करने हेतु ज्वारूप सींगों को पैना बनाते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
भूरि नाम वन्दमानो दधाति पिता वसो यदि तज्जोषयासे. कुविदेवस्य सहसा चकानः सुन्नमनिनवते वावघानः.. (१०)

He who worships the abundant names of the Father, and pleases Him, is filled with His glory and strength.

हे निवासदाता एवं पालनकर्ता अग्नि! तुम हमें कब देखोगे? तुम उस हवि को स्वीकार करते हो जो तुम्हारे नाम की बार-बार वंदना करके दी जाती है. यजमान द्वारा बहुत हवि पाने के इच्छुक एवं बल से युक्त अग्नि वृद्धि पाकर सुख देते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
त्वमङ्ग् जरितारं यविष्ठ विश्वान्याग्ने दुरिताति पर्षि. स्वेना अदभ्रणिवपो जनासोऽज्ञातकेता वर्जिना अभवन्.. (११)

O Agni, most youthful and powerful, you carry us beyond all evils. Those who are without your light and knowledge become lost and bereft.

हे स्वामी एवं अतिशय युवा अग्नि! तुम स्तुतिकर्त्ता पर अनुग्रह करके उसे सभी पापों से छुड़ा देते हो. उसे चोर दिखाई देने लगते हैं एवं अनजाने चिह्नों वाले शत्रु लोग उससे दूर हो जाते हैं. (११)


Mandala 1 · Verse 12
इमे यामासस्त्वदिग्भुवन्-वसे वा तदिदागोऽवाचि. नाहायमग्नरभिरभस्तये नो न रिषते वावघानः परा दात्.. (१२)

These are the days of Yama; in your dwelling, or elsewhere, this has been declared. This fire does not consume us, nor does it harm the one who is not wicked.

वे स्तुतिसमूह तुम्हारे सामने जाते हैं. निवासदाता अग्नि के सामने अपराध को स्वीकार करते हैं. अग्नि हमारी स्तुति से बढ़ते हुए हमें निंदक अथवा हिंसक के हाथ में न सौंपे. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
svāhākṛtāny ā gahy upa havyāni vītaye | indrā gahi śrudhī havaṁ tvāṁ havante adhvare

Mandala 1 · Verse 1
त्वामग्ने वसुपतिं व sunaनामभि प्र मन्देऽध्वरेषु राजन्. त्वया वाजां वाजयन्तो जयेमाभि ध्याम पृत्सुतीर्मत्यूनाम्.. (१)

O Agni, lord of wealth and protector of treasures, I praise you in sacrifices. By your grace, may we, who seek nourishment, conquer our enemies in battle.

हे संपत्तियों के स्वामी अग्नि! हम तुम्हें लक्ष्य करके यज्ञों में स्तुति करते हैं. हे तेजस्वी अग्नि! हम अन्न के अभिलाषी तुम्हारी कृपा से अन्न प्राप्त करें एवं मानवों की सेना को जीतें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
हव्यवाळग्निजरजरः पिता नो विभुर्विभावा सुदृशीकोऽस्मे. सूगाईपत्याः समिषो दिदीह्यस्मद्रयःक्सं मिमीहि श्रवांसि.. (२)

O Agni, the giver of offerings, our father, the powerful and radiant one, grant us good vision. Shine forth with our oblations, and bestow upon us abundant wealth and fame.

हव्य वहन करने वाले अग्नि जरारहित होकर हमारे पालक बनें एवं हमारे प्रति व्यापक, तेजस्वी एवं दर्शनीय हों. हे अग्नि! शोभन गार्हपत्य से युक्त अन्नो को तुम भली प्रकार प्रदान करो तथा हमें प्रचुर मात्रा में अन्न दो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
विशां कविं विपशपतिं मानुषाणां शुचिं पावकं घृतपृष्ठमग्निम्, न होतारं विश्वविदिं दधिध्वं स देवेषु वनते वार्याणि.. (३)

Cherish Agni, the poet of the people, the lord of the wise, pure and purifying, whose back is ghee. He is the priest, all-knowing, who desires the best for the gods.

हे ऋत्विजों! तुम मानव प्रजाओं के स्वामी, मेधावी, पवित्र, दूसरों को पवित्र करने वाले, प्रदीपप्त शरीर, होता एवं सर्वज्ञ अग्नि को धारण करो। वे देवों के संगृहीत धन को हम लोगों में बांटते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
जुषस्वाग्न इळया सजोषा यतमानो रश्मिभिः सूर्यस्य. जुषस्व नः समिधं जातवेद आ च देवान्विहवया वक्षि.. (४)

O Agni, accept our offerings with joy, as you are pleased by the sun's rays. O Jatavedas, accept our fuel and bring the gods to this sacrifice.

हे अग्नि! तुम धरती के साथ प्रेमयुक्त एवं सूर्यकिरणों के साथ गतिमुक्त होकर हमारी स्तुतियां स्वीकार करो. हे जातवेद! हमारे द्वारा दी गई समिधाओं को स्वीकार करो. तुम हव्य-भोजन के निमित्त देवों को बुलाओ एवं हव्यवहन करो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
जुष्टो दम्ना अतिथिंढरो इमं नो यज्ममु याहि विद्वान्. विश्वग्ने अभ्युजो विहृत्य शत्रयतामा भरा भोजनानि.. (५)

O Agni, adorned and honored, come to this sacrifice, knowing our offerings. Bring us abundant food, and may our enemies be vanquished.

हे अग्नि! तुम महान्, शांतचित्त एवं अतिथि के समान पूज्य बनकर हमारे इस यज्ञ में आओ. हे जानकार अग्नि! तुम सभी शत्रुओं को नष्ट करो एवं शत्रुता करने वालों का धन छीन लो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
वधंन दस्युं प्र हि चातयस्व वयः कृण्वानस्तन्वेऽस्वायै. पिपांषि यत्सहससपुत्र देवान्त्सो अग्ने पाहि नृतम वाजे अस्मान्.. (६)

O Agni, son of strength, protect us in battle and grant us sustenance, as we offer ourselves to you, our bodies and souls.

हे अग्नि! तुम यजमान रूपी पुत्रों को अन्न देते हो एवं शत्रुओं का आयुधों द्वारा विनाश करते हो. हे नेताओं में श्रेष्ठ अग्नि! तुम संग्राम में हमारी रक्षा करो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
वयं ते अग्ने उक्थैर्विधेम वयं हव्यैः पावक भद्रशोचे. अस्मे रयिं विश्वाएं समिनवास्मे विश्वानि द्रविणानि धेहि.. (७)

O Agni, purifier with radiant brilliance, we worship You with hymns and offerings. Grant us abundant wealth and bestow upon us all prosperity.

हे अग्नि! हम लोग स्तोत्र-समूहों एवं हव्य-अन्नो द्वारा तुम्हारी सेवा करेंगे. हे पवित्रकर्ता तथा कल्याणकारी प्रकाशयुक्त अग्नि! हमें सबके द्वारा चाहा गया धन दो एवं सभी संपत्तियां हमें प्रदान करो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अस्माकमग्ने अध्वरं जुषस्व सहसः सूनो त्रिपृष्ठस्य हव्यम्. वयं देवेषु सुकृतः स्याम शर्मणा नस्त्रिवरूपेन पाहि.. (८)

O Agni, son of strength, accept our sacrifice and offering. May we be well-pleasing to the gods; protect us with your threefold form and grace.

हे अग्नि! हम लोगों के यज्ञ को स्वीकार करो. हे बल के पुत्र एवं तीन स्थानों में रहने वाले अग्नि! तुम हव्य को स्वीकार करो. हम देवों के मध्य रहकर शोभन कर्म करने वाले बनें. तुम तीन प्रकार के उत्तम सुखों द्वारा हमारी रक्षा करो. (८)

Mandala 1 · Verse 1
अग्निं तं मन्ये यो वसुरस्तं यन्ति धेनवः. अस्तमर्वन्त आश्वोऽस्तं न्यससो वाजिनं इर्षं स्तोतृभ्य आ भर.. (१)

I consider that one the true Agni, to whom the cows come, to whom the horses come, and to whom the swift steeds come. Bring forth abundance for the singers.

हे अग्ने! त्वं नो निवासदाः, गृहाणां सवका आश्रयः, येन गच्छसि शीघ्रां वाजीन्, हव्यं प्रयच्छन् यजमानाय प्रसन्नः।

Mandala 1 · Verse 2
सो अग्नीन् व सुरूणे सं यमायन्ति धेनवः। सम्वन्तो रघुदवः सं सुजातासः सूर्य इषं स्तोतृभ्य आ भर.. (२)

The cows approach Agni and Varuna, the Raghus and the well-born gather together; may the Sun bring nourishment to the singers.

सो अग्नियों व सुरूणे सं यमायन्ति धेनवः। सम्वन्तो रघुदवः सं सुजातासः सूर्य इषं स्तोतृभ्य आ भर.. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अग्निहि वाजिनं विश्वं दादाति विश्वचर्षणिः। अग्नी राये स्वाभुवं स प्रीतो याति वार्यमिषं स्तोतृभ्य आ भर.. (३)

The all-seeing Agni, the sustainer of all, bestows wealth and nourishment upon those who offer to Him. Pleased, He brings forth abundant sustenance for His worshippers.

Mandala 1 · Verse 4
आ ते अग्ने इध्मंघि घृमन्तं देवाजर्म्। यद्द् स्वा ते पनीयसी समिद्धीदयति घवीषं स्तोतृभ्य आ भर.. (४)

O Agni, accept this fuel, pleasing to the gods. When you are well-kindled and radiant, bring forth abundance for your worshippers.

Mandala 1 · Verse 5
आ ते अग्ने ऋचाः हविः शुक्रस्य शोचिषस्पते। सुश्रुन्द्र दस्म विषपते हव्यवाद् तुभ्यं ह्यत इषं स्तोतृभ्य आ भर.. (५)

O Agni, radiant lord of flames, accept our pure offerings. Bring us strength and sustenance, O powerful one, for we sing your praises.

Mandala 1 · Verse 6
प्रो ते अग्नोऽग्निष्विष्वं पुष्यन्ति वार्यम्। ते हिन्विरे त इन्विरे त इषष्यन्त्यानुषिभिः स्तोतृभ्य आ भर.. (६)

O Agni, those who nourish you with offerings, they indeed prosper and are strengthened by the hymns of the praisers. Bring forth abundance for them.

Mandala 1 · Verse 7
ये पत्नभिः शफ़नां व्रजा भुरन्त गोनामिषं स्तोतृभ्य आ भर.. (७)

May the cows, with their calves, bring forth milk for the worshippers, and may they offer them sustenance.

हे अग्नि! तुम्हारी ये ज्वालाएं अत्यधिक रूप में अन्न स्वामिनी होकर बढ़ें. ये ज्वालाएं पतन के द्वारा खुरों वाली गायों की इच्छा करें. हे अग्नि! तुम स्तुतिकर्ताओं के लिए अन्न लाओ. (७)

Mandala 1 · Verse 1
सखायः सं वः सम्यञ्चमिषं स्तोमं चामनये। वर्षिष्ठाय क्षितीनांयूजां नप्त्रे सहस्वते.. (१)

O friends, let us together offer this hymn of praise to the mighty one, the descendant of strength, who is the greatest among all beings.

हे मित्ररूप ऋत्विजों! तुम यजमानों के कल्याण के निमित्त अत्यंत वृद्धिप्राप्त, बल के पुत्र एवं शक्तिशाली अग्नि के लिए अन्न एवं स्तुति प्रदान करो. (१)


Mandala 1 · Verse 2
कुत्रा चिद्यस्य समृतौ रुणवा नरो नृषदनै। अर्हन्तश्श्रिधमिन्ते सञ्जनयन्ति जन्तवः.. (२)

Where there is wealth, there are those who guard it, and those who seek to acquire it; thus, beings are born and die.

वे अग्नि कहां हैं, जिन्हें यज्ञशाला में पाकर ऋत्विज प्रसन्न हो जाते हैं, जिन्हें पूजा करके प्रज्वलित किया जाता है एवं जिनके हेतु जंतुओं को उत्पन्न किया जाता है? (२)

Mandala 1 · Verse 3
सं यदिषो वनामहं सं हव्या मानुषेणाम्। उत घुमस्य श्वस ऋतस्य रश्मेमा ददे.. (३)

I offer my desires and the offerings of humanity to the divine. I embrace the breath of the divine and the rays of cosmic order.

जब हम अग्नि को अन्न देते हैं एवं वे हमारा हव्य स्वीकार करते हैं, तब वे तेजस्वि अन्न की शक्ति द्वारा जल ग्रहण करने वाली किरणों को अपनाते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
स स्मा कृणोति केतुमा नक्तं चिदूर आस्ते। पावको यद्वन्स्पतीन्स्मा मिनात्यजरः.. (४)

He makes a sign, shining brightly even in the darkness. The pure, unaging one pervades all beings, just as fire consumes wood.

जब पवित्र करने वाले एवं जरारहित अग्नि वनस्पतियों को जलाते हैं, तब वे रात में दूर तक के लोगों को ज्ञान करा देते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अव स्म यस्य वेषणे खेदं पथिषु जुहति। अभीमहं स्वजेन्यं भूमा पृष्ठे रुहुः.. (५)

Those who, in their desire for Him, cast aside worldly weariness on the path, embrace Him with their own strength, and ascend to the highest realms.

अग्नि की सेवा के समय गिरी हुई घी की बूंदों को अध्वर्यु लोग ज्वालाओं में डाल देते हैं. पुत्र जिस प्रकार पिता की गोद में चढ़ जाता है, उसी प्रकार घी की धाराएं अग्नि पर चढ़ती हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 1
एष घृणमुत श्रव आ चितं मत्स्येषु धाः...(१)

This is the divine essence, the hearing, the mind, the fish, the flowing...

हे घृतभोजि अग्नि! हमारी स्तुतियां सबके पालक तुम्हें सुख दें. तुम स्तुतिकर्ताओं को धन, अन्न एवं शांति प्रदान करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वामग्ने अतिथिं पूर्वं विशः शोचिष्केशं गृहपतिं नि बेदिरे. वृहतकेतुं पुरुषरूपं धनस्पृतं सुशर्माणं स्ववसं जरदिक्षभम्.. (२)

O Agni, the people first recognized you as the radiant guest, the householder with fiery hair, the one whose brilliance is vast, who is of human form, desired for wealth, the bestower of protection, and ancient.

हे अतिथि के समान पूज्य, प्राचीन, दीप्तजوالरूपी केशों वाले, अनेक रूपों वाले, धनदाता, सुख देने वाले, भली-भाँति रक्षा करने वाले एवं पुराने वृक्षों को नष्ट करने वाले अग्नि! यजमानों ने तुम्हें गृहपति के रूप में स्थान दिया है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्वामग्ने मानुषीरीळ्ळे विशो होत्राविन्दं विविचिं रत्नधाततमम्. गुहा सन्तं सुभं विश्वदृशं तुविष्यणंसं सुयजं घृतश्रयम्.. (३)

O Agni, most brilliant and bestower of treasures, you are invoked by human prayers, dwelling in the heart, all-seeing, and worthy of worship, sustained by offerings.

हे शोभन धन वाले, यज के ज्ञाता, सत-असत् के विवेक रत्न देने वालों में उत्तम, गुहा में स्थित, सबके दर्शनीय, अधिक शब्द करने वाले, शोभन-यजकर्त्ता एवं घी का आश्रय लेने वाले अग्नि! यजमान तुम्हारी स्तुति करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
त्वामग्ने धर्णसिं विश्वधा वर्य गीर्भिर्गुणन्तो नमसोप सेदिम. स नो जुषस्व समिधानोऽग्निर्देवो मर्त्यस्य यशसा सुदीतिभिः.. (४)

O Agni, the sustainer of all, we approach you with hymns and reverence. May this awakened divine fire, radiant with glory, be pleased with us.

Mandala 1 · Verse 5
त्वमग्ने पुरुषरूपो विशेषिविशो वयो दशसि प्रत्नथा पुरुष्टुत. पुरुषयज्ञा सहसा वि राजसि त्विषिः सा ते तित्विषणास्य नाधुषे.. (५)

You, O Agni, are the divine person, the protector of all beings, praised by many. You shine forth with radiant energy, a powerful and glorious presence.

हे अनेक रूपधारी अग्नि! तुम प्राचीन काल के समान सभी यजमानों को धन देते हो. हे बहुतों द्वारा स्तुत अग्नि! तुम अपनी शक्ति से ही बहुत से अन्न के स्वामी बनते हो. तुझ दीप्तिशाली की दीप्ति को कोई पराजित नहीं कर सकता. (५)

Mandala 1 · Verse 1
त्वामग्ने हविष्मन्तो देव मतार्स ईळते. मन्ये त्वा जातवेदसं स हव्या वक्ष्यानुष्क्.. (१)

O Agni, the offerers of oblations worship you, the divine, the knowing one, who carries our offerings.

हे दीप्तिशाली अग्नि! मनुष्य हव्य लेकर तुम्हारी स्तुति करते हैं. हे जातवेद! हम तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम हवन की सामग्री को सदा वहन करते हो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अग्निहोता दासवत् क्षयस्य वृक्तबर्हिः. सं यज्ञासभ्रन्नि यं सं वाजासः श्रवस्यः.. (२)

The fire priest, like a servant, prepares the sacrificial grass, and the offerings and glories unite with him.

जिन अग्नि के साथ सभी यज्ञ चलते हैं एवं यजमान को कीर्ति दिलाने वाला हव्य जिन्हें प्राप्त होता है. वह हव्य सामग्री देने वाले एवं कुश उखाड़ने वाले यजमान के यज्ञ के लिए देवों को बुलाते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उत् स्म यं शिशुं यथा नव जनिष्टारणी. धर्तारं मानुषाणां विशामग्निं स्वधर्म्.. (३)

As a newborn child, the fire of the people, the sustainer of humanity, is born anew in its sacred duty.

भोजन के पाक द्वारा मानवों का पोषण करने वाले एवं यज को सुशोभित करने वाले अग्नि को दोनों अरणियों नए बालक के समान जन्म देती हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
उत् स्म दुर्भिसै पुत्री न ह्दारिणाम्, पुरू यो दर्गधासि वनाग्ने पशुनं यवसे.. (४)

The wise one, like a mother, protects the weak and the helpless, just as the forest fire protects the cattle from the grass.

हे अग्नि! जिस प्रकार टेढ़ी चाल वाले सांप का बच्चा कठिनाई से पकड़ा जाता है, उसी प्रकार तुम्हें पकड़ना भी कठिन है. घास में छोड़ा हुआ पशु जैसे घास खाता है, उसी प्रकार तुम वनों को जला देते हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अथ स्म यस्याचार्यः सम्यक्संयन्ति धूमिनः, यदीमहं त्रितो दिव्युप ध्मातेव धमति शिश्तिे ध्मातरी यथा.. (५)

When the teacher, like a skilled bellows-worker, diligently fans the flames of knowledge, the disciple's mind is ignited and illuminated.

जिस धूमयुक्त अग्नि की लपटें भली प्रकार सब ओर फैलती हैं, तीन स्थानों में रहने वाले वे अग्नि अपने आप अपनी लपटें आकाश में इस तरह बढ़ाते हैं, जैसे लोहार धौंकनी के द्वारा आग भड़काता है. अग्नि धौंकनी वाले लोहार के समान अपने को तेज करते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 1
जनस्य गोपा अजनिष्ट जाग्रुविरग्निः सुदक्षः सुविताय नव्यसे. घृतप्रतीको बृहता दिविस्पृशा घुमद्धि भाति भरतेभ्यः शुचिः.. (१)

The vigilant protector of people, the all-knowing Agni, is born for our well-being, radiant and ever-new. Shining brightly in the vast heavens, He is pure and sustains those who offer.

लोगों की रक्षा करने वाले, सदा जागरणशील एवं सबके द्वारा प्रशंसनीय शक्ति वाले अग्नि ने दूसरों के नवीन कल्याण के हेतु जन्म लिया है, घृत के कारण प्रज्वलित शरीर वाले, अधिक तेज से युक्त एवं शुद्ध अग्नि ऋत्विजों के लिए दीप्तिशाली बनते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यज्ञस्य केतुं प्रथमं पुरोहितमग्निं नरस्विष्ठषस्थे समीधिरे. इन्द्रोण देवैः सरथं स बर्हिषि सीदन्नो होता यजथाय सुकृतुः.. (२)

The wise have kindled the first priest, Agni, the banner of sacrifice, to be the offering priest for the gods, seated on the sacred grass, ready for the ritual.

ऋत्विजों ने यज्ञ का संकेत करने वाले, यजमानों द्वारा सर्वश्रेष्ठ स्थान में स्थापित एवं इंद्र आदि के समान अग्नि को तीन स्थानों में प्रज्वलित किया था. उत्तम कर्म वाले एवं देवों को बुलाने वाले अग्नि बिछे हुए कुशों पर यज्ञ पूरा करने के लिए बैठे थे. (२)


Mandala 1 · Verse 3
nitye cin nu yaṁ sadane jagṛbhre praśastibhir dadhire yajñiyāsaḥ | pra sū nayanta gṛbhayanta iṣṭāv aśvāso na rathyo rārahāṇāḥ

O Agni, you are born fearlessly from the mother-like aranis, pure, praised by all, wise, kindled by sacrificers, and nourished with ghee by ancient sages. O Agni, full of offerings, your smoke stands in the sky as your banner.

हे अग्नि! तुम अरणियोंरूपि माताओं से निर्भय जन्म लेते हो. तुम पवित्र, सबके द्वारा प्रश्सित, विद्वान, यजमानों द्वारा प्रज्वलित एवं पूर्ववर्ती-ऋषियों द्वारा घी की सहायता से बढ़ाए गए हो. हे आहुतिपूर्ण अग्नि! तुम्हारा धुआं तुम्हारे झंडे के रूप में आकाश में स्थित है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
purūṇi dasmo ni riṇāti jambhair ād rocate vana ā vibhāvā | ād asya vāto anu vāti śocir astur na śaryām asanām anu dyūn

May Agni, the fulfiller of all human goals, come to our sacrifice. People worship Agni in their homes, and Agni, the carrier of offerings, became the messenger to the gods. We honor Agni as the completer of the sacrifice.

समस्त पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाले अग्नि हमारे यज्ञ में आवें. लोग घर-घर में अग्नि को धारण करते हैं. हव्य वहन करने वाले अग्नि देवों के दूत हुए थे. लोग यज्ञ पूर्ण करने वाले के रूप में अग्नि का आदर करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
तुभ्येदमग्ने मधुमत्तमं वचस्तुभ्यं मनीषा इयम्स्तु शं हृदे. त्वां गिरः सिन्धुमिवावनीमीहिरा पूणन्ति शवसा वर्धयन्ति च.. (५)

O Agni, to You this sweetest honeyed word, to You this thought brings peace to the heart. Like a river to the ocean, our praises flow to You, filling and strengthening us with power.

हे अग्नि! तुम्हारे लिए ये मधुरतम स्तुति वाक्य हैं. ये स्तुतियां तुम्हारे हृदय में सुख उत्पन्न करें. जिस प्रकार महान नदियां सागर को पूर्ण करती हैं, उसी प्रकार ये स्तुतियां तुम्हें शक्तिशाली बनाकर बढ़ावें. (५)

Mandala 1 · Verse 1
प्राग्नये बृहते यजिययाय ऋतस्य वृष्णे असुरय मन्म. घृतं न यज्ञा आस्ये सुपुतं गिरं भरे वृष्भ्माय प्रतीचीम्.. (१)

To Agni, the great, the worthy of worship, the strong, the life-giver, I bring this hymn, a sweet offering from my mouth, like ghee poured into the sacrificial fire, for the powerful one.

महान्, यज के योग्य, जल बरसाने वाले, शक्तिशाली एवं कामना पूर्ण करने वाले अग्नि के मुख में यज करते समय जो घृत डाला है, हमारी स्तुतियाँ अग्नि को उसी के समान प्रसन्न करें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
ऋतं चिकित्व ऋतमच्चिकिद्धयूतस्य धारा अनु तृन्धि पूर्वीः. नाहं यातुं सहसा न द्येनं ऋतं सपाभ्यरूपस्य वृष्णः.. (२)

I, the wise one, perceive the truth and the truth is my guide. I shall follow the ancient paths of righteousness, for I do not yield to force or deception, but to the truth of the powerful and radiant one.

हे अग्नि! हमारे द्वारा की गई स्तुति जानो, इन्हें स्वीकार करो तथा जल बरसाने के लिए हमारे अनुकूल बनो. हम बल द्वारा यजकर्म का विध्वंस नहीं करते और न कोई वेद-विरुद्ध कार्य करते हैं. हम दीप्तिशाली एवं कामवर्षां अग्नि की स्तुति करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
कया नो अग्न ऋतयन्तेन भुवो नवदा उथथस्य नव्यः. वेदा मे देव ऋततुपा ऋतूनां नाहं पतिं सनि तु रस्य रायः.. (३)

O Agni, by your divine order, you are the protector of cosmic order and the source of new hymns. I am the master of this wealth, which is obtained through righteous deeds.

क्या नो अगन ऋतयन्तेन भुवो नवदा उथथस्य नव्यः। वेदा मे देव ऋततुपा ऋतूनां नाहं पतिं सनि तु रस्य रायः.. (३) हे अग्नि! तुम जल की वर्षा करते हुए किस शक्ति से हमारे यजकर्म को जान लेते हो? ऋतओं की रक्षा करने वाले एवं दीप्तिशाली अग्नि हमें जानें. अग्नि मुझ भक्त के पशु आदि के स्वामी हैं. इस बात को क्या मैं नहीं जानता? (३)

Mandala 1 · Verse 4
के ते अग्ने रिपवे बन्धनाः के पायवः सनिषन्त घुमन्तः. के धासिमग्ने अनृतस्य पान्ति क आस्तो वाचः सन्ति गोपाः.. (४)

O Agni, who are the enemies and bonds, who are the destroyers and the givers? Who guard the untruth, and who are the keepers of speech?

के ते अग्ने रिपवे बन्धनाः के पायवः सनिषन्त घुमन्तः। के धासिमग्ने अनृतस्य पान्ति क आस्तो वाचः सन्ति गोपाः.. (४) के अग्नि रिपवे बन्धनाः के पायवः सनिषन्त घुमन्तः। के धासिमग्ने अनृतस्य पान्ति क आस्तो वाचः सन्ति गोपाः.. (४) शत्रुओं का बंधन करने वाले, लोक रक्षक, दानशील एवं दीप्तिसंपन्न लोग कौन हैं? ये सब अग्नि के सेवक हैं. असत्य धारण करने वाले का रक्षक एवं दुर्वचनों को आश्रय देने वाला कौन है? अर्थात् अग्नि का कोई भक्त इस प्रकार का नहीं है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
सखायस्ते विषण्णा अमृ एते शिवासः सन्नो अशिवा अभवन्. अधर्षत स्वयमेते वचोभिरृजुयते वृजिनानि ब्रुवन्तः.. (५)

Your friends, once joyful, have become sorrowful; those who were auspicious have turned inauspicious. They have been overcome by words, speaking crookedly while appearing upright.

सखायस्ते विषण्णा अमृ एते शिवासः सन्नो अशिवा अभवन्। अधर्षत स्वयमेते वचोभिरृजुयते वृजिनानि ब्रुवन्तः.. (५) हे अग्नि! तुम्हारे स्तोता सब जगह फैले हुए हैं. ये पहले दुःखी थे, अब सुखी हुए हैं. हम सरल आचरण करने वालों को जो दुर्वचन कहता था, वह हमारा शत्रु स्वयं नष्ट हो गया. (५)

Mandala 1 · Verse 1
अर्च्चन्त्स्त्वा हवामहेऽर्चन्तः समिधीमहि. अग्ने अर्चन्त् ऊतये.. (१)

We worship and invoke You, O Agni, the radiant one, and we kindle You for protection.

हे अग्नि! हम तुम्हारी पूजा करते हुए तुम्हें बुलाते हैं एवं तुम्हें प्रज्वलित करते हैं. हम रक्षा के लिए तुम्हारी पूजा करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अग्नेः स्तोमं मनामहे सिभ्रमइ दिविस्पृशः.. देवस्य द्रविणस्य.. (२)

We praise the hymn of Agni, reaching the heavens, the wealth of the divine.

Mandala 1 · Verse 3
अग्निर्जुषत नो गिरो होता यो मानुषेष्वा. स यक्षैर्देवं जनम्.. (३)

May Agni, the priest among men, accept our hymns. He who is the divine guest of the gods and the Yakshas.

मनुष्यों के बीच स्थित रहकर देवों को बुलाने वाले अग्नि हमारी स्तुतियाँ स्वीकार करें एवं देवयज्ञ संबंधी सामग्री का वहन करें. (३)
Mandala 1 · Verse 1
आ यजदैव मर्त्य इत्था तव्यां समूतये. अग्नि कृते स्वधरे पूरूरीळितावसे.. (१)

O mortal, approach the divine for protection, for Agni, the creator, is the bestower of sustenance and refuge.

हे देव! ऋत्विज् लोग अपने तेजों से बढ़े हुए अग्नि को तृप्त करने के लिए स्तोत्रों द्वारा बुलाते हैं. वे शोभन यज्ञों में अग्नि को रक्षा के निमित्त बुलाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अस्य हि स्वयंशस्तर आसा विधर्मन्मन्यसे. तं नाकं चित्रशोचिषं मन्त्रं परो मनीष्या.. (२)

He who is the self-existent, the source of all, is to be understood through the sacred hymns. This radiant heaven, the abode of bliss, is beyond the reach of ordinary thought.

हे परम यशस्वी स्तोता! तुम अपनी उत्तमबुद्धि द्वारा शब्दों में अग्नि की स्तुति करते हो. अग्नि दुःख रहित, विचित्र तेज वाले, स्तुति योग्य एवं सर्वश्रेष्ठ हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अस्य वासा उ अर्चिषा य आयुक्त तुजा गिरा. दिवो न यस्य रेतसा बृहच्छोचन्त्यर्चयः.. (३)

His rays, by their own brilliance, are joined with mighty words. Like the heavens, his splendors shine forth with potent seed.

जो अग्नि जगत्-रक्षण-समर्थ, स्तुति से युक्त एवं आदित्य के समान दीप्तिशाली हैं, जिन अग्नि की प्रभा से सारा जगत् व्याप्त है एवं जिनकी विशाल दीप्तियां प्रकाशित होती हैं, उन्हीं अग्नि की प्रभा से आदित्य प्रकाश वाला बनता है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अस्य कृत्वा विचेतसो दस्मस्य वसु रथ आ. अथा विश्वाशु हव्योऽग्निविश्वं प्र शस्यते.. (४)

Through the wisdom of the divine chariot, the all-pervading Agni is praised with offerings, illuminating all existence.

शोभन मति वाले ऋत्विज् इस दर्शनीय अग्नि के यज से धन और रथ प्राप्त करते हैं। यज्ञ के निमित्त बुलाए गए अग्नि प्रज्वलित होने के बाद ही सब प्रजाओं में प्रकाशित होते हैं। (४)

Mandala 1 · Verse 5
नू न इद्धिं वार्यमासा सवन्त सूर्यः। ऊर्जो नपादभिध्ये पाहि शग्धि स्वस्तय उतेषु नो वृधे.. (५)

May the Sun, the son of energy, bestow upon us abundant nourishment and strength for our growth and well-being.

हे अग्नि! हमें शीघ्र वह धन प्रदान करो, जिसे स्तुति करने वाले तुमसे स्तुति द्वारा पाते हैं। हे बल के पुत्र अग्नि! हम अभिलाषकों को अन्न दो एवं आपत्तियों से हमारी रक्षा करो। हम तुमसे धन की याचना करते हैं। संग्राम में हमारी समृद्धि के लिए तुम कारण बनो। (५)

Mandala 1 · Verse 6
हे मरणरहित अग्नि! जो धनी मनुष्य तुम्हारी स्तुति के तुरंत बाद मुझे पचास घोड़े देते हैं, तुम उन्हें दीप्तिशाली एवं सेवकों सहित अन्न दो।

O immortal Agni, grant abundant food and followers to the wealthy who, upon praising you, bestow fifty horses upon me.

हे मरणरहित अग्नि! जो धनी मनुष्य तुम्हारी स्तुति के तुरंत बाद मुझे पचास घोड़े देते हैं, तुम उन्हें दीप्तिशाली एवं सेवकों सहित अन्न दो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
yo vāṁ yajñaiḥ śaśamāno ha dāśati kavir hotā yajati manmasādhanaḥ | upāha taṁ gacchatho vītho adhvaram acchā giraḥ sumatiṁ gantam asmayū

May the sacrificer who offers oblations to Agni be granted a son who is master of abundant food, rich in hymns, invincible to enemies, and who brings fame to his ancestors' sacrifices through his deeds.

अग्नि हव्य देने वाले यजमान को ऐसा पुत्र दें जो अनेक प्रकार के अन्नो का स्वामी, विविध स्तोत्रों से युक्त, उत्तम शत्रुओं से पराजित न होने वाला एवं अपने कर्मों से पूर्वजों के यज्ञ को प्रसिद्ध करने वाला हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अग्निर्ददाति सत्यपतिं सासाह यो युधा नृभिः. अग्निरत्यं रघृष्यं जेतारमपराजितम्.. (८)

Agni, the Lord of Truth, bestows victory upon those who fight with courage, the unconquerable and undefeated.

Mandala 1 · Verse 9
अग्नि हमें सत्यपालक युद्ध में परिजनों की सहायता से शत्रुओं को पराजित करने वाला, सज्जनों का पालक, शत्रुजयी एवं परम वेगशाली पुत्र दें. (९)

May Agni grant us a son who is a protector of truth, who, with the aid of family, conquers enemies in battle, who nurtures the virtuous, is victorious over foes, and possesses supreme speed.


Mandala 1 · Verse 1
अग्ने पावक रोचिषा मन्द्रया देव जिह्वया. आ देवान्न्क्षि यक्ष्च.. (१)

O Agni, purifier, with your radiant and pleasing tongue, carry the gods to the sacrifice.

हे शोधक एवं दीप्तिशाली अग्नि! तुम अपनी दीप्ति और देवों को प्रसन्न करने वाली जिह्वा से यज्ञ में देवों को बुलाओ तथा उनके निमित्त यज्ञ करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
तं त्वा घृतस्नवीमहे चित्रभानो स्वर्दृशम्. देवॉ आ वीतये वह.. (२)

O radiant One, we invoke You, the bestower of ghee and the sight of heaven, to carry the gods to the sacrifice.

हे घृत-प्रेरक एवं अनेक विशाल लपटों वाले अग्नि! तुझ सर्वद्रष्टा की हम याचना करते हैं. हव्य भक्षण करने के लिए तुम देवों को बुलाओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वीतिहोत्रं त्वा कवे घुमन्तं समिधीमहि. अग्ने बृहन्तमध्वरे.. (३)

O wise one, we ignite you, the all-pervading Agni, the great one in sacrifice.

हे क्रांतदर्शी, हव्य भक्षण करने वाले, यज्ञ को सुशोभित करने वाले, दीप्तिशाली एवं महान् अग्नि! हम यज्ञ में तुम्हें समिधाओं द्वारा प्रज्वलित करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अग्ने विश्वेभिरा गहि देवेभिरहृव्यदात्. होतारं त्वा वृणीमहे.. (४)

O Agni, come with all the gods, for you are invoked. We choose you as the priest of the sacrifice.

हे अग्नि! तुम सब देवों के साथ हव्य देने वाले यजमान के यज्ञ में आओ. इसीलिए हम देवों को बुलाने वाले तुमसे प्रार्थना करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
यजमानाय सुन्वते आग्ने सुवीर्यं वह। देवेरै सत्ति बर्हिषि.. (५)

O Agni, bring forth great strength for the sacrificer who presses the Soma. May the gods be pleased with the offering on the sacred grass.

हे यजमान! तुम सोम रस निचोड़ने वाले यजमान को ��भन बल प्रदान करो एवं देवों के साथ कुशों पर बैठो। (५)

Mandala 1 · Verse 6
सम విధः सहस्रजिद्ग्ने धर्मणि पुष्यसि. देवानां दूत उक्थ्यः.. (६)

You, O Agni, the thousand-conqueror, are the messenger of the gods, worthy of praise, and you nourish all beings in their righteous duties.

हे हज़ारों को जीतने वाले अग्नि! तुम हवियों द्वारा प्रज्वलित, प्रशंसित एवं देवों के दूत बनकर यजकर्मों को बढ़ाते हो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
न्यूग्नि जातवेदसं होत्रावाहं यविष्ठचम्. दधाता देवमृतविजम्.. (७)

You who are the fire, the all-knowing, the carrier of offerings, the youngest, the divine sacrificer, may you sustain us.

हे यजमानो! तुम जातवेद, यज्ञ को वहन करने वाले, अतिशय युवा, द्युति युक्त एवं ऋतु अनुसार यज्ञ करने वाले अग्नि को स्थापित करो. (७)

Mandala 1 · Verse 1
अनस्वत्ता सत्पतिर्मिमे मे गांवा चेतिष्ठो असुरो मघोनः. त्रृष्पो अग्ने दर्शभिः सहस्रवैश्नरं त्रृरणाश्रितेत.. (१)

The powerful, generous Lord, the protector of the righteous, has bestowed upon me two cows. May the brilliant Agni, with his radiant offerings, grant me abundant wealth and sustenance.

हे सकल मानवों के नेता, साधुओं का पालन करने वाले, अतिशय ज्ञानसंपन्न, बलवान् एवं धनस्वामी अग्नि! वृष्ण के पुत्र त्रृरुण नामक राजर्षि ने गाड़ी सहित दो बैल एवं दस हजार स्वर्ण मुद्राएँ मुझे दीं. इस दान से वह प्रसिद्ध हो गया. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यो मे शतं च विंशतिं च गोनां हरीं च युक्ता सुधरा ददाति. वैश्नर सुष्टु वावृधानोऽग्ने यच्छ त्रृरणांय शर्म.. (२)

He who gives me one hundred and twenty cows, along with a chariot, well-equipped, to him, O Agni, the all-pervading, growing ever stronger, grant abundant prosperity and protection.

यो मे शतं च विंशतिं च गोनां हरीं च युक्ता सुधरा ददाति. वैश्नर सुष्टु वावृधानोऽग्ने यच्छ त्रृरणांय शर्म.. (२)

Mandala 1 · Verse 3
एवा ते अग्ने सुमतिं चकानो नविष्ठाय नवं त्रसदस्युः। यो मे गिरस्तविजात्यस्य पूर्वीयुक्तेनाभि त्र्यरुणेो गुणाति.. (३)

May Agni, the most youthful, be pleased with our praise, bestowing favor upon the generous Trisadasyu, who, with his strength, surpasses all in his might.

हे अग्नि! जिस त्र्यरुण ने बहुत संतान वाले हम लोगों की अनेक स्तुतियाँ सुनकर प्रसन्नतापूर्वक मन से विभिन्न वस्तुएँ ग्रहण करने को कहा था, उसी प्रकार तुझ अतिशय स्तुति योग्य की अति नवीन स्तुतियों की कामना करने वाले त्रसदस्यु ने भी कहा था. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यो म इति प्रवोत्त्यश्वमेधाय सूरये. ददद्वा सनिं यते ददन्मेधामृतायते.. (४)

He who, with a desire for the horse sacrifice, declares "I," and gives wealth to the seeker, bestows intellect upon the immortal.

हे अग्नि! जो धन का याचक दानी अश्वमेध नामक राजर्षि के पास आकर याचना करता है, उस स्तुतिकारी भिक्षुक को वे धन देते हैं. यज्ञ के इच्छुक उस अश्वमेध को तुम धन दो. (४)

Mandala 1 · Verse 1
समिद्धोऽग्निर्दिवि शोचिरभ्रेत्युडभ्भस्ममुर्विया वि भाति. एति प्राचीं विश्ववारां नमोभिर्देवा ईळाना हविषा घृताची.. (१)

The blazing fire in the heavens shines brightly, consuming the offerings. The gods, pleased by the clarified butter, approach the East, the all-desirable direction, with reverence.

प्रज्वलित अग्नि दीप्तियुक्त आकाश में तेज फैलाते हैं एवं उषाकाल में विस्तृत होकर शोभा पाते हैं. स्तोत्रों द्वारा इंद्र आदि की प्रशंसा करती हुई, पुरोडाश आदि से युक्त सुच लेकर विश्वावारा पूर्वीमुख जाती है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
समिध्यमानोऽमृतस्य राजसि हविष्कृण्वन्तं सवसे स्वस्तये. विश्वं स धन्ते द्रविणं यमिन्यस्यातिथ्यमग्ने नि च धत्त इत्पुरः.. (२)

O Agni, you who are consecrated and reign over immortality, the offerer of oblations to you for sustenance and well-being, he obtains all wealth and prosperity, for you are the guest who brings these blessings.

हे अग्नि! तुम प्रज्वलित होकर जल पर अधिकार करते हो एवं हृव्यदाता यजमान के मंगल के लिए रक्षा करते हो. तुम जिस यजमान के पास जाते हो, वह सभी प्रकार की संपत्ति धारण करता है. वह तुम्हारे सामने तुम्हारे सत्कार योग्य हव्य को रखता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अग्ने !अग्ने !शर्ध महते सौभाग्याय तव घुम्नायुतमानि सन्तु. सं जास्पत्यं सुयम्ममा कृणुष्व शत्रूयतामभि तिष्ठा महांसि.. (३)

O Agni, for great prosperity, may your powerful energies be ours. Make our household life harmonious and strong, and may we overcome our enemies with your might.

हे अग्नि! हमें शोभन धन वाला बनाने के लिए हमारे शत्रुओं का नाश करो. तुम्हारा तेज उत्कृष्ट हो. तुम हम पति-पत्नी के संबंधों को नियमित एवं हमारे शत्रुओं के तेज को नष्ट करो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
समिद्धस्य प्रमहसोऽग्ने वन्दे तव श्रियम्. वृषभो घुम्नवाँ असि समेश्वरेशिव्यसे.. (४)

O Agni, blazing with immense radiance, I worship your glory. You are powerful and strong, the lord of all, and you shine forth.

हे प्रज्वलित एवं परम तेजस्वि अग्नि! हम यजमान तुम्हारी स्तुति करते हैं. तुम कामवर्भी एवं धनवान् हो तथा यज्ञों में भली प्रकार प्रज्वलित होते हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
समिद्धो अगन आहूत देवान्यक्षि स्वधर. त्वं हि हव्यवाळसि.. (५)

O Agni, fully kindled and invoked, sacrifice to the gods, for you are the bearer of offerings.

हे यजमानों द्वारा बुलाए गए एवं शोभन यज्ञ से युक्त अग्नि! तुम भली प्रकार प्रज्वलित होकर इंद्रादि देवों का हवन करो. तुम हव्य वहन करने वाले हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
आ जुहोता दुवस्यताग्निं प्रयत्यध्वरे. वृणीधं हव्यवाहनम्.. (६)

Offer oblations and serve the moving fire in the sacrifice, choosing the bearer of offerings.

हे ऋत्विजों! तुम हमारा यज्ञ आरंभ होने पर हव्य ढोने वाले अग्नि में हवन करो, उनकी सेवा करो, उन्हें प्राप्त करो एवं अपना हव्य देवों के समीप पहुंचाने के लिए उन्हें वरण करो. (६)

Mandala 1 · Verse 1
त्रयमा मनुषो देवतात त्र रोचना दिव्या धारयन्त. अर्चान्ति त्वा मरुतः पूतदक्षास्वमभिष्षिरिन्द्रसि धीरः.. (१)

The divine powers, the Maruts, praise you, O Indra, the strong one, who upholds the three luminous heavens.

मनु के यज्ञ के तीन तेजों एवं अंतरिक्ष में होने वाले तीन प्रकाशयुक्तों को मरुतों ने धारण किया है. हे इंद्र! पवित्र-शक्ति वाले मरुत् तुम्हारी स्तुति करते हैं. हे धीर इंद्र! तुम इन्हें देखने वाले हो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अनु यदीं मरुतो मन्दसानमार्चिन्द्रं पपिवांसं सुतस्य. आदत्त वज्रभिं यदहिं हन्नपो यद्दीरसूजत्सर्त्वा उ.. (२)

When the Maruts, praising Indra, drank the soma, he seized his thunderbolt and slew the serpent, releasing the waters.

जब मरुतों ने निचोड़े हुए सोमरस को पीकर प्रसन्न इंद्र की स्तुति की, तब इंद्र ने वज्र उठाया, शत्रु का नाश किया एवं वृत्र द्वारा रोकी गई विशाल जलराशि को बहने के लिए छोड़ा. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उत ब्रह्माणी मरुतो मे अस्येन्द्रः सोमस्य सुपुत्रस्य पेयाः। तद्धि हव्यं मनुषे गा अविन्ददहन्नृहिं पपिवां इन्द्रो अस्य.. (३)

May the Maruts and Brahma drink this Soma, for Indra, the son of Soma, has drunk it. Having drunk, Indra found cows for men, and he, the drinker, has become mighty.

हे महान् मरुतो! तुम इंद्र के साथ मिलकर इस भली प्रकार निचोड़े गए सोम को पियो. इसी हव्य ने यजमान को गाएं दिलाई हैं एवं इसी को पीकर इंद्र ने अहि को मारा था. (३)

Mandala 1 · Verse 4
आद्रोदसी वितरं वि ष्क्भावयत्सविच्यान्न्ऋद्धिस्ये मृगं कः। जिगातिमिन्द्रो अपजगुंराणः प्रति शृण्सन्तमव दानवं हन्.. (४)

Indra, the mighty, with his thunderbolt, destroys the demon, scattering the darkness and bringing forth light.

इंद्र ने सोमरस पीने के बाद ही विस्तृत धरती-आकाश को स्तंभित किया था एवं गतिशील बनकर हिरन के समान भागते हुए वृत्र को डराया था. इंद्र ने छिपे हुए एवं सांस लेते हुए वृत्र को आच्छादनरहित करके मारा. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अथ कृत्वा मघवन्तुभ्यं देवा अनु विश्वे अददुः सोमपेयम्. यत्सूर्यस्य हरितः पतन्तीः पुरः सतीरूपा एतशं कः.. (५)

The gods, having made you, Indra, worthy, granted you the drinking of Soma. Who can harness the horses of the sun, which are falling and have been seen before?

हे धनस्वामी इंद्र! तुम्हारे इस कार्य के बदले सभी देवों ने तुम्हें पीने के लिए सोम दिया था. तुमने एतश ऋषि के कल्याण के लिए सामने से आते हुए सूर्य के घोड़ों को रोक दिया था. (५)

Mandala 1 · Verse 6
नव यदस्य नवतिं च भोगान्साकं वज्रेण मधवा विवृक्षत्. अर्चन्तीन्द्रं मरुतः सधस्थे त्ऋष्भेन वचसा बाधत घाम्.. (६)

The mighty Indra, with his thunderbolt, shattered the ninety-nine enjoyments. The Maruts, praising him in their assembly, subdued the earth with their powerful words.

जब धन के स्वामी इंद्र ने शंबर के निन्यानवे नगरों को वज्र द्वारा एक साथ नष्ट कर दिया था, तब मरुतों ने युद्धभूमि में ही त्रिषुप् छंद द्वारा इंद्र की स्तुति की थी. इंद्र ने मरुतों की स्तुति से शक्तिशाली बनकर शंबर को बाधा पहुंचाई. (६)

Mandala 1 · Verse 1
क्व १ स्य वीरः को अपश्यदिन्द्रं सुखस्थरयमीमानं हरिभ्याम्. यो राया वज्री सुतसोममिच्छन्तोदको गन्ता पुरूहुत ऊती.. (१)

Who is the hero, who has seen Indra, the mighty one, with his horses, who, with his wealth and thunderbolt, desiring Soma, goes forth, invoked by many, for protection?

वज्रधारी एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए इंद्र धन के साथ-साथ सोमरस निचोड़ने वाले यजमान की अभिलाषा पूर्ण करते हुए यजमान की रक्षा करने के निमित्त उसके घर में चले जाते हैं. वे वीर इंद्र कहां हैं? हरि नामक घोड़ों द्वारा खींचे जाते हुए सुखदायक रथ पर बैठकर चलने वाले इंद्र को किसने देखा है? (१)

Mandala 1 · Verse 2
अवाचचक्षं पदमस्य सस्वरूग्रं निधातुर्वायमिच्छन्. अपृच्छमन्त्यां उत ते म आहुरिन्द्रं नरो बुबुधाना अशेम.. (२)

Seeking His formless, supreme abode, I asked the awakened ones, "Does Indra, the divine, truly exist?"

हमने इंद्र के छिपे हुए एवं भयानक स्थानों को देखा है. हम ढूंढते हुए अपनी स्थापना करने वाले इंद्र के उस स्थान में गए हैं. हमने दूसरे विद्वानों से इंद्र के विषय में पूछा है. उन नेताओं एवं ज्ञानियों ने कहा कि हमने इंद्र को प्राप्त कर लिया है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
प्र नु वयं सुते या ते कृतानीन्द्र ब्रवाम यानि नो जुजुषः. वेदविद्वाञ्छणवच्च विद्दान्तेऽयं मघवा सर्वसेनः.. (३)

O Indra, we now sing of the deeds you have accomplished, which have pleased us. The wise, knowing this, will hear you, the wealthy one, with all your hosts.

हे इंद्र! तुमने जो कर्म किए हैं, हम स्तोतागण सोम निचुड़ जाने पर उनका उत्तम वर्णन करते हैं. तुमने भी हमारे जिन कर्मों को स्वीकार किया है, उन्हें न जानने वाले लोग जान लें. जानने वाले लोग उन्हें न जानने वालों को सुनावें. धनस्वामी एवं ज्ञानी इंद्र अपनी सभी सेनाओं सहित जानने वाले एवं सुनाने वालों के समीप जावें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अश्मानं चिच्चवसा दिद्युतो वि विदो गवामूर्वमुक्त्रियाणाम्.. (४)

The swift lightning, like a cow, has revealed the vastness of the heavens.

हे इंद्र! तुमने जन्म लेते ही अपना मन स्थिर किया एवं अकेले ही अनगिनत राक्षसों से युद्ध करने के लिए चल पड़े, तुमने अपनी शक्ति द्वारा गायों को छिपाने वाले पर्वत को तोड़ डाला था एवं दुधारू गायों को पाया था. (४)

Mandala 1 · Verse 5
परो यत्त्वं परमं आजनिष्ठाः परावति श्रुत्यं नाम बिभ्रत्, अतश्चिद्धिन्द्रायभयन्त देवा विश्वा अपो अजयदासपत्नीः.. (५)

You, the Supreme Being, were born beyond all, bearing the name heard in the highest heavens. From this, the gods, fearing you, conquered all waters, O unconquered consort.

हे सर्वोँच्च एवं सर्वोत्कृष्ट इंद्र! तुमने दूर-दूर तक प्रसिद्ध नाम को धारण करते हुए जन्म लिया था. उस समय सभी देव तुमसे डर गए थे एवं तुमने वृत्र द्वारा रोके गए समस्त जलॉं को जीत लिया था. (५)

Mandala 1 · Verse 1
इन्द्रो रधायं प्रवर्तं कृणोति यमस्थस्थ-मघवा वाजयन्तम्। यूथेव पश्वो व्युноति गोपा अरिष्टो याति प्रथमः सिषासन्.. (१)

The powerful Indra, the giver of strength, leads the way, like a herdsman guiding his flock, to achieve victory and prosperity.

धन के स्वामी इंद्र, जिस अभिलाषी रथ पर बैठते हैं, उसे हांकते भी हैं. जैसे ग्वाला पशुओं के समूह को हांकता है, उसी प्रकार इंद्र शत्रुओं को भगाते हैं. अपराजित एवं देवश्रेष्ठ इंद्र शत्रुओं के धन को चाहते हुए चलते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
आ प्र द्रव हरिवो मा वि वेनः पिशङ्गाते अभि नः सचस्व। नहि त्वदिन्द्र व्यस्यो अन्यदस्यमेनांशिङ्ग्जजिवतश्रकर्थ.. (२)

O Indra, swift-moving and powerful, approach us with your tawny steeds, for no one else can accomplish such great deeds as you.

हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इंद्र! तुम सबके सम्मुख भली प्रकार गमन करो. तुम हमारे प्रति इच्छारहित मत होना. हे विविध धनों के स्वामी! तुम हमारी सेवा स्वीकार करो. हे इंद्र! तुमसे श्रेष्ठ कोई नहीं है. तुम पत्नीरहितों को पत्नीयुक्त करते हो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
उद्यत्सहः सहस आजानि देदिद् इन्द्र इन्द्रियाणि विश्वा। प्राचोदयत्सुदुघा वने अन्तर्वि ज्योतिषा संवृतत्वमोडवः.. (३)

May the radiant Indra, the source of all strength, awaken our senses and inspire us with divine light, filling our inner being with boundless energy.

जब सूर्य का प्रकाश उषा के प्रकाश से उत्पन्न होकर श्रेष्ठ बनता है, तब इंद्र यजमानों को सभी प्रकार का धन देते हैं. वे पर्वत के मध्य से दुधारू गायों को छुड़ाते हैं एवं अपने प्रकाश से ढकने वाले अंधकार को नष्ट करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अनवस्ते रथभ्भय तक्षन्त्वश्च वज्रं पुरुषूतं घुमन्तम्। ब्रह्मण इन्द्र मह्यन्तो अर्करवर्धन्चये हन्तवा उ.. (४)

May Indra, the bestower of strength, forge for me a thunderbolt, sharp and resounding, to strike down my enemies.

हे अनेक जनों द्वारा बुलाए गए इंद्र! ऋभुओ ने तुम्हारे रथ को घोड़ों से जोड़ने योग्य बनाया था एवं त्वष्टा ने तुम्हारे वज्र को चमकाया था. अंगिरावंशीय ऋषियों ने अपने स्तोत्रों द्वारा वृत्र को मारने के लिए तुम्हें उत्तेजित किया था. (४)

Mandala 1 · Verse 5
वृष्णे यन्ते वृष्नो अर्कमर्चान्निन्द्र ग्रावाणो अदितिः सजोषाः। अनक्ष्वासो ये पययोऽरथा इन्द्रेषिता अभ्यवर्तन्त दस्यून्.. (५)

The mighty Indra, with his companions, the stones and Aditi, praised by the strong, has driven away the godless enemies, who were without yoke or chariot.

हे कामवर्ष इंद्र! जब वर्षा करने में समर्थ मरुतों ने तुम्हारी स्तुति की, तब सोम निचोड़ने वाले पत्थर भी प्रसन्नतापूर्वक मिल गए थे. बिना रथ एवं बिना घोड़ों वाले मरुतों ने इंद्र की प्रेरणा पाकर असुरों को पराजित किया था. (५)

Mandala 1 · Verse 6
प्र ते पूवाणि करणाणि वोचं प्र नूतनां मधुवन्त्या चक्रर्थ। शक्तीवो यद्धिभ्रा रोदसी उभे जयन्चपो मनवे दानुचित्राः.. (६)

I shall declare your ancient deeds and the new ones you have accomplished, O sweet-voiced one. Your powers, which uphold both heaven and earth, have brought forth abundant, delightful creations for humanity.

हे धन के स्वामी इंद्र! हम तुम्हारे पुराने और नए साहसपूर्ण कार्यों की स्तुति करते हैं। तुमने वे कर्म किए थे, हे वज्रवाले इंद्र! तुम धरती-आकाश को वश में करते हुए मनुष्यों के लिए विचित्र जलों को धारण करते हो. (६)

Mandala 1 · Verse 1
अददुरुत्सम्सजो वि खानि त्वमर्णवान्बृद्धानो अरम्णाः, महान्तीन्द्रं पर्वतं वि यद्गः सृजो वि धारा अव दानव हन्.. (१)

You, the giver of strength, have shattered the mountains and the great ocean, and have released the flowing waters, O Indra, slayer of demons.

हे इंद्र! तुमने मेघ को विदीर्ण किया एवं जल निकालने का मार्ग खोल दिया. इस प्रकार बाधक मेघों को विसर्जित किया है. तुमने विशाल मेघ को उन्मुक्त करके पानी बरसाया एवं वृत्र दानव को मारा. (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वमुत्सो ऋतभिर्बृद्धानों अरंह उधः पर्वत्स्य वज्रिन्, अहिं चिदुग्रं प्रयुतं शयानं जघनवाँ इन्द्र तविषीमत्थाः.. (२)

O Indra, mighty and powerful, you have slain the fierce, slumbering serpent.

हे वज्र के स्वामी इंद्र! तुम वर्षा ऋतु में बंधे हुए मेघों को मुक्त करो एवं पर्वत को शक्तिसंपन्न बनाओ. हे शक्तिशाली इंद्र! तुमने जल में सोए हुए वृत्र को मारा एवं अपनी शक्ति को प्रसिद्ध बनाया. (२)

Mandala 1 · Verse 3
त्यस्य चिनमहतो निर्गस्य वर्धर्धधान तविषीभिरिन्द्रः, य एक इद्रप्रतिर्मन्यमान आदस्मादन्त्यो अजनिष्ट तव्यान्.. (३)

Indra, the mighty, born from the great, all-pervading consciousness, grew powerful with his energies. He alone, unmatched and supreme, became the most formidable.

अद्वितीय इंद्र ने अकेले ही हिरन के समान तेज चलने वाले वृत्र के आयुधों को अपनी शक्ति द्वारा नष्ट किया. उस समय वृत्र के शरीर से दूसरा बलवान् राक्षस उत्पन्न हुआ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
त्वं चिदेषां स्वधया मदन्ते मिहो नपातं सुवृधं तमोगाम्, वृषप्रभर्मां दानवस्य भामं वज्रेण वज्री नि जघान शुष्माम्.. (४)

The thunderbolt-wielding Indra, with his might, struck down the powerful, demon-like brilliance, which was the source of their sustenance and the cause of their darkness.

Mandala 1 · Verse 5
त्वं चिदस्य ऋतुभिनिष्पन्नमर्मणो विददिदस्य मर्मं, यदि सुक्षत्रं प्रभृता मदस्य युयुत्सन्तं तमसि हर्म्यथाः.. (५)

You are the consciousness that knows the essence born of actions, and the essence of this being. If the strong one, filled with divine intoxication, desires to fight, you are the fortress that protects him.

हे शक्तिशाली इंद्र! तुमने नशीले सोम रस को पीकर युद्ध की अभिलाषा करने वाले वृत्र को डराकर अंधेरे में छिपने पर विवश किया था. तुमने अपने आपको दुर्बलता रहित समझने वाले वृत्र का मर्म उसके कार्यों से जान लिया था. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वं चिदत्या कृत्वपर्य शयानामसूर्य तमसि वावृधानम्, तं चिन्मन्दानां वृषभः सुतस्योच्छैरन्द्रो अपगूय्या जघान.. (६)

The mighty Indra, with his thunderbolt, slew the dark, slumbering demon, who was growing in the darkness, and who had been struck down by the gods.

निचोड़े हुए सोम रस को पीने से प्रसन्न हुए कामवर्षा इंद्र ने अंतरीक्ष में सुखकारी जल के बीच सोने वाले एवं घने अंधकार में बढ़ते हुए वृत्र को वज्र ऊँचा उठाकर मारा था. (६)

Mandala 1 · Verse 1
महि महि तवसे दीध्ये नृन्दिरायैत्था तवसे अतव्यान्. यो अस्मे सुमतिं वाजसातीं स्तुतो जने समर्यश्र् thiệt.. (१)

May we be blessed with your glorious strength, O powerful one, for the sake of the people. May the praised one, who bestows abundance and victory, be ever present among us.

मैं परम दुर्बल संवरण ऋषि परम शक्तिशाली इंद्र के लिए उत्तम स्तुति बोलता हूं, उससे मेरे समान लोग शक्तिशाली बनेंगे. संग्राम में अन्नलाभ करने के उद्देश्य से स्तुति सुनकर इंद्र मुझ संवरण के स्तोताओं पर कृपा करें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स त्वं न इन्द्र धियसानो अर्केहरीणां वृष्पन्पोक्त्रमश्रेः. या इत्था मधवन्नु जोषं वक्षो अभि प्रायैः सक्षि जनान्.. (२)

You, O Indra, the mighty hero, are the bestower of strength and nourishment, the sustainer of all. You, the generous giver, bring forth joy and prosperity to all beings.

हे कामवर्षी एवं धनस्वामी इंद्र! तुम हमारा ध्यान करते हुए एवं प्रसन्नता उत्पन्न करने वाले स्तोत्रों के कारण रथ में जुते हुए घोड़ों की लगाम पकड़ते हुए अपने शत्रुओं को पराजित करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
न ते त इन्द्रभ्यः स्मृद्भायुक्तासो अब्रह्राता यदसनु. तिग्धा रथमिधं तं वज्रहस्ता रश्मिं देव यमसे स्वक्षः.. (३)

Those who are not devoted to Indra, nor praise him, nor offer him sacrifices, cannot attain him, O Indra, wielder of the thunderbolt, who drives your chariot with reins.

हे महान् इंद्र! जो हम लोगों अर्थात् तुम्हारे भक्तों से भिन्न हैं, तुमसे जो संयुक्त नहीं हैं एवं यज्ञकर्म अर्थात् यज्ञ नहीं करते हैं, वे तुम्हारे मनुष्य नहीं हैं. हे हाथ में वज्र लेने वाले इंद्र! हमारे यज्ञ में आने के लिए तुम रथ को स्वयं हांकते हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यस्यावधीत्पितरं यस्य मातरं यस्य शक्रो भ्रातरं नात ईषते। वेतीदृस्य प्रयता यतङ्करो न किल्बिषादिषते वस्तु आकर.. (४)

He who has conquered his father, his mother, and Indra himself, and is not swayed by desire, such a disciplined one, free from sin, attains the highest reality.

इंद्र ने जिस अयशकर्ता के पिता, माता एवं भ्राता का वध किया था, उसके समीप से भी वे दूर नहीं जाते, अपितु उसके द्वारा दिए गए द्रव्य की कामना करते हैं. शासनकर्ता एवं धनस्वामी इंद्र पाप से दूर नहीं भागते. (४)

Mandala 1 · Verse 5
न पञ्चभिर्दशभिश्वार्यं नासुन्वत्ता सचते पुष्यता चन। जिनाति वेदुमया हन्ति वा धुनिरा देवयुं भजति गोमतिं व्रजे.. (५)

The one who does not offer to the gods with five or ten, nor with the unoffered or the nourished, nor with the knowing or the destroying, that person, devoted to the divine, attains the best.

इंद्र शत्रुओं का नाश करने के लिए पांच या दस सहायकों की इच्छा नहीं करते. सोम न

Mandala 1 · Verse 1
सं भानुना यतते सूर्यस्याजुहानो घृतपृष्ठः स्वः तस्मा अमृधा उषसो व्युच्छान्द्य इन्द्राय सुतवामेत्याह.. (१)

The radiant sun, with its golden rays, awakens the dawn, calling forth the Soma for Indra.

सूर्य के तेज के साथ सभी जगह बुलाए जाते हुए अग्नि प्रदीप्त ज्वालाओं के कारण प्रकाशित होने का प्रयत्न करते हैं. उस समय जो यजमान कहता है कि मैं इंद्र के निमित्त सोमरस निचोड़ता हूं. उसके प्रति उषा हिंसापूर्ण नहीं रहती है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
समिद्ग्निर्वन्त्स्तर्णीर्बर्हिर्युतक्रवा ग्रावाणो यस्येबिंर वदन्यदध्वर्युर्विभाव सिन्धुम्.. (२)

The sacred fuel, the fire, the offerings, the grass, the pressing stones, and the ladle are all prepared by the Adhvaryu priest, who skillfully directs the ritual like a flowing river.

अग्नि प्रज्वलित करने वाला, कुश बिछाने वाला एवं हाथ में पत्थर उठाकर सोम निचोड़ने वाला यजमान ध्यानपूर्वक स्तुति करता है. जिस अध्वर्यु का पत्थर मधुर शब्द करता है, वह हव्य के साथ नदी में स्नान करता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वधूर्यिं प्रतिमिच्छन्त्येति य ईं वहाते महिषीभिरभिराम्. आस्य श्रवस्याद्रथ आ च घोषात्पुरु सहसा परि वर्तयाते.. (३)

The bride, desired by her groom, arrives with her attendants. From the chariot's rumble and the joyous shouts, she is swiftly brought forth.

पत्नी यज्ञ में अपने पति के गमन की इच्छा करती हुई, उसके पीछे चलती है. इंद्र इसी प्रकार की महिषी को लाते हैं. अधिक शब्द करने वाला इंद्र का रथ हमारे समीप धन लावे एवं अगणित प्रकार की संपतियां चारों ओर बिखेरे. (३)

Mandala 1 · Verse 4
न स राजा व्यथते यस्मिन्नन्द्रस्तीर्ं सोमं पिबति गोसखायम्. आ सत्वनैर्जगति हन्ति वृत्रं क्षेति क्षितीः सुभगो नाम पुष्यन्.. (४)

He who, with Soma, drinks the divine nectar, is not troubled, for he is protected by Indra, the friend of the cows. Such a one, with his strength, slays the demon Vritra and rules the earth, flourishing in prosperity.

वह राजा कभी दुःखी नहीं होता, जिसके यज्ञ में इंद्र दूध में मिला हुआ नशीला सोमरस पीते हैं. वे अपने सेवकों के साथ चलते हैं, शत्रुओं को मारते हैं, प्रजाओं की रक्षा करते हैं एवं सुखपूर्वक इंद्र की स्तुतियों में वृद्धि करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
पुष्यात्क्षेमे अभो योगे भवात्युभे वृतीं संयतीं सं जयाति. प्रियः सूर्यः प्रियो अग्नां भवाति य इन्द्राय सुतसोमो ददाशत्.. (५)

He who offers the pressed Soma juice to Indra, becomes dear to the Sun and Agni, and attains a prosperous and virtuous life.

पुष्यात्क्षेमे अभो योगे भवात्युभे वृतीं संयतीं सं जयाति. प्रियः सूर्यः प्रियो अग्नां भवाति य इन्द्राय सुतसोमो ददाशत्.. (५)

Mandala 1 · Verse 1
उरोष इन्द्र राधसो विश्वीं रातिः शतंक्रतो. अथा नो विश्वचर्षणे घुम्ना सुक्षत्र मह्य.. (१)

O Indra, giver of abundant wealth, accept our offerings. Grant us, O powerful and all-pervading one, immense strength and prosperity.

हे शतक्रतु इंद्र! तुम्हारे विशाल धन का दान महान् है. हे सर्वद्रष्टा एवं शोभन धन वाले इंद्र! हमें महान् धन प्रदान करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यदीमिन्द्र श्रवाव्यमिषं शविष्ठ दधिषे. प्रपथे दीर्घश्रुतं हिरण्यवर्ण दुष्टरम्.. (२)

O Indra, most powerful, if you hold the desirable and ever-increasing sustenance, then grant us long-lasting fame and radiant, unconquerable wealth.

हे अतिशय बलवान् एवं हिरण्यवर्ण वाले इंद्र! यद्यपि तुम प्रचुर अन्न देते हो, फिर भी वह सब जगह दुर्लभ कहा जाता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
शुष्पासो ये ते अद्विवो मेहना केतसापः. उभा देवाभिष्ट्ये दिवश्च मश्च राजथः.. (३)

You who are dry and without rain, you who are without strength, you who are without the power of the sun, you who are without the power of the moon, you two gods, you rule both heaven and earth.

हे वज्रधारी इंद्र! पूजनीय, प्रसिद्धकर्म वाले एवं तुम्हारे बलस्वरूप मरुत् तथा तुम दोनों ही धरती पर मनचाही गति के लिए समर्थ हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
उतो नो अस्य कस्य चिद्धक्षस्य तव वृत्रहन्. अस्मभ्यं नृम्णा भारास्मभ्यं नृमणास्ये.. (४)

O slayer of Vritra, grant us strength and vigor, and bestow upon us the power of your mighty spirit.

हे वृत्रनाशक इंद्र! हम तुम्हारे भक्त हैं. तुम हमें किसी दक्ष का धन लाकर देते हो. तुम हम लोगों को धनी बनाना चाहते हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
नूत आभिरभिष्टिभस्त्वं शर्मजछतक्रतो. इन्द्र श्याम सुगोपाः शूर श्याम सुगोपाः.. (५)

O Indra, with these new oblations, you are the giver of shelter and protection. O hero, you are the protector of the cows.

हे शतक्रतु इंद्र! तुम्हारे पास पहुँचकर हम शीघ्र धनी बनें. हे शूर इंद्र! हम तुम्हारे द्वारा सुरक्षित हों. (५)


Mandala 1 · Verse 6
स्वभ्नोरोथ यदन्द्र माया अवो दिवो वर्तमानं अवाहनं. गूल्हं सूर्य तमासपवृतन तुरीयेण ब्रह्मणोविन्दद्रिः.. (६)

The wise one, through the power of Brahman, perceives the hidden sun, veiled by darkness, as it moves across the sky, a divine chariot of light.

हे इंद्र! जब तुमने सूर्य के नीचे वाले स्थान में फैली हुई स्वभानु की दिव्य माया को दूर भगा दिया था, तब कर्मों में बाधक अंधकार द्वारा ढके हुए सूर्य को अग्नि ऋषि ने चार ऋचाएं बोलकर प्राप्त किया था. (६)

Mandala 1 · Verse 7
मा मामिमिं तव सन्तमत इरसया दुग्धो भियसा नि गारितुं. त्वं मित्रो असि सत्यराधास्तौ महावतं वरुणश्च राजा.. (७)

You are my friend, the truthful bestower of boons, and Varuna is the king. Do not, out of fear, swallow me, who am devoted to you.

मा मामिमिं तव सन्तमत इरसया दुग्धो भियसा नि गारितुं. त्वं मित्रो असि सत्यराधास्तौ महावतं वरुणश्च राजा.. (७)

Mandala 1 · Verse 8
ग्रावग्नो ब्रह्मा युयुजानः सपर्यन् कीरिणा देवन्तमसोपशिक्षणं. अत्रिः सूर्यस्य दिवि चक्षुराधात्स्वभ्नोोरूप माया अदुक्षत्.. (८)

The divine craftsman, with fire and stone, invoked the gods, and through hymns, brought forth the sun's radiant eye in the heavens.

ग्रावग्नो ब्रह्मा युयुजानः सपर्यन् कीरिणा देवन्तमसोपशिक्षणं. अत्रिः सूर्यस्य दिवि चक्षुराधात्स्वभ्नोोरूप माया अदुक्षत्.. (८)

Mandala 1 · Verse 9
यं वै सूर्य स्वभानुतमसाविद्धदासुरः । अत्रयस्तमनविन्दन्नह्यशे अश्नवन्न् । (९)

The Asuras, struck by the darkness of Svabhānu, could not find Him, nor could they reach Him.

जिस सूर्य को स्वभानु ने अन्धकार से आच्छादित कर दिया था, उसे यहाँ (देवताओं ने) नहीं पाया। (९)

Mandala 1 · Verse 10
वृष्पो अस्तोष्षि भूम्यस्य गर्भं त्रितो नपातमापं सुवृतिं। गृणीतेऽग्निरेतरों न शृष्पैः शोचिष्केशो नि रिणाति वना.. (१०)

The divine fire, with its radiant hair, nurtures the earth's womb, bringing forth the life-giving waters, and consuming the forests with its brilliance.

वे अग्नि मेरे गमन के समय अपनी लपटों से मुझ पर क्रोध नहीं करते, अपितु प्रज्वलित होकर जंगलों को जलाते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
कथा महे रुद्रायाव ब्रवाम कद्रयाये चिकितुष्णे भगाय. आप ओषधीरुत नोऽवन्तु घौर्वा गिर्यो वृक्षकशाः.. (११)

May the mighty Rudra, the wise Bhaga, and the waters, herbs, and celestial powers protect us.

Mandala 1 · Verse 12
शृणोतु न ऊर्ज पतिर्गिरिः स नभस्तरीयाँ इषिरः परिज्मा. शृण्वन्त्वापः पुरो न शुभाः परि सुचो बहुहाणस्याद्रेः.. (१२)

May the mountain, the lord of strength, hear us, the swift and all-pervading. May the waters, the pure and abundant, hear us, flowing from the great mountain.

Mandala 1 · Verse 13
विदा चिणु महान्तो ये व एवा ब्रवाम द्रव्यां वर्धनाः. वयंश्नं सुभ्१ आव यन्ति क्षुभा मर्तमनुयंत वर्धस्नैः.. (१३)

Those who are wise and great, and who are truly prosperous, are those who are always growing in spiritual knowledge and strength. They are the ones who are truly blessed and who attract good fortune.

Mandala 1 · Verse 14
आ दैव्यानि पार्थिवानि जन्मापश्छाच्छा सुमुखाय वोचम. वर्धन्तां द्यावो गिरश्रृन्द्राग्रा उदा वर्धन्तामभिष्पाता अर्णः.. (१४)

May the divine and earthly births flourish, and may the heavens and mountains grow strong, as the mighty waters surge forth.

Mandala 1 · Verse 1
प्र शन्तमा वरुणं दीधितिं गीर्मित्रं भगामादतिं नूनमश्याः। पृष्ठोनिः पञ्चहोता शृणोत्त्वर्तृपन्था असुरो मयोभुः.. (१)

May Varuna, the most benevolent, and Mitra, the friend, hear our praise. May the fivefold Agni, the sustainer of all, and the beneficent Asura, who guides the path, listen to our prayers.

अत्यंत सुखकारक स्तुति वचन, हव्यदान आदि कर्मों के साथ वरुण मित्र, भग एवं अदिति के पास पहुँचें. अंतरीक्ष में स्थित प्राण आदि पांच वायुओं के साधक, अबाध गति वाले, प्राणदाता एवं सुख के आधार वायु हमारी स्तुतियां सुनें. (१)

Mandala 1 · Verse 2
प्रति मे स्तोममदितिर्ग्भृभ्यात्सून् न माता हृदं सुशेवम्। ब्रह्म प्रियं देवहितं यदस्यहं मित्रे वरुणे यन्मयोभु.. (२)

May Aditi, the mother, accept my praise and protect me, as a mother protects her children, bestowing a loving heart. May this beloved, divinely favored hymn be pleasing to Mitra and Varuna, bringing joy.

Mandala 1 · Verse 3
उदीरय कवितं कवीनामुतैनमभि मघवा घृतेन. स नो वसुनि प्रयता हितानि चन्द्राणि देवः सविता सुवाति.. (३)

May the divine Savitr, the bestower of wealth, inspire the poets with their hymns, and may Indra, the generous, be pleased with offerings of ghee. He then bestows upon us desirable and radiant riches.

हे ऋत्विजों! तुम क्रांतदर्शियों में श्रेष्ठ एवं सामने वर्तमान अग्नि को प्रसन्न करो. हम इन्हें मधुर सोम एवं घृत द्वारा प्रसन्न करें. वे हमें हितकारक, उत्तम एवं प्रसन्नताकारक सोना दें. (३)

Mandala 1 · Verse 4
समिन्द्र ो मनसा नेषि गोभिः सं सूरीभिरर्हिवः सं स्वस्ति. सं ब्रह्मणा देवहितं यदस्तं सं देवानां सुमतया यजिय़ानाम्. (४)

May Indra, with his mind and cows, lead us with the wise and the offerings to prosperity. May the divine, through Brahman and the favor of the gods, grant us well-being and their benevolent grace.

हे इंद्र! तुम प्रसन्न मन से हमें गोयुक करते हो. हे हरि नामक घोड़ों वाले! तुम हमें मेधावी पुत्र, कल्याण, पर्याप्त अन्न एवं यज्ञ के योग्य देवों की कृपा से मिलाते हो. (४)


Mandala 1 · Verse 5
देवो भगः सविता रायो अंश इन्द्रो वृत्रस्य सज्जितो धनानाम्. ऋग्भक्षा वाज उत वा पुरन्धरवन्तु नो अमृतासस्तुरः.. (५)

May the divine Bhag, Savitr, and Indra, who are the bestowers of wealth and conquerors of obstacles, protect us with their life-giving energies.

दीप्तिशाली भग, सविता, धन के स्वामी त्वष्टा, वृत्रहंता इंद्र, धनों को जीतने वाले ऋग्भक्षा, वाज एवं पुरंघि आदि हमारे यज्ञ में आकर हमारी रक्षा करें. (५)

Mandala 1 · Verse 6
मरुत्वन्तो अप्रतीत्यस्य जिष्णोरुर्ज्यतः प्र ब्रवामा कृतानि. न ते पूर्वं मघवन्त्रापरासो न वीर्यं नूतनं: कश्चनाप.. (६)

We shall proclaim the mighty deeds of the victorious, ever-powerful Indra, whose strength is unmatched and ever-new.

हम यजमान मरुतों सहित इंद्र के कर्मों को कहते हैं. इंद्र युद्ध से नहीं भागते, विजयी होते हैं एवं जरारहित हैं. हे धनस्वामी इंद्र! तुम्हारी शक्ति न पुराने लोग जान सके और न उनके परवर्ती. कोई नया व्यक्ति भी तुम्हें नहीं जान सका. (६)

Mandala 1 · Verse 7
उप स्तुहि प्रथमं रत्नधयं बृहस्पतिं सनिितारं धनानाम्. यः शंसते स्तुवते शम्भविशः पुक्सुसुरागमज्जोहुवानम्. (७)

Praise first the gem of gems, Brihaspati, the bestower of riches. He who praises and worships the auspicious one, the son of Angiras, is blessed.

हे अंतरात्मा! तुम सबसे पहले रत्न-धारण करने वाले एवं धन देने वाले बृहस्पति की स्तुति करो. वे स्तुति करने वाले यजमान के लिए अतिशय सुखदाता हैं एवं पुकारने वाले यजमान के पास महान् धन लेकर जाते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
तवోతిभिः सचमाना अरिष्टा बृहस्पतिं मधवानः सुवीराः. ये अश्वदा उत वा सन्ति गोदा ये वरुदाः सुभगास्तेषु रायः.. (८)

Those who are blessed with abundant offspring, who offer sacrifices with devotion, and who are generous with horses, cows, and wealth, are truly fortunate and possess great riches.

Mandala 1 · Verse 9
विस्मर्माण् कृणुहि वितमेषान् भुञ्जते अपृणन्तो न उक्थैः। अपव्रतान्प्रसवे वावृधानान्ब्रह्मद्विषः सूर्यायावयस्व.. (९)

May the enemies, who are devoid of righteous conduct and who consume without offering, and who are haters of Brahman, be consumed by the sun.

Mandala 1 · Verse 10
य ओहते रक्षसो देववीतावचक्रभिस्तं मरुतो नि यात. यो वः शर्मी शशमानस्य निन्दाच्छुच्यान्कामा-न्करते सिबिदानः.. (१०)

O Maruts, seize the Rakshasa who, through his own actions and disrespect for the gods, has become entangled. He who, with a mind full of impurity, criticizes and harms the worshipper, is truly bound.

Mandala 1 · Verse 11
तमु ष्टहि यः स्विषुः सुधन्वा यो विश्वस्य क्षयति भेषजस्य. यक्ष्वा महे सौमनसाय रुद्रं नमोभिर्देवमसुस्य दुवस्य.. (११)

Praise Him, the skilled archer, the wielder of the good bow, who rules over all healing. Let us worship Rudra with devotion for His favor, and serve the divine being with offerings.

Mandala 1 · Verse 12
दम्नसो अपसो ये सुहस्ता वृष्णः पत्नीर्निधो विश्वतटाः। सरस्वतीं बृहद्वितो राका दशस्यन्तीवीरिवस्यस्यन्तु शुभाः.. (१२)

May the strong, skillful, and all-encompassing wives of the powerful, who are adorned with auspiciousness, nourish us with abundance, like Sarasvati, Raka, and Dashayanti.

Mandala 1 · Verse 13
प्र सू महे सुशरणांय मेधां गिरं भरे नव्यसीं जायमानाम्. य आहना दुहितुर्वक्षणासु रूपा मिनानो अकृणोदिदं नः... (१३)

May we attain brilliant wisdom and offer new, flowing words, for He who, shaping forms within the womb, has made this for us.

Mandala 1 · Verse 14
प्र सृष्टिः स्तनयन्तं रुवनमिळस्पतिं जरितर्नमश्शयाः। यो अब्धिमाँ उदनिमाँ इयतिं प्र विदुता रोदसी उक्षमाणः.. (१४)

He who, with a roaring voice, nourishes the earth and sky, the mighty ocean, and the waters, is praised by the devoted.

हे स्तोताओ! तुम्हारी सुंदर स्तुति गर्जन करने वाले, वर्षा-संबंधी शब्द से युक्त एवं जलस्वामी बादल के पास पहुँचे. वे जल एवं बिजली को धारण करने वाले हैं तथा आकाश को प्रकाशित करते हुए चलते हैं. (१४)

Mandala 1 · Verse 15
एष स्तोमो मारुतं शर्धां रुद्रस्य सूनुर्य-व्यूरूंदश्याः। कामो राये हवते मा स्वस्त्युप पृष्ठभ्रां अयास्ः.. (१५)

This praise is for the Maruts, the mighty sons of Rudra, who bestow wealth and prosperity. They are invoked for well-being and abundance.

Mandala 1 · Verse 16
प्रेष स्तोमः पृथिवीमन्तरिक्षं वनस्पतिरोषधी राये अस्याः। देवोदेवः सुहवो भूतु मह्यं मा नो माता पृथिवी दुर्मती धात्.. (१६)

May the divine beings, invoked with ease, be propitious to me, and may our Mother Earth not cast us out with displeasure.

Mandala 1 · Verse 17
उरौ देवा अविबाधे श्याम.. (१७)

May the dark, unhindered divine reside in my heart.

Mandala 1 · Verse 18
समश्विनोरवसा नूतनेन मयोभुवा सुप्रणीती गमेम। आ नो रयिं वहतमोन वीराना विश्वन्यमृता सौभगानि.. (१८)

May we, with the fresh and joyful aid of the Ashvins, reach a state of excellent guidance. Bring us abundant wealth, heroic strength, and all-encompassing prosperity.

Mandala 1 · Verse 19
ekas tvaṣṭur aśvasyā viśastā dvā yantārā bhavatas tatha ṛtuḥ | yā te gātrāṇām ṛtuthā kṛṇomi tā-tā piṇḍānām pra juhomy agnau

Mandala 1 · Verse 20
mā tvā tapat priya ātmāpiyantam mā svadhitis tanva1 ā tiṣṭhipat te | mā te gṛdhnur aviśastātihāya chidrā gātrāṇy asinā mithū kaḥ

Mandala 1 · Verse 21
na vā u etan mriyase na riṣyasi devām̐ id eṣi pathibhiḥ sugebhiḥ | harī te yuñjā pṛṣatī abhūtām upāsthād vājī dhuri rāsabhasya

Mandala 1 · Verse 22
sugavyaṁ no vājī svaśvyam puṁsaḥ putrām̐ uta viśvāpuṣaṁ rayim | anāgāstvaṁ no aditiḥ kṛṇotu kṣatraṁ no aśvo vanatāṁ haviṣmān

Mandala 1 · Verse 1
आ धेनवः पयसा तूर्णर्था अमर्धन्तीरूप नो यन्तु मध्या। महो राये बृहतीं सप्त विप्रो मयोभुवो जरिता जोहवीति.. (१)

May the cows, rich with milk, come to us swiftly, unimpeded, and fill our midst. The wise singer, seeking great wealth and sustenance, calls out to the bountiful ones.

Mandala 1 · Verse 2
आ सुष्टुतीं नमसा वर्त्तयध्वं द्यावा वाजांय पृथिवी अमृधे। पिता माता मधुवचाः सुहस्ता भरेभरे नो यशसाविष्ठाम्.. (२)

May the heavens and earth, with their bountiful gifts and sweet words, bestow upon us strength and glory, like a loving father and mother.

हम शोभन स्तुतियों एवं हव्य द्वारा हिंसारहित धरती-आकाश को अन्न लाभ के निमित्त प्रसन्न करना चाहते हैं. माता-पिता के समान, मधुर/वचनयुक्त एवं सुंदर हाथों वाले धरती-आकाश समस्त संग्रामों में हमारी रक्षा करें. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अध्वर्यवश्वकृवांसो मधुनि प्र वायवे भरत चारु शुक्रम्, होतेव नः प्रथम पायहस्य देव मध्वो र्र्मा ते मदाय.. (३)

O divine one, like the Adhvaryu priests offering sweet Soma, may you accept this pure, delightful offering for our joy and intoxication.

हे अध्वर्युजनो! तुम मधुर आज्य एवं हव्य तैयार करके उत्तम सोम रस सबसे पहले वायुदेव को प्रदान करो. हे वायुदेव! तुम भी होता की तरह इस सोम को सबसे पहले पिओ. हे देव! यह सोम हम तुम्हारी प्रसन्नता के लिए दे रहे हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
दश क्षिपो युञ्जते बाहू अद्रि सोमस्य या शमिता सुहस्ता. मध्वो रसं सुभगस्तिर्गिरिछां चिनिष्षदद्दुदुहे शुक्रंशुः.. (४)

The ten swift arms are joined, the skilled hands of the mountain-born Soma, who has brought forth the sweet essence of honey and the bright rays of the sun.

ऋत्विजों की शीघ्रता करने वाली दस उंगलियाँ एवं सोम रस निचोड़ने वाले हाथ पत्थरों को पकड़ते हैं. शोभन उंगलियों वाला ऋत्विज प्रसन्न होता हुआ उच्च पर्वत पर उत्पन्न सोमलता का मधुर रस टपकता है. सोमलता से श्वेत रस निकलता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
असावि ते जुजुषानय सोमः कृत्वे दक्षाय बुहते मदय. हरी रथे सुधुरा योगे अर्वागिन्द्र प्रिया कृणुहि हव्यमानः.. (५)

May this Soma, pleasing to you, invigorate your strength and might, O Indra. Draw your swift horses, yoked and ready, to this offering, and be pleased.

हे सेवा करने वाले इंद्र! तुम्हारे कार्यों, शक्ति एवं महान् मद के कारण तुम्हारे लिए सोम रस निचोड़ा गया है. हे इंद्र! हमारे द्वारा पुकारे जाने पर तुम सुंदर जुए में जुते हुए दोनों घोड़ों को रथ में जोड़कर वह रथ हमारे सामने लाओ. (५)

Mandala 1 · Verse 6
आ नो महीमरमतिं सजोषां ग्नां देवीं नमसा रातहव्याम्. मधोर्मदाय बृहतीमृत्तमामानं वह पथिभिर्र्दवयानेः.. (६)

O Goddess, bring to us the great, joyous, and bountiful prosperity, who is worthy of worship, and who, with sweet offerings, will lead us on swift paths to delight.

हे अग्नि! तुम प्रसन्नतापूर्वक हमारे साथ देवों को प्राप्त होने वाले मार्गों द्वारा महान्, सर्वत्र गमनशील, हव्यों के साथ यज्ञ को जानने वाली, हव्य प्राप्त करने वाली एवं विशाल गुना देवी को सोम रस पीकर प्रसन्न होने के लिए हव्य वहन करो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अञ्जन्ति यं प्रथयन्तो न विप्र वपावन्तं नागिनना तपन्त.: पितुर्न पुत्र उपसि ष्ठ आ धर्मोऽग्निमृतयत्रसादि.. (७)

Those who praise Him, the radiant, the powerful, the serpent-like, do not burn. Like a son to his father, He is the foundation, the divine fire that sustains all.

मेधावी ऋत्विजों ने यज्ञ की कामना से हव्यपात्र अग्नि के ऊपर रख दिया है. वह ऐसा जान पड़ता है कि पिता की गोद में पुत्र हो अथवा मोटा पशु आग में तपाया जा रहा हो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अच्छा मही बृहतीं शन्त्मा गीर्दृतो न गन्त्वश्र्षिना हव्यैः मयोभुवा सरथा यातमवर्गन्तं निधिं धुरमाणिं नाभिम्.. (८)

May the mighty, expansive, and beneficent hymns, accompanied by offerings, reach us, bringing joy and prosperity, like chariots carrying precious treasures.

Mandala 1 · Verse 9
समुद्रमासमव तरस्थे अग्निमा न रिष्यति सवनं यस्मिन्त्रायाता. अत्रा न हार्दि क्रवणस्य रेजते यत्रा मतिविर्धते पूतबन्धन.. (९)

The divine fire, unassailable like the ocean, protects the sacred ritual where the mind's pure devotion flourishes. In that place, the heart of the listener rejoices, where wisdom is nurtured by pure bonds.

हमारा प्रधान स्तोत्र उसी प्रकार सूर्य को प्राप्त हो, जिस प्रकार सरिताएँ सागर के पास जाती हैं. यज्ञशाला में की गई सूर्यस्तुति कभी समाप्त नहीं होती, जिस स्थान में सूर्य के प्रति पवित्र भावना रहती है, वहां यजमानों की अभिलाषा कभी अपूर्ण नहीं रहती. (९)

Mandala 1 · Verse 10
स हि क्षत्रस्य मनस्य चित्तिभिरैवावदस्य यजत्स्य सधेः. अवत्सारस्य स्पृणवाम रणवभिः शविष्ठं वाजे विदुषा चिदर्धम्.. (१०)

May we, through our devotion and understanding, praise the mighty and powerful one, who is the mind of the warrior, the sacrificer, and the companion.

हम क्षत्र, मनस, अवद, यजत, सधि एवं अवत्सार नामक ऋषि विद्वानों के भी पूज्य एवं सबके कामपूरक सूर्य से ज्ञानियों द्वारा भोगने योग्य अन्न की पूर्ति कराते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
शयेन आसामादितिः कश्यो३ मदो विश्ववारस्य यजत्स्य मायिनः. समन्व्यम्यमर्धन्त्येतेवे विदुविर्षणं परिपानमन्ति ते.. (११)

The wise, knowing the all-pervading, the divine illusionist, praise and protect Him, the source of all, the sustainer of the universe.

विश्ववार, यजत एवं मायी नामक ऋषियों का सोमरस-संबंधी नशा बाज के समान तेज एवं अदिति के समान विस्तृत है. वे सोमरस पीने के लिए एक-दूसरे से याचना करते हैं एवं अंत में विशेष प्रकार का मद प्राप्त करते हैं. (११)

Mandala 1 · Verse 12
सदापर्णो यजतो वि द्विषो वधीद्वाहृतकः श्रुविंतर्यों वः सचा. उभा स वरा प्रत्येति भाति च यदी गणं भजते सुप्रयावाभिः.. (१२)

He who always offers sacrifices and destroys enemies, who is praised by the Vedas, and who is honored by all, shines brightly when he worships the divine assembly with excellent offerings.

सदापर्ण, यजत, वाहृवृक, श्रुतवित्त एवं तर्प नामक ऋषि तुम्हारे हितैषी बनकर तुम्हारे शत्रुओं का नाश करें. ये ऋषि दोनों लोकों की कामनाओं को प्राप्त करके दीप्तिसंपन्न बनते हैं. ये विविध स्तोत्रों द्वारा विश्वदेवों की उपासना करते हैं. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
सुतभरो यजमानस्य सप्ततिर्विंश्वासासुः स धियामुदञ्चनः. भरछेनू रसवच्छ्रिथिये पयोऽनुब्रवाणो अध्येति न स्वपन्.. (१३)

The sacrificer's son, full of faith and devotion, nourishes the divine knowledge, and with his pure mind, he diligently studies the sacred texts, never sleeping.

मुझे अवत्सार नामक यजमान के यज्ञ में सुतंभर नामक ऋषि फलों का पालन करते हैं. वे सभी यजकर्मों को उन्नत फल की ओर प्रेरित करते हैं. गायें दूध देती हैं. मधुर दूध बांटा जाता है. निद्रा से जागकर अवत्सार इस प्रकार बोलते हुए अध्ययन करते हैं. (१३)

Mandala 1 · Verse 1
विदा दिवो विष्ण्वन्द्रमुक्थैरायत्या उषसो अर्चिनो गुः अपावृत्तं व्रजिनोरुस्तर्गाद्धि दुरो मानुषीदेव आवः.. (१)

The radiant dawn, like Vishnu and Indra, has arrived, dispelling darkness and opening the doors of the divine and human realms.

इंद्र ने अंगिरागोत्रीय ऋषियों की स्तुति सुनकर वज्र फेंका. इससे आने वाली उषा की किरणें सभी जगह फैल गईं. अंधकार के समूह को समाप्त करके सूर्य प्रकाशित होते हैं एवं मानवों के द्वार खोल देते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
वि सूर्यो अमतिं न श्रियं सादोवर्दं गवा माता जानती गात्. धन्वर्णसो नद्यः खादोअग्णाः स्थूणेव सुमितां दुंहत दधः.. (२)

The mother, knowing the cows, brought forth nourishment like the sun, bestowing beauty and abundance. The rivers, like flowing gold, yield sustenance, firmly established.

सूर्य पदार्थों के भिन्न रूप के समान ही परिवर्तितरूप धारण करते रहते हैं. किरणों की माता उषा सूर्योदय की बात जानती हुई आकाश से उतरती है. किनारों को तोड़ने वाली नदियां जल से भरकर बहती हैं. स्वर्ग घर में गड़े हुए लकड़ी के खंभे के समान स्थिर हो जाता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अस्मा उक्थाय पर्व.तस्य गर्भां महीनां जनुभे पूष्याय. वि पर्वतो जिही.त साधत धौरविवासन्तो दस्यन्तं भूम.. (३)

The mountain's womb, for the praise of the divine, gives birth to the mighty ones, nourishing them. The mountain opens, the earth rejoices, and the darkness is dispelled.

महान स्तुतियों का निर्माण करने वाले प्राचीन ऋषियों के समान हम स्तुति करते हैं तो बादलों से जल बरसता है. आकाश अपना कार्य पूर्ण करता है इसलिए पानी बरसता है. यज्ञकर्म करने वाले अंगिरागोत्रीय ऋषि बहुत अधिक थक जाते हैं. (३)


Mandala 1 · Verse 4
सूक्तेभिवों वचोभिवंदजु.ष्टेन्द्र.न्वाग्नी अवसे हुवथै. उक्थैभिरहि ष्मा कवयः सुयज्ञा आ.विवासन्तो मरुतो यजन्ति.. (४)

The wise, with hymns and offerings, invoke Indra and Agni for protection, and with praise and perfect sacrifices, they worship the Maruts.

सू.क.त.भ.ि. व.च.ो.भ.ि. व.ज.ु.ष.े. इ.ं.द.्.र. न्.व.ा.ग्.न.ी. अ.व.स.े. ह.ु.व.थ.ै. उ.क्.थ.ै.भ.ि.र. ह.ि. श.्.म.ा. क.व.य.ः. स.ु.य.ज्ञ.ा. आ.व.ि.व.ा.स.न.्.त.ो. म.रु.त.ो. य.ज.ं.त.ि.. (४)

Mandala 1 · Verse 5
एतो नश्च सुभ्यो भवमि प्र दुच्छना मिनवामा वरीयः। आरे द्रेष्ांसे सनुतर्दधामायम् प्राञ्चो यजमानमच्छ.. (५)

May we be blessed with prosperity and strength, driving away all evil and misfortune, as we approach the divine with devotion.

हे देवो! यज्ञ के दिन तुम विशेष रूप से हमारे समीप आओ. इस दिन हम शुभकर्मों वाले बनते हैं, शत्रुओं को पराजित करते हैं, छिपे हुए शत्रुओं को समाप्त करते हैं एवं यजमानों के सामने जाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
एता धियं कृणवामा सखाभ्योऽप या मातो ऋतृत व्रजं गोः। यया मनुर्विशिशिप्रं जिगाय यया वणिगङकुरापा पुरीषम्.. (६)

May we offer this intellect to our friends, by which man conquers with sharp discernment, and the merchant gains abundant wealth.

हे मित्रो! आओ. हम लोग मिलकर स्तुति करें. इन स्तुतियों से चुराई गई गायों के भवन का द्वार खुलता है. इन्हीं से मनु ने विशिशिप्र नामक असुर को जीता था एवं इन्हीं की सहायता से वर्णिक तुल्य कक्षीवान् ने वन में जाकर जल पाया था. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अनूद्तो हसतयो अदिराचर्येन दश मासो नवग्वाः। ऋतं यती सरमा गा अविन्दद्द्रिश्नानि सत्याङ्ग्शिराङ्कर.. (७)

The wise seeker, guided by the teacher, finds the hidden truths, like the swift Sarama finding the cows, revealing the radiant essence of reality.

इस यज्ञ में ऋत्विजों द्वारा सोमलत्ता कूटने के लिए काम में आने वाले पत्थर शब्द करते हैं. इन्हीं पत्थरों की सहायता से निचोड़े हुए सोम द्वारा नवग्वा एवं दशग्वा यज्ञ करने वाले अश्ववंशी ऋषियों ने इंद्र की पूजा की थी. सरमा ने यज्ञ में आकर गायों को प्राप्त कराया एवं अंगिरागोत्रीय ऋषियों के स्तोत्र सफल हुए. (७)

Mandala 1 · Verse 8
विश्वे अस्या व्युषि माहिनायाः सं यद् गोभिरङ्ग्गिर्सो न्वन्त. उत्स आसां परमे सधस्थ ऋतस्य पथा सरमा विद्गगाः.. (८)

When the Angirases, with their cows, celebrated the greatness of this dawn, Sarama, following the paths of Truth, discovered the source in the highest celestial abode.

इस पूजनीया उषा का प्रकाश फैलते ही अंगिरागोत्रीय ऋषियों ने गायों को प्राप्त किया. गोशाला में दूध दुहा जाने लगा, क्योंकि सत्य मार्ग से सरमा ने गायों को देख लिया था. (८)

Mandala 1 · Verse 9
आ सूर्यो यातु सप्ताश्वः क्षेत्रं यदस्योर्विया दीर्घयाथे. रघुः श्येनः पतयन्द्न्त् अच्छा युवा कविर्दिद्यदगोषु गच्छन्.. (९)

May the Sun, with his seven horses, traverse the vast and long expanse of the sky. May the swift eagle, like Raghu, fly with divine radiance, illuminating all directions.

सात घोड़ों के स्वामी सूर्य हमारे सामने आवें. सूर्य की लंबी यात्रा का क्षेत्र दीर्घ-गमन अपेक्षित करता है. सूर्य तीव्रगामी श्येन के समान हव्य के समीप आते हैं. अतिशय युवा एवं ज्ञानी सूर्य अपनी किरणों के साथ चलते हुए विशेषरूप से प्रकाशित होते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
उदना न नावमन्यन्त धीरा आश्वण्वतीरापो अवर्गतिष्ठन्.. (१०)

The wise do not disregard the flowing waters, for they are the source of life and sustenance.

सूर्य दीप्तिशाली जल पर आरूढ़ होते हैं. सूर्य जब अपने रथ में सुंदर पीठ वाले घोड़ों को जोड़ते हैं, तब धीर यजमान उन्हें जल पर चलने वाली नाव के समान ले आते हैं एवं सूर्य की आज्ञा मानने वाली जलराशि झुक जाती है. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
धियं वो अप्सु दधिषे स्वर्ष्ं ययातरन्द्रश मासो नवग्वाः। अया धिया स्याम देवगोपा अया धिया तुतुर्यामात्यहं.. (११)

May the divine intellect, which sustains all, grant us strength and wisdom. With this enlightened mind, may we overcome all obstacles and be protected by the gods.

धैर्य वो अप्सु दधिषे स्वर्ष्ं ययातरन्द्रश मासो नवग्वाः। अया धिया स्याम देवगोपा अया धिया तुतुर्यामात्यहं.. (११) हे देवो! हम तुम्हारी सब कुछ देने वाली स्तुति को जलप्राप्ति निमित्त बोल रहे हैं. नवग्व यज्र करने वाले अत्रिगोत्रीय ऋषियों ने इन्हीं के सहारे दस महीने बिताए थे. इन्हीं स्तुतियों के कारण हम देवों द्वारा रक्षित हों एवं पापों को लांघ सकें. (११)

Mandala 1 · Verse 12
pañcapādam pitaraṁ dvādaśākṛtiṁ diva āhuḥ pare ardhe purīṣiṇam | atheme anya upare vicakṣaṇaṁ saptacakre ṣaḻara āhur arpitam

Mandala 1 · Verse 13
pañcāre cakre parivartamāne tasminn ā tasthur bhuvanāni viśvā | tasya nākṣas tapyate bhūribhāraḥ sanād eva na śīryate sanābhiḥ

Mandala 1 · Verse 14
sanemi cakram ajaraṁ vi vāvṛta uttānāyāṁ daśa yuktā vahanti | sūryasya cakṣū rajasaity āvṛtaṁ tasminn ārpitā bhuvanāni viśvā

Mandala 1 · Verse 15
sākaṁjānāṁ saptatham āhur ekajaṁ ṣaḻ id yamā ṛṣayo devajā iti | teṣām iṣṭāni vihitāni dhāmaśaḥ sthātre rejante vikṛtāni rūpaśaḥ

Mandala 1 · Verse 16
striyaḥ satīs tām̐ u me puṁsa āhuḥ paśyad akṣaṇvān na vi cetad andhaḥ | kavir yaḥ putraḥ sa īm ā ciketa yas tā vijānāt sa pituṣ pitāsat

Mandala 1 · Verse 17
avaḥ pareṇa para enāvareṇa padā vatsam bibhratī gaur ud asthāt | sā kadrīcī kaṁ svid ardham parāgāt kva svit sūte nahi yūthe antaḥ

Mandala 1 · Verse 18
avaḥ pareṇa pitaraṁ yo asyānuveda para enāvareṇa | kavīyamānaḥ ka iha pra vocad devam manaḥ kuto adhi prajātam

Mandala 1 · Verse 19
ye arvāñcas tām̐ u parāca āhur ye parāñcas tām̐ u arvāca āhuḥ | indraś ca yā cakrathuḥ soma tāni dhurā na yuktā rajaso vahanti

Mandala 1 · Verse 20
dvā suparṇā sayujā sakhāyā samānaṁ vṛkṣam pari ṣasvajāte | tayor anyaḥ pippalaṁ svādv atty anaśnann anyo abhi cākaśīti

Mandala 1 · Verse 21
yatrā suparṇā amṛtasya bhāgam animeṣaṁ vidathābhisvaranti | ino viśvasya bhuvanasya gopāḥ sa mā dhīraḥ pākam atrā viveśa

Mandala 1 · Verse 22
yasmin vṛkṣe madhvadaḥ suparṇā niviśante suvate cādhi viśve | tasyed āhuḥ pippalaṁ svādv agre tan non naśad yaḥ pitaraṁ na veda

Mandala 1 · Verse 23
yad gāyatre adhi gāyatram āhitaṁ traiṣṭubhād vā traiṣṭubhaṁ niratakṣata | yad vā jagaj jagaty āhitam padaṁ ya it tad vidus te amṛtatvam ānaśuḥ

Mandala 1 · Verse 24
gāyatreṇa prati mimīte arkam arkeṇa sāma traiṣṭubhena vākam | vākena vākaṁ dvipadā catuṣpadākṣareṇa mimate sapta vāṇīḥ

Mandala 1 · Verse 25
jagatā sindhuṁ divy astabhāyad rathaṁtare sūryam pary apaśyat | gāyatrasya samidhas tisra āhus tato mahnā pra ririce mahitvā

Mandala 1 · Verse 26
upa hvaye sudughāṁ dhenum etāṁ suhasto godhug uta dohad enām | śreṣṭhaṁ savaṁ savitā sāviṣan no 'bhīddho gharmas tad u ṣu pra vocam

Mandala 1 · Verse 27
hiṅkṛṇvatī vasupatnī vasūnāṁ vatsam icchantī manasābhy āgāt | duhām aśvibhyām payo aghnyeyaṁ sā vardhatām mahate saubhagāya

Mandala 1 · Verse 28
gaur amīmed anu vatsam miṣantam mūrdhānaṁ hiṅṅ akṛṇon mātavā u | sṛkvāṇaṁ gharmam abhi vāvaśānā mimāti māyum payate payobhiḥ

Mandala 1 · Verse 29
ayaṁ sa śiṅkte yena gaur abhīvṛtā mimāti māyuṁ dhvasanāv adhi śritā | sā cittibhir ni hi cakāra martyaṁ vidyud bhavantī prati vavrim auhata

Mandala 1 · Verse 30
anac chaye turagātu jīvam ejad dhruvam madhya ā pastyānām | jīvo mṛtasya carati svadhābhir amartyo martyenā sayoniḥ

Mandala 1 · Verse 31
apaśyaṁ gopām anipadyamānam ā ca parā ca pathibhiś carantam | sa sadhrīcīḥ sa viṣūcīr vasāna ā varīvarti bhuvaneṣv antaḥ

Mandala 1 · Verse 32
ya īṁ cakāra na so asya veda ya īṁ dadarśa hirug in nu tasmāt | sa mātur yonā parivīto antar bahuprajā nirṛtim ā viveśa

Mandala 1 · Verse 33
dyaur me pitā janitā nābhir atra bandhur me mātā pṛthivī mahīyam | uttānayoś camvo3r yonir antar atrā pitā duhitur garbham ādhāt

Mandala 1 · Verse 34
pṛcchāmi tvā param antam pṛthivyāḥ pṛcchāmi yatra bhuvanasya nābhiḥ | pṛcchāmi tvā vṛṣṇo aśvasya retaḥ pṛcchāmi vācaḥ paramaṁ vyoma

Mandala 1 · Verse 35
iyaṁ vediḥ paro antaḥ pṛthivyā ayaṁ yajño bhuvanasya nābhiḥ | ayaṁ somo vṛṣṇo aśvasya reto brahmāyaṁ vācaḥ paramaṁ vyoma

Mandala 1 · Verse 36
saptārdhagarbhā bhuvanasya reto viṣṇos tiṣṭhanti pradiśā vidharmaṇi | te dhītibhir manasā te vipaścitaḥ paribhuvaḥ pari bhavanti viśvataḥ

Mandala 1 · Verse 37
na vi jānāmi yad ivedam asmi niṇyaḥ saṁnaddho manasā carāmi | yadā māgan prathamajā ṛtasyād id vāco aśnuve bhāgam asyāḥ

Mandala 1 · Verse 38
apāṅ prāṅ eti svadhayā gṛbhīto 'martyo martyenā sayoniḥ | tā śaśvantā viṣūcīnā viyantā ny a1nyaṁ cikyur na ni cikyur anyam

Mandala 1 · Verse 39
ṛco akṣare parame vyoman yasmin devā adhi viśve niṣeduḥ | yas tan na veda kim ṛcā kariṣyati ya it tad vidus ta ime sam āsate

Mandala 1 · Verse 40
sūyavasād bhagavatī hi bhūyā atho vayam bhagavantaḥ syāma | addhi tṛṇam aghnye viśvadānīm piba śuddham udakam ācarantī

Mandala 1 · Verse 41
gaurīr mimāya salilāni takṣaty ekapadī dvipadī sā catuṣpadī | aṣṭāpadī navapadī babhūvuṣī sahasrākṣarā parame vyoman

Mandala 1 · Verse 42
tasyāḥ samudrā adhi vi kṣaranti tena jīvanti pradiśaś catasraḥ | tataḥ kṣaraty akṣaraṁ tad viśvam upa jīvati

Mandala 1 · Verse 43
śakamayaṁ dhūmam ārād apaśyaṁ viṣūvatā para enāvareṇa | ukṣāṇam pṛśnim apacanta vīrās tāni dharmāṇi prathamāny āsan

Mandala 1 · Verse 44
trayaḥ keśina ṛtuthā vi cakṣate saṁvatsare vapata eka eṣām | viśvam eko abhi caṣṭe śacībhir dhrājir ekasya dadṛśe na rūpam

Mandala 1 · Verse 45
catvāri vāk parimitā padāni tāni vidur brāhmaṇā ye manīṣiṇaḥ | guhā trīṇi nihitā neṅgayanti turīyaṁ vāco manuṣyā vadanti

Mandala 1 · Verse 46
indram mitraṁ varuṇam agnim āhur atho divyaḥ sa suparṇo garutmān | ekaṁ sad viprā bahudhā vadanty agniṁ yamam mātariśvānam āhuḥ

Mandala 1 · Verse 47
kṛṣṇaṁ niyānaṁ harayaḥ suparṇā apo vasānā divam ut patanti | ta āvavṛtran sadanād ṛtasyād id ghṛtena pṛthivī vy udyate

Mandala 1 · Verse 48
dvādaśa pradhayaś cakram ekaṁ trīṇi nabhyāni ka u tac ciketa | tasmin sākaṁ triśatā na śaṅkavo 'rpitāḥ ṣaṣṭir na calācalāsaḥ

Mandala 1 · Verse 49
yas te stanaḥ śaśayo yo mayobhūr yena viśvā puṣyasi vāryāṇi | yo ratnadhā vasuvid yaḥ sudatraḥ sarasvati tam iha dhātave kaḥ

Mandala 1 · Verse 50
yajñena yajñam ayajanta devās tāni dharmāṇi prathamāny āsan | te ha nākam mahimānaḥ sacanta yatra pūrve sādhyāḥ santi devāḥ

Mandala 1 · Verse 51
samānam etad udakam uc caity ava cāhabhiḥ | bhūmim parjanyā jinvanti divaṁ jinvanty agnayaḥ

Mandala 1 · Verse 52
divyaṁ suparṇaṁ vāyasam bṛhantam apāṁ garbhaṁ darśatam oṣadhīnām | abhīpato vṛṣṭibhis tarpayantaṁ sarasvantam avase johavīmi

Mandala 1 · Verse 1
कदु प्रियाय धाम्ने मनामहे स्वक्ष्त्रा ययशसे महे वयम्। आमेन्यस्य रजसो यदभ्र आँ अपो वृणाना वितनोति मायिनि.. (१)

We praise the beloved, radiant abode, and the glorious, victorious power. The magician, embracing the waters, spreads forth from the essence of the earth.

हम सबके प्रिय विद्युत-संबंधी तेज की स्तुति कब करेंगे? बल एवं यश उसका आधार हैं एवं वह सबका पूज्य है. वह शक्ति सब ओर से परिमित लगने वाले आकाश में वर्षा का विस्तार करती है. वह प्रजावती एवं आकाश को ढकने वाली है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
ता अन्तत वयुनं वीरवक्षणं सामान्य वृत्त्या विश्वमा रजः। अपो अपाचीरपरा अपेजेते प्र पूर्वाभिरस्तिरे देवयुर्जन:.. (२)

The divine light, the strength of heroes, pervades the universe with its common radiance. The gods, desirous of worship, move forward with the preceding ones, leaving the hindmost behind.

क्या उपाएं ऋत्विजों द्वारा धारण करने योग्य ज्ञान का विस्तार करती हैं? वे एक रूप वाली आवरण शक्ति से सारे संसार को ढक लेती हैं. देवों की अभिलाषा करने वाले लोग पूर्ववर्तिनी एवं भविष्य में आने वाली उषओं को छोड़कर सामने उपस्थित वर्तमान उषओं से अज्ञान को लांघते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
आ ग्राभिर्हन्त्येभिरभ्कुभिररिश्छं वज्रमा जिधर्ति मायिनि. शतं वा यस्य प्रचरन्त्वेमे संवर्त्यन्तो वि च वर्तनग्रहा.. (३)

The sorceress strikes with these grasping hands, holding the thunderbolt, her illusions are powerful. A hundred of these may move and turn, grasping and revolving.

पत्थरों द्वारा रात एवं दिन में तैयार किए गए सोम-रस से प्रसन्न होकर इंद्र मायावी वृत्र को मारने के लिए वज्र को तेज बनाते हैं. इंद्र-रूपी सूर्य की सैकड़ों किरणें दिनों को लाती एवं विदा करती हुई आकाश में घूमती हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
तामस्य रीर्तिं परशोविव प्रत्यनीकमखं भुजे अस्य वर्षः। सचा यदि पितुम्मन्मिव क्षयं रत्नीं दधाति भरहूतये विशे.. (४)

He who, with the strength of his arm, wields the axe of destruction against the enemy, and, like the father, bestows riches upon his people, truly upholds the prosperity of the nation.

Mandala 1 · Verse 5
स जिह्वा चतुरनीक ऋज्ज्ते चारुं वसानो वरुणो यतन्वरिम्। न तस्य विद्म पुरुषत्वता वयं यतो भगः सविता दाति वार्यम्.. (५)

The radiant Varuna, adorned in splendor, stretches forth his tongue, and the four armies are drawn to him. We know not his true might, from whom Savitr bestows all that is desirable.

अपने स्वामी का अभिमत पूरा करने वाले परशु के समान हम अग्नि की दीप्ति को देखते हैं. इस रूपवान् सूर्य की किरणों का वर्णन हम सुख पाने के निमित्त करते हैं. अग्नि देव हमारे सहायक होकर यज्ञशाला में आते हैं एवं यजमान को अन्न से भरा हुआ घर तथा उत्तम धन देते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
kva1 syā vo marutaḥ svadhāsīd yan mām ekaṁ samadhattāhihatye | ahaṁ hy u1gras taviṣas tuviṣmān viśvasya śatror anamaṁ vadhasnaiḥ

The radiant Agni, embodying beauty and brilliance, destroys the enemy of darkness and adorns all directions with fiery flames. We do not know this Agni, who acts like a man, for the great Savitr, possessing divine glory, bestows upon us excellent wealth.

अग्निं रमणीय तेज को धारण करते हुए अंधकाररूपी शत्रु का नाश करते हैं एवं चारों दिशाओं में ज्वलारूपी लपटें फैला कर सुशोभित होते हैं. हम पुरुष के समान आचरण करने वाले अग्नि को नहीं जानते, क्योंकि भग-रूपी महान् सविता हमें उत्तम धन देते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
सुता इन्द्राय वायवे सोमासो दच्याशिरः, निम्नं न यन्ति सिन्धवोऽभि प्रयः.. (७)

Like rivers flowing into the sea, the offerings of Soma, milk, and barley flour are poured for Indra and Vayu.

इंद्र एवं वायु के लिए दही मिला सोम रस तैयार किया है. वह सोम तुम्हारी ओर नीचे बहने वाली सरिताओं के समान पहुंचे. (७)


Mandala 1 · Verse 8
सजूर्मिर्ब्रिभ्देभिरभ्भ्यामुपसा सजूः, आ याहग्नेऽत्रिवस्तुते रण.. (८)

O Agni, come with your companions, the waters and the dawn, to this sacrifice, and be pleased with our offerings.

हे अग्नि! तुम समस्त देवों के साथ आओ एवं अश्विनीकुमारों तथा उषः के साथ मित्रता स्थापित करो. तुम यज्ञ में आकर सोम रस द्वारा उसी प्रकार प्रसन्न बनो, जिस प्रकार अग्नि

Mandala 1 · Verse 9
सजुर्मित्रावरुणाभ्यां सजूः सोमेन विष्णूना। आ याह्याग्ने अत्रिवत्सुते रण.. (९)

O Agni, come with Mitra and Varuna, with Soma and Vishnu, as the sage Atri invited you to this sweet drink.

हे अग्नि! तुम मित्र, वरुण, सोम एवं विष्णु के साथ आओ तथा यज्ञ में निचोड़ा हुआ सोमरस पीकर ऋषि के समान प्रसन्न बनो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
सजुर्आदित्यैर्वसुभिः सजुरेन्द्रण वायुना। आ याह्याग्ने अत्रिवत्सुते रण.. (१०)

O Agni, come with the Adityas and Vasus, with Indra and Vayu. Come, O son of strength, to this sacrifice.

हे अग्नि! तुम आदित्य, वसुओं, इंद्र एवं वायु के साथ आओ एवं यज्ञ में निचोड़ा हुआ सोमरस पीकर ऋषि के समान प्रसन्न बनो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
स्वस्ति नो मिमितामश्विना भगः स्वस्ति देवद्युतिरनर्वणः। स्वस्ति ष्मा असुरो दधातु नः स्वस्ति द्यावापृथिवी सुचेतुना.. (११)

May the Ashvins, Bhaga, and the divine radiance bless us with well-being. May the mighty Asura and the wise heavens and earth grant us prosperity.

अश्विनीकुमार, भग एवं अदितिदेवी हमारा कल्याण करें. सत्यशील एवं बलदाताPusha हमारा कल्याण करें. शोभन ज्ञानसंपन्न धरती-आकाश भी हमारा कल्याण करें. (११)

Mandala 1 · Verse 12
स्वस्तये वायुमुप ब्रवामहै सोमं स्वस्ति भुवनस्य यस्पतिः। बृहस्पतिं सर्वगणं स्वस्तये स्वस्तय आदित्यासो भवन्तु नः.. (१२)

We invoke the wind for our well-being, and Soma, the lord of the world, for prosperity. May Brihaspati, the leader of all, bring us well-being, and may the Adityas grant us auspiciousness.

हम कल्याण के लिए वायु की स्तुति करते हैं. सब लोकों के पालक सोम की भी हम प्रार्थना करते हैं. हम देवसमूह के साथ बृहस्पति की स्तुति कल्याण के लिए करते हैं. आदित्यगण हमारा कल्याण करें. (१२)

Mandala 1 · Verse 13
विश्वे देवा नो अद्या स्वस्तये वैश्वानरो व苏रग्निः स्वस्तये। देवा अवन्त्वृभवः स्वस्तये स्वस्ति नो रुद्रः पात्वहसः.. (१३)

May the universal deities bless us with well-being today; may Vaishvanara, the fire of all beings, grant us well-being. May the divine architects protect us for our well-being; may Rudra protect us from sin.

इस यज्ञ के पवित्र दिन सभी देव हमारा कल्याण करें. सभी मनुष्यों के नेता एवं घर देने वाले अग्नि हमारा कल्याण करें. दीप्तिशाली ऋभुगण हमारी रक्षा एवं कल्याण करें. रुद्र हमारा कल्याण एवं हमें पाप से बचावें. (१३)

Mandala 1 · Verse 14
स्वस्ति मित्रावरुणा स्वस्ति पथ्ये रेवति. स्वस्ति न इन्द्रज्ञाग्निश्च स्वस्ति नो अदितै कृष.. (१४)

May Mitra and Varuna bring us well-being, may Revati bring well-being on the path. May Indra and Agni bring us well-being, and may Aditi bring us well-being.

हे मित्रवरुण! हमारा कल्याण करो. हे धन की स्वामिनी एवं मार्ग को हितकर बनाने वाली देवी! तुम हमारा कल्याण करो. इंद्र तथा अग्नि हमारा कल्याण करें. हे अदिति तुम हमारा कल्याण करो. (१४)

Mandala 1 · Verse 15
स्वस्ति पन्थामनु चरेम सूर्याचन्द्रमसौ इव । पुनर्ददाघाता जानता सं गमेमहि.. (१५)

May we walk a prosperous path, like the sun and moon, and may we meet again, knowing each other.

जिस प्रकार सूर्य और चंद्र निर्बाधरूप से अपने मार्ग पर चलते हैं, उसी प्रकार हम भी कल्याण मार्ग पर चलें. ऐसे बंधुमित्रों से हमारा मिलन हो, जो बहुत दिन से बिछड़कर भी क्रोधित नहीं हैं एवं हमारा स्मरण करते हैं. (१५)

Mandala 1 · Verse 1
प्र श्यावाश्व धृष्युयार्चा मरुद्धिऋक्क्वाभिः। ये अद्रोघमनुष्ष्व श्रवो मदन्ति यजियः... (१)

O swift and powerful Maruts, who are unassailable and worthy of worship, you who rejoice in praise and offerings among men.

हे ऋषि श्यावाश्व! तुम धीरतापूर्वक स्तुतिपात्र मरुतों की पूजा करो. वे यज्र के पात्र हैं एवं प्रतिदिन हविरूप अन्न को निर्बाध रूप में पाकर प्रसन्न होते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
ते हि स्थिरस्य श वसः सखायः सन्ति धृष्युया । ते यामन्ना धृषद्दिन्स्तमना पान्ति शक्वतः.. (२)

Those who are steadfast friends of the powerful breath, they protect the unyielding, the strong, and the swift. They are the protectors of those who are unyielding and strong.

वे धीर हैं एवं स्थिर शक्ति के मित्र हैं. वे मार्ग में भ्रमण करने वाले हैं एवं अपने आप हमारी संतान की रक्षा करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
ते स्पन्द्रासो नोक्षणोऽति ष्क्दन्ति शर्वरीः। मरुतामधा महो दिवि क्षमा च मन्महे.. (३)

They, like vigorous bulls, traverse the nights, and we meditate on the glory of the Maruts in the heavens and on earth.

गतिशील एवं जल बरसाने वाले मरुद्गण रात्रियों को लांघते हुए हमारे पास आते हैं, इसी कारण मरुतों का तेज धरती एवं आकाश में व्याप्त तथा स्तुति योग्य है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
मरुत्सु वो दधीमहि स्तोमं यजं च धृष्युया । विश्वे ये मानुषा युगा पान्ति मर्त्य रिषः.. (४)

We offer praise and worship to you, O mighty Maruts, who are unassailable. You protect all mortal men in every age from destruction.

हे अध्वर्यु एवं होताओ! तुम लोग धीरतापूर्वक मरुतों की स्तुति करते एवं हव्य देते हो. इसका क्या कारण है? केवल यही कारण है कि वे मनुष्यों को हिंसक शत्रुओं से बचाते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अर्हन्तो ये सुदानवो नरो असामिशव सः: प्र यजं यजियभ्यो दिवो अर्च मरुद्दयः.. (५)

Those who are worthy, generous, and pure, and who offer sacrifices to the deserving, shine with divine radiance, like the Maruts.

हे होताओ! पूजा योग्य, शोभन दान वाले, यजकर्म के नेता, पर्याप्त शक्तिशाली यज्र के पात्र एवं दीप्तिशाली मरुतों की अर्चना यज साधनों द्वारा करो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
आ यं नरः सुदानवो ददाशुषे दिवः कोशमच्युयुवः । वि पर्जन्यं सृजन्ति रोदसी अनु धन्वना यन्ति वृष्ट्यः.. (६)

Those who are generous and offer gifts to the divine receive abundant blessings, like the sky showering rain, bringing forth life and prosperity.

हे मनुष्य! जो दानशील मरुत स्वर्ग से धन के पात्र को प्राप्त करते हैं, वे आकाश और पृथ्वी को वर्षा से भर देते हैं और वर्षा के साथ चलते हैं। (६)

Mandala 1 · Verse 7
स्यन्त्रा अश्वा इवाध्वनो विमोचने वि यद्वर्तन्त अन्यः...(७)

Like horses straining at the reins, when the mind is released from its restraints, it wanders far.

भेदिन किए गए बादल से निकली हुई जल-धाराएं वेग के साथ आकाश में इस प्रकार गमन करती हैं, जिस प्रकार दुधारू गाय दूध देती है. शीघ्रगामी अश्व जिस प्रकार मार्गों पर चलते हैं, उसी प्रकार नदियां तेजी से बहती हैं.(७)

Mandala 1 · Verse 8
आ यात मरुतो दिव आन्तरीक्षदादुत. माव स्थात परावतः...(८)

Come, O Maruts, from the heavens and the atmosphere. Do not remain far away.

आ यात् मरुतो दिव आन्तरीक्षदादुत. माव स्थात परावतः...(८)

Mandala 1 · Verse 9
मा वो रसानितभा कुभा कुमुर्भा वः सिन्धुर्नि रीरमत मा वः परि छात्सरयुः पुरीषिष्ये इत्युन्मस्ततु वः...(९)

May the waters not be stagnant or impure, nor the rivers cease to flow. May the Sarayu not surround you, nor the full waters overflow.

मा वो रसानितभा कुभा कुमुर्भा वः सिन्धुर्नि रीरमत, मा वः परि छात्सरयुः पुरीषिष्ये इत्युन्मस्ततु वः...(९)

Mandala 1 · Verse 10
तं वः शर्थ रथानां त्वेषं गणं मारुतं नव्यसीनाम्. अनु प्र यन्ति वृष्यः...(१०)

The Maruts, a brilliant host of chariots, swift and ever-renewing, are followed by the strong ones.

हे मरुतो! तुम्हारे नवीन रथों के वेग एवं दीप्ति की हम प्रशंसा करते हैं. वर्षा मरुतों के पीछे-पीछे चलती है.(१०)

Mandala 1 · Verse 11
शर्धशर्ध व एषां ब्रातव्रतं गणृंण सुशस्तिभिः. अनु क्रामेम धीतिभिः...(११)

Following the divine order with devotion, we shall advance together, united in purpose and praise.

हे मरुतो! हम सुंदर स्तुतियों एवं हव्य देने आदि कर्मों द्वारा तुम्हारे बलो, समूहों एवं गणों के पीछे चलते हैं.(११)

Mandala 1 · Verse 12
कस्मा अद्य सुजाताय रातहव्याय प्र ययुः. एना यामेन मरुतः...(१२)

Why did the Maruts, born of the divine, approach the one who has offered oblations today?

मरुद्गण आज किस उत्तम हवि देने वाले यजमान के पास अपने रथ द्वारा जाएंगे? (१२)

Mandala 1 · Verse 13
येन तोकाय तनयाय धान्यं बीजं वहध्वे अक्षतम्. अस्मभ्यं तद्धन यद् ईमहे राधो विश्वायु सौभगम्..(१३)

May the grain and seed you carry for your children be abundant and unbroken. Grant us wealth, prosperity, and good fortune, which is our desire.

Mandala 1 · Verse 14
yena dīrgham marutaḥ śūśavāma yuṣmākena parīṇasā turāsaḥ | ā yat tatanan vṛjane janāsa ebhir yajñebhis tad abhīṣṭim aśyām

Mandala 1 · Verse 15
सुदेवः समहाऽऽसति सुवीरो नरो मरुतः स मर्त्यः। यं त्रायध्वं स्याम ते.. (१५)

O Devas, may we be protected by you, the great, the heroic, the mortal-destroying Maruts, so that we may live.

हे पूजित एवं नेता मरुतो! तुम जिस मनुष्य की रक्षा करते हो, वह अन्य देवों का कृपापात्र एवं उत्तम पुत्र-पौत्रों वाला बनता है। हम तुम्हारे सेवक इसी प्रकार बनें। (१५)

Mandala 1 · Verse 1
प्र शर्धाय मारुताय स्वभानव इमां वाचमन्जा पर्यवच्युते। धर्मस्त्वभिह दिव आ पृषयजने घुम्नश्रवसे महि नृम्णमर्चत.. (१)

Praise the mighty Maruts, the self-luminous, with this hymn that flows forth. Worship them with strength and glory, for their might is vast and their fame resounds.

स्वयन्त, तेज वाले, पर्वतों को च्युत करने वाले, धूप का शोषण करने वाले, स्वर्ग से आने वाले, रथ के उपरिभाग पर विराजमान एवं तेजस्वि अन्न वाले मरुतों के बल की प्रशंसा करो तथा उन्हें पर्याप्त अन्न दो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
प्र वो मरुतस्तविषा उदन्यो वयोवृधो अभ्युयुः परिज्रयः। सं विद्धुता दधति वाशन्ति त्रितः स्वरन्त्यापोऽवना परिज्रयः.. (२)

The mighty Maruts, with their powerful waters, advance like a storm, bringing growth and sustenance. Their thunderous voices roar, and the waters sing, showering blessings upon the earth.

हे मरुतो! तुम्हारे दीप्त, जगत् की रक्षा के लिए जल के इच्छुक, अन्न की वृद्धि करने वाले, चलने के लिए रथ में जोड़ने वाले सभी ओर गमनशील, बिजली के साथ संगत होने वाले व तीन स्थानों में शब्द करने वाले गण प्रकट होते हैं एवं जलराशि धरती पर गिरने लगती है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
विद्युन्महसो नरोऽश्मदिधवो वातविशो मरुतः पर्वतव्युतः । अब्द्या चिनुमुहरा हादुनीवृत्तः स्तनयद्मा रभसा उदो जसः.. (३)

The mighty ones, like lightning, wind, and thunder, who are born of the mountains and the clouds, roar with great force.

बिजलीरूप तेज वाले, वर्षा आदि के नेता, पत्थरों के आयुध वाले, दीप्ति प्राप्त करने वाले, पर्वतों को च्युत करने वाले, बार-बार जल देने वाले, वज्र को प्रेरित करने वाले, मिलकर गर्जन करने वाले एवं उद्भूत बलसंपन्न मरुद्गण वर्षा के निमित्त प्रकट होते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
व्यःकूवृद्रा व्यहानि शिवसो व्यःन्तरीक्षं वि रजांसि धूतयः । वि यद्ज्राँ अजथ नाव ईं यथा वि दुर्गाणि मरुतो नाह रिष्यथ.. (४)

O Maruts, you who have scattered the clouds and dispelled the darkness, you who have cleansed the sky and the intermediate regions, you have shattered the obstacles and the difficult paths, so that you may not be harmed.

हे रुद्रो! तुम रात्रि एवं दिन को प्रकट करो. हे सर्वथा समर्थ मरुतो! तुम अंतरिक्ष तथा अन्य लोकों को विस्तृत करो. हे कंपाने वाले मरुतो! सागर जिस प्रकार नाव को हिलाता है, उसी प्रकार तुम बादलों को चंचल बनाओ एवं शत्रु नगरों को नष्ट करो. हे मरुतो! हमारी हिंसा मत करना. (४)

Mandala 1 · Verse 5
तद्रीर्यो वो मरुतो महित्वनं दीर्घं ततान सूर्या न योजनम् । एता न यामे अभगीतशोचिषोऽनश्रृदा यन्न्ययातना गिरिम्.. (५)

O Maruts, your might and glory have stretched the sun's chariot across the vast sky. These swift, radiant beings, whose brilliance is unmatched, have ascended the mountain.

हे मरुतो! जिस प्रकार सूर्य अपना प्रकाश फैलाते हैं अथवा देवों के घोड़े दूर-दूर तक जाते हैं, उसी प्रकार स्तोता तुम्हारे बल एवं महत्व को दूर तक प्रसिद्ध बनाते हैं. हे मरुतो! तुमने उस पर्वत को तोड़ा था, जिस में पर्णियाँ ने चुराए हुए घोड़े छिपाए थे. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अब्जाजिं शर्धो मरुतो यदंर्णां मोषधां वृक्षं कपनेव वेधसः । अथ स्मा नो अरमतिं सजोबिषश्रुखिरि यन्नमनु नेषथा सुगम्.. (६)

O Maruts, you who are the leaders of the divine hosts, may you lead us to a prosperous and auspicious path, just as the wise ones guide the plants and trees.

हे वर्षा करने वाले एवं वृक्षों के समान बादलों को कंपित करने वाले मरुतो! तुम्हारी शक्ति सुशोभित हो रही है. हे परस्पर प्रीतिसंपन्न मरुतो! जिस प्रकार आँखें मार्ग प्रदर्शन करती हैं, उसी प्रकार तुम हमें सरल मार्ग से रमणीय धन के समीप पहुंचाओ. (६)

Mandala 1 · Verse 7
न स जीयते मरुतो न हन्यते न क्षेधति न व्यथते न रिष्यति । नास्य राय उप दस्यन्ति नोत्यं ऋषं वा यं राजानं वा सुवृद्ध.. (७)

The soul is neither born nor dies, nor is it ever destroyed, nor does it suffer, nor is it harmed. No wealth can conquer it, nor can any king or enemy harm it.

हे मरुतो! तुम जिस ऋषि या राजा को यज्ञकर्म में लगाते हो, वह दूसरों द्वारा न हारता है और न मारा जाता है. वह न क्षीण होता है, न कष्ट पाता है और न उसे कोई बाधा पहुंचा सकता है. उसका धन एवं रक्षा साधन भी कभी समाप्त नहीं होते. (७)

Mandala 1 · Verse 8
न्युवन्तो ग्रामजितो यथा नरोऽर्यमणे न मरुतः कवन्धनः । पिन्वन्त्युत्सं यदिनासो अस्वरव्युन्दन्ति पृथिवीं मध्वो अन्धसा.. (८)

As the sun nourishes the earth with its rays, so do the wise, like victorious kings, bestow abundance upon the deserving, filling the world with sweet nourishment.

नियत नाम वाले घोड़ों के स्वामी, संयुक्त पदार्थों को पृथक् करने वाले तथा नेता, सूर्य

Mandala 1 · Verse 9
प्रवत्तीयं पृथिवी मरुद्दयः प्रवत्वतीं द्यौर्भवति प्रयद्रयः प्रवत्वती: पध्या अन्तरिक्षया: प्रवत्वत: पर्वता जीरदानवः.. (९)

The earth is endowed with abundance, the sky with the winds, and the intermediate space with the paths of the gods. The mountains, ever-sustaining, are filled with life.

यह विस्तृत धरती मरुतों के लिए है, विस्तृत स्वर्ग भी गतिशील मरुतों के लिए है. आकाश का मार्ग मरुतों के चलने के लिए विस्तृत है एवं बादल मरुतों के लिए शीघ्र वर्षा करते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
यन्मरुतः: सभरस: स्वर्गर: सूर्य उदिते मदथा दिवो नर: न वोऽश्वा: श्रथयन्ताह सिस्वत: सहो अस्याधन: पारमश्रु.. (१०)

When the Maruts, with their mighty strength, ascend to heaven with the rising sun, their horses do not falter, for they possess immense power.

हे समान शक्ति वाले एवं सबके नेता मरुतो! तुम वर्ग के नेता हो. तुम सूर्य निकलने पर सोमपान करके प्रसन्न होते हो. तुम घोड़े चलाने में शिथिलता नहीं करते एवं तुम सभी लोकों के मार्ग को पार करते हो. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
अंसेषु च ऋषय: पत्सु खाद्यो वक्ष:सु रुक्मा मरुतो रथे शुभ: अग्निभ्राजसो विद्युतो गभस्त्यो: शिप्रा शीर्ष्षु विहिता हिरण्ययीः.. (११)

The Rishis are on the shoulders, the Maruts in the chariot's wheels, gold in the chest, and the shining Agnis in the arms. Lightning is placed on the hands, and golden ones on the heads.

हे मरुतो! तुम्हारे कंधों पर आयुध, पैरों में कट्क, सीने पर हार एवं रथों पर दीप्ति विराजमान है. तुम्हारे हाथों में अग्नि के समान चमकने वाली बिजली तथा शीशों पर विस्तृत सुनहरी पगड़ी है. (११)

Mandala 1 · Verse 1
अग्ने शर्धन्तम गणं पिष्टं रुक्मेभिरञ्जिभिः। विशो अद्य मरुतामव हृये दिवश्रिदोचनादधि.. (१)

O Agni, we invoke the mighty, shining Maruts, whose strength is like gold, to protect us today.

हे अग्नि! चमकते हुए आभूषणों से युक्त एवं शत्रुओं को हराने में कुशल मरुतों के गणों को आज बुलाओ. हम आज दीप्तिशाली स्वर्ग से अपने सामने उपस्थित होने के लिए मरुतों को बुलाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
यथा चिन्मन्यसे हृदा तदिन्मे जग्मुराशसः। ये ते नदिछं हवनाग्यमन्तान्वर्ध भीमसनृदृशः.. (२)

As you think in your heart, so have my desires been fulfilled. May your strength and awe-inspiring form grow, O destroyer of enemies.

हे अग्नि! जिस प्रकार तुम हृदय में मरुतों के प्रति पूजा का भाव रखते हो, उसी प्रकार वे हमारे समीप शुभकामनाएँ लेकर आवें. जो केवल पुकार सुनकर तुम्हारे समीप आ जाते हैं, ऐसे भयानक दिखने वाले मरुतों को द्रव्य देकर बढ़ाओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
मीढुहृष्मतीय पृथिवी पराहता मदन्त्यस्मदा। ऋक्षो न वो मरुतः शिमीवाँ अमो द्रुघो गौरिव भимо.. (३)

O Maruts, you are powerful and life-giving like the earth, and your strength is irresistible. You are like the bear, fierce and mighty, bringing forth abundance.

धरती पर रहने वाली एवं प्रबल राजा वाली प्रजा जिस प्रकार दूसरे से पीड़ित होकर अपने स्वामी के समीप जाती है, उसी प्रकार मरुतों का प्रसन्न समूह हमारे पास आता है. हे मरुतो! तुम्हारा समूह अग्नि के समान कुशल एवं भीषण बैलों से युक्त गौ के समान दुर्धर्ष हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
नि ये रिणन्त्योजसा वृथा गावो न दुधुरः। अश्मानं चित्सवर्ये पर्वतं गिरिं प्र च्यावयन्ति यामभि.. (४)

Like cows that yield no milk, those who are devoid of strength and purpose in vain, shake even stones, mountains, and hills with their might.

मरुदगण दुर्धर्ष बैल के समान अपने ही ओज से शत्रुओं का नाश करते हैं. वे गरजनें वाले, व्याप्त एवं जलवर्षा द्वारा संसार को प्रसन्न करने वाले मेघों को अपने गमन द्वारा बरसने को विवश करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
उत्तिष्ठ नूनमेषां स्तोमैः समुक्षितानाम्। मरुतां पुरूततमपूर्व गवां सर्गमिह हृये.. (५)

Awaken now, you who are sprinkled with these hymns, for I invoke here the most abundant and primordial creation of the Maruts.

हे मरुतो! उठो. हम स्तोत्रों द्वारा उन्नति प्राप्त, अतिशय महान् व जलराशि के समान अपूर्व मरुतों को बुलाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
युङ्ग्ध्वं ह्यश्वं रथे युङ्ग्ध्वं रथे षु रोहिताः । युङ्ग्ध्वं ह्यरिं अजिरा धुरि वोळ्हवे वहिष्ठा धुरि वोळ्हवे.. (६)

Harness the horses to the chariot, harness the swift, red ones. Harness the swift chariot for bearing the yoke, the most capable for bearing the yoke.

हे मरुतो! तुम अपने रथो में चमकीले रंग की घोड़ियों अथवा लाल रंग के घोड़ों को जोड़ो, बोझ ढोने में मजबूत हरि नामक शीघ्रगामी घोड़ों को तुम बोझ ढोने में लगाओ. (६)

Mandala 1 · Verse 7
उत स्य वाज्यरुस्तुविष्पणिर्ह स्म धायि દર્શનઃ । मा वो यामेषु मरुतांश्शिं करत्प तं रथे षु चोदत्.. (७)

May the powerful Maruts, whose strength is immense and whose chariots are swift, not strike us with their might, nor disturb our journey.

हे मरुतो! तुम्हारे रथ में जुड़े हुए दीप्तिशाली, जोर से शब्द करने वाले एवं सुंदर घोड़े तुम्हारे द्वारा इस प्रकार से हांके जाते हैं कि तुम्हारी यात्रा में विलंब नहीं करते. (७)

Mandala 1 · Verse 8
रथं नु मारुतं वयं श्रवस्युमा हुवामहे । आ यस्मिन्नस्थौ सुवर्णाणि बिभ्रतीं सचा मरुत्सु रोदसी.. (८)

We invoke the wind-chariot, the swift Maruts, in whom the golden heavens and earth are seated together.

रथ नु मारुतं वयं श्रवस्युमा हुवामहे। आ यस्मिन्नस्थौ सुवर्णाणि बिभ्रतीं सचा मरुत्सु रोदसी.. (८)

Mandala 1 · Verse 9
तं वः शर्थं रथे षुं त्वेषं पनस्युमा हुवे । यस्मिन्नसुजाता सुभगा महीयते सचा मरुत्सु मीळ्हुषी.. (९)

I invoke you, O powerful and radiant Maruts, for your chariot, in which the noble and fortunate one is greatly honored, along with you.

हे मरुतो! हम सुशोभित, दीप्त, स्तुतियोग्य तुम्हारे उस रथ का आह्वान करते हैं, जिस में शोभा उत्पन्न करने वाली व सौभाग्य वाली मरुत्माता विराजती है. (९)

Mandala 1 · Verse 10
eṣa vaḥ stomo maruta iyaṁ gīr māndāryasya mānyasya kāroḥ | eṣā yāsīṣṭa tanve vayāṁ vidyāmeṣaṁ vṛjanaṁ jīradānum

Mandala 1 · Verse 1
आ रुद्रास इन्द्रवन्तः सजो षो हिरण्यरथः सुविताय गन्तन. इयं वो अस्मतप्रति हवते मतिस्ष्कृष्णे न दिव उत्स्सा उदन्वे.. (१)

May the mighty Rudras, like Indra, with golden chariots, come to our prosperity. This prayer of ours calls to you, rising like the sun from the ocean.

हे इंद्र से युक्त, परस्पर प्रीति संपत्र, सोने के रथों पर बैठे हुए एवं रुद्रपुत्र मरुतो! तुम सरल गमन वाले हमारे यज्ञ में आओ. हमारी स्तुति तुम्हारी कामना करती है. जिस प्रकार तुमने प्यासे एवं जल चाहने वाले गौतम के पास स्वर्ग से आकर जल पहुंचाया था, उसी प्रकार तुम हमारे समीप आओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
वाशीमन्त ऋष्णिमन्तो मनीषिणः सुधन्वान इष्धमन्तो निषङ्क्षिणः. स्वःस्थः स्थः सुरथाः पुश्शिमात्रः स्वायुधा मरुतो याथना शुभम्.. (२)

O Maruts, possessing strength, swiftness, wisdom, and excellent weapons, you who are well-armed and adorned, proceed with auspiciousness.

हे भक्षण साधनयुक्त, छुरी वाले, मनस्वी, शोभन-धनुष के स्वामी, बाणों वाले, तूणीर वाले, शोभन अश्व एवं रथ वाले मरुतो! तुम लोग शोभन आयुध धारण करो. हे पुश्शिपुत्र मरुतो! तुम हमारे कल्याण के लिए आगमन करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
धनुथ दां पर्वतानदाशुषे वसु नि वो वना जिहते यमनो भिया. कोपायथ पृथिवीं पृश्निमातरः शुभे यद्ग्राः पृश्नीरयुग्घम्.. (३)

The mountains bow down to the giver of wealth, and the forests tremble with fear before the controller. The earth is shaken by the wrath of the mother of the spotted ones, when the spotted ones are yoked together.

हे मरुतो! तुम आकाश में बादलों को इधर-उधर बिखेरो तथा हवि देने वाले यजमान को धन दो. तुम्हारे आने के डर से वन काँपने लगते हैं. हे उग्र एवं पृश्निपुत्र मरुतो! वर्षा द्वारा धरती को विचलित करो. तुम अपने रथ में बुंदकियों वाली घोड़िया जोड़ते हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
वातात्विषो मरुतो वर्षनिणिजो यमाइसु सुदृशः सुपेशसः. पिश्ज्ञाश्ज्ञा अरुणाश्ज्ञा अरेपसः प्रत्यक्षसो महिना धौरिवोखः.. (४)

The Maruts, radiant with strength and swiftness, bring forth the rains, their forms beautiful and full of grace. They are pure, bright, and free from blemish, their glory vast like the heavens.

वात-वेग वाले, वर्षा करने वाले, यम के समान, सुन्दर रूप वाले, सुन्दर वेश वाले, पिंजरे के समान, अरुण वर्ण वाले, निर्दोष, प्रत्यक्ष रूप से महान्, पर्वत के समान (स्थिर) हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
पुरुदस्सा अजिन्नमन्तः सुदानवस्वेषसन्दृशो अनवभराधसः. सुजातासो जनुषा रुक्मवक्षसो दिवो अर्का अमूतं नाम भजिर.. (५)

These radiant, life-giving beings, adorned with golden chests, are born of divine origin, their names are sung from the heavens.

अधिक जल से युक्त, आभूषणों से सुशोभित, शोभन दानशील, दीप्त आकृति वाले, क्षयरहित धन के स्वामी, उत्तम जन्म वाले, जन्म से ही सीने पर सोने का हार धारण करने वाले एवं पूज्य मरुदगण स्वर्ग से आकर अमृत प्राप्त करते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
ऋषयो वो मरुतो अस्योरधि सह ओजो बाहुवो बल हितम्. नृष्णां शीर्षस्वायुधा रेषु वो विश्वा वः श्रीरधि तन्नु पिपिश.. (६)

O Maruts, the strength and vigor of the Asuras are placed in your arms; all your glory adorns your bodies, making you radiant and powerful.

हे मरुतो! तुम्हारे कंधों पर ऋषि नामक आयुध, भुजाओं में शत्रुओं को पराजित करने वाला बल, शीशों पर सुनहरी पगड़ियाँ, रथों में भांति-भांति के अस्त्र-शस्त्र तथा शरीर में शोभा विराजमान है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
गोमदश्ववदवत्सुवीरं चन्द्रवद्राधो मरुतो ददा नः. प्रशस्तिं नः कृणुत रुद्रियासो भक्षीय वोऽवसो दैव्यस्य.. (७)

O Rudra's companions, grant us strength like that of cows, horses, and men, radiance like the moon, and sustenance. Make us renowned, and may we partake of your divine sustenance.

हे मरुतो! तुम हमें गायों, घोड़ों, रथ, उत्तम संतान एवं सोने से युक्त अन्न दो. हे रुद्रपुत्र मरुतो! हमें समृद्ध बनाओ. हम तुम्हारी उत्तम रक्षा प्राप्त करें. (७)

Mandala 1 · Verse 8
हये नरो मरुतो मूळता नस्तुवीमधासो अमृता ऋतज्ञाः. सत्यश्रुतः कवयो युवानो बृहद् गिरयो बृहदक्षमाणाः.. (८)

We praise the swift, life-giving Maruts, who are the root of our existence, immortal, and knowers of cosmic order. They are wise, ever-youthful, with mighty voices and immense strength.

हे नरो, असिमित धन के स्वामी, मरणरहित, जल बरसाने वाले, सत्य के कारण प्रसिद्ध, मेधावी व तरुण मरुतो! तुम बहुत सी स्तुतियों के विषय एवं अधिक वर्षा करने वाले हो. (८)

Mandala 1 · Verse 1
तमुं नूनं तविषीमन्तमेषां स्तुषे गणं मारुतं नव्यसीनाम्। य आश्वृङ्गा अमवद्दहन्त उतेशिश्रे अमृतस्य स्वराजः.. (१)

We praise the mighty Maruts, the new ones, who are the strength of all, who, like the swift, burn with power and are the lords of immortality.

आज हम मरुतों के तेजस्वी, स्तुति योग्य, अत्यंत नवीन, शीघ्रगामी अश्वों वाले, शक्ति की अधिकता के कारण सब जगह पहुँचने वाले, जल के स्वामी एवं प्रभासपत्र गण की स्तुति करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वेषं गणं तवस खादिहस्तं धुनिंव्रतं मायिनं दातिवाम्। मयिभुवो ये अमिनता महित्वा वन्दस्व विप्र तुविराधसो नृ.. (२)

Praise the mighty, the swift-handed, the vow-keeping, the illusion-wielding, the giver, the powerful ones who have conquered with their greatness.

हे होता! तुम दीप्तिशाली, शक्तिसंपन्न, कंकणों से सुशोभित हाथों वाले, सबको कंपित करने वाले, ज्ञानयुक्त एवं धन देने वाले मरुतों की स्तुति करो. सुख देने वाले, असीमित ऐश्वर्यसंपन्न अधिक धन वाले एवं नेता मरुतों की वंदना करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
आ वो यन्तुदावाहोसो अद्य वृष्णि ये विश्वे मरुतो जुनन्ति। अयं यो अग्निंमरुत: समिद्धं एतं जुषध्वं कवयो युवान:.. (३)

O Maruts, you who are mighty and swift, come to us today, for you invigorate all. Worship this well-kindled Agni, O wise and youthful ones.

सब जगह व्याप्त, वर्षा को प्रेरित करने वाले एवं जल को ढोने वाले मरुत् आज हमारे पास आवें. हे मेघावी एवं युवक मरुतो! इस प्रज्वलित अग्नि के द्वारा तुम लोग प्रसन्न बनो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यूयं राजनंमियं जनाय विश्वतचं जनयथा यजत्रा:। युष्मदेति मुष्टिहा बाहुजूतो युष्मत्सद्शो मरुतः सुवीरः.. (४)

O worshippers, you generate the entire world for the king, the people. From you, O Maruts, comes the strong-armed hero, the mighty warrior, who is like you.

हे यज्ञापत्र मरुतों तुम यजमान को ऐसा पुत्र दो जो शत्रुओं को पतित करने वाला व विभु नामक देवता द्वारा निर्मित हो. हे मरुतो! तुमसे प्राप्त होने वाला पुत्र स्वभुजबल से शत्रुनाशक, शत्रुओं पर हाथ उठाने वाला,Agniot अश्वों का स्वामी एवं शोभन शक्ति वाला हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अरा इवेदचरमा अहेव प्रप जायन्ते अकवा महोभि:। पृष्णे: पुत्रा उपमासो रभिष्ठा: स्वया मत्त्या मरुतः सं मिमिष्यु:.. (५)

Like spokes of a wheel, the Maruts, born from the great Rudra, are united in their strength and brilliance, their sons, and their companions.

हे मरुतो! तुम सब रथचक्र के अरों के समान एक साथ ही उत्पन्न हुए हो एवं दिनों के समान एक बराबर हो. पुष्टि के पुत्र उत्कृष्ट हैं एवं तेज से उत्पन्न हुए हैं. तीव्र गति वाले मरुदगण अपनी ही प्रेरणा से भली प्रकार जल बरसाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 1
ईळेऽग्निं स्वस॑न् नमोभिरिह॒ प्रस्तुतं वि॒च य॑त्कृ॒तन् नः । रथैरि॑व प्र॒ भरे॒ वाज॑यृद्धिः प्र॒दक्षि॑णि॒न्नम॑रु॒ताम् स्तोम॑मृध्याम् ॥ (१)

I praise Agni with offerings, who is present and has been made by us. May I increase the praise of the Maruts, who are like chariots, with abundance.

मैं श्यावाश्व ऋषि के स्तोत्रों द्वारा उत्तम रक्षा करने वाले अग्नि की स्तुति करता हूं। अग्नि यहां आकर मेरे यज्ञकर्म को जानें। लोग जिस प्रकार रथों की सहायता से इच्छित स्थान पर पहुंच जाते हैं, उसी प्रकार हम अन्न की अभिलाषा से पूर्ण स्तोत्रों द्वारा अपना अभिमत पूरा करें। हम प्रदक्षिणा द्वारा मरुतों के समूह को बढ़ावें। (१)

Mandala 1 · Verse 2
आ ये तस्थुः पृष॑तीसु श्रु॒तासु रु॒द्रा म॑रुतो॒ रथे॑षु । वना॑ चि॒दग्रा॑ जिहते॒ नि वो॒ भिया॑ पृथि॒वी चि॑द॒जते॒ पर्व॑तश्चि.. (२)

The renowned Maruts, sons of Rudra, who stand firm in their swift chariots, inspire such awe that even the foremost trees tremble, and the earth and mountains bow in fear.

आ ये तस्थुः पृषतीसु श्रुतासु रुद्रा मरुतो रथेपु। वना चिदग्रा जिहते नि वो भिया पृथ्वी चिदजते पर्वतश्चि.. (२)

Mandala 1 · Verse 3
पर्व॑तश्चि॒न्महि॑ वृ॒द्धो बिभ॑य दि॒विश्रु॑त्सानु॒ रेज॑त॒ स्वने॑ वः.. यत्की॑लथ म॒रुत॑ ऋ॒षिम॑न्त॒ आप॑डव॒ सध्र्य॑ञ्चो धवध्वमे.. (३)

O Maruts, you who are mighty and renowned, you shake the heavens with your thunderous roar. As you move together, you are like a mountain, and you inspire awe and reverence.

पर्वतश्चिन्महि वृद्धो बिभय दिवि श्रुत्सानु रेजत स्वने वः। यत्कीलथ मरुत ऋषिमन्त आपडव सध्र्यञ्चो धवध्वमे.. (३)

Mandala 1 · Verse 4
व॒रि॒ष्ठे॑ष्व॒ग्ने हि॑र॒ण्यैर्भिः स्वधा॑भिस्त॒न्वः पि॑पि॒श्रे । श्रि॒ये श्रि॑यांस॒स्त्वसो॒ रथे॑षु॒ सत्रा॑ म॒हांसि॑ चक्रि॒रे॒ त॒नूषु॑.. (४)

O Agni, you have adorned yourself with the most excellent golden splendors and sustenance. With radiant glory, you have achieved greatness in your forms, residing in your chariots.

वरिष्ठेष्वग्ने हिरण्यैर्भिः स्वधाभितन्वः पिपिश्रे। श्रिये श्रियांसस्त्वसो रथेसु सत्रा महांसि चक्रिरे तनुषु.. (४)

Mandala 1 · Verse 5
अ॒ज्ये॑ष्ठासो॒ अक॑निष्ठास॒ एते॒ सं भ्रात॑रो वा॒वृधुः सौ॑भगाय । युवा॑ पि॒ता स्व॑रु॒द्र ए॒षां सु॑दु॒धा पृ॑ष्टिः सु॒दिना॑ म॒रुद्र्यः.. (५)

These are not the eldest or the youngest; they are brothers who have grown together for prosperity. Their father is the radiant Rudra, and their mother is the bountiful Earth, bringing forth good days.

अज्येष्ठासो अकनिष्ठास एते सं भ्रातरो वावृधुः सौभगाय। युवा पिता स्वरुद्र एषां सुदुधा पुष्टिः सुदिना मरुद्र्यः.. (५)

Mandala 1 · Verse 6
य॒दूत॑मे म॒रुतो॒ मध्य॑मे वा॒ यद्वा॑वमे॒ सुभ॑गासो॒ दि॒वि क्षे । अतो॒ नो रु॒द्रा उ॒त वा॒ न्वः स्या॑ग्ने॒ विता॑द्धवि॒षो य॑जा॒म.. (६)

O Maruts, whether you are in the highest, middle, or lowest regions of the sky, or in the heavens, we offer you oblations, O Rudras, and through Agni, we worship you.

यदुतमे मरुतो मध्यमे वा यद्वावमे सुभगासो दिवि क्षे। अतो नो रुद्रा उत वा न्वः स्याग्ने विताद्धविषो यजाम.. (६)

Mandala 1 · Verse 1
दश शता सह तस्थुस्तदेकं देवानां श्रेष्ठं वपुषामपश्यम्.. (१)

The ten hundred (powers) stood together, and I saw the supreme form of the gods.

दश शता सह तस्थुस्तदेकं देवानां श्रेष्ठं वपुषामपश्यम्॥ (१)

Mandala 1 · Verse 2
तत्सु वां मित्रावरुणा महित्वमीमा तपस्थीरभिर्दुदुहे. विश्वः पिन्वथः स्वसरस्य धेना अनु वामेकः पवित्रा वर्तत.. (२)

O Mitra and Varuna, your greatness has been revealed through your austerities, and you nourish all with the waters of the sky.

हे मित्र एवं वरुण! तुम्हारा महत्व इसलिए प्रसिद्ध है कि उसके द्वारा सदा घूमते वाले सूर्य ने वर्षा ऋतु के स्थावर जलों को दुहा था. तुम गतिशील सूर्य की सभी किरणों को चमकीला बनाते हो. तुम्हारा अकेला रथ धीरे-धीरे चले. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अधारयतं पृथ्वीमुत द्यां मित्राजानां वरुणो महोभिः. वर्धयन्तोऽमोधिः पिन्वन्तं गा अव वृष्टिं सृजंतं जीरदानू.. (३)

The mighty Mitra and Varuna, the lords of all, uphold the earth and sky, nourishing all beings and bringing forth life-giving rain.

हे स्तोताओं को राजा बनाने वाले मित्र एवं वरुण! तुम अपने तेजों से धरती-आकाश को धारण किए हो. हे शीघ्र दान करने वाले मित्र व वरुण! तुम औषधियों को विस्तृत करो. गायों की संख्या बढ़ाओ तथा जल बरसाओ. (३)

Mandala 1 · Verse 1
ऋतस्य गोपावधि तिष्ठथो रथं सत्यधर्मणा परमे व्योम्नि. ययत्र मित्रावरुणावथो युवं तस्मै वृष्टिंमध्मातिवन्ते दिवः.. (१)

You two, guardians of cosmic order, stand firm in the chariot of truth and righteousness in the highest heaven. To you, Mitra and Varuna, who uphold this, the heavens bestow abundant rain.

हे जल के रक्षक एवं सत्यधर्म से युक्त मित्र एवं वरुण! तुम विस्तृत आकाश में स्थित अपने रथ में बैठते हो. हे मित्र व वरुण! इस यज्ञ में तुम जिस यजमान की रक्षा करते हो, उसके लिए आकाश से मधुर वर्षा होती है. (१)


Mandala 1 · Verse 2
सम्राजावस्य भुवनस्य राजथो मित्रावरुणा विदथे स्वर्दृशा. वृष्टिं वा राधो अमृतत्वमहे द्यावापृथिवीं वि चरन्ति तन्वः.. (२)

Mitra and Varuna, rulers of this world, shine brightly in the assembly. They bestow rain, wealth, and immortality, and their bodies traverse heaven and earth.

हे स्वर्ग को देखने वाले मित्र एवं वरुण! तुम इस यज्ञ में सुशोभित होकर संसार पर शासन करते हो. हम तुमसे धन, वर्षा एवं स्वर्ग की प्रार्थना करते हैं. तुम्हारी किरणें धरती एवं आकाश में फैलती हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
सम्राजा उग्रा वृषभ दिवसपती पृथ्वीया मित्रावरुणा विचर्षण्ी. चित्रभिरभ्े रूप तिष्ठथो रवं द्यां वर्षयथो असुरस्य माया.. (३)

You, mighty rulers, bulls, lords of the day, and all-pervading Earth, Mitra and Varuna, with your wondrous forms, you sustain the heavens and cause the rain to fall through the power of the divine.

हे परम सुशोभित, उग्र, जल बरसाने वाले, धरती तथा आकाश के स्वामी एवं सबको देखने वाले मित्र व वरुण! तुम सुंदर मेघों के साथ हमारी स्तुति सुनने को आओ एवं मेघ के

Mandala 1 · Verse 4
माया वां मित्रावरुणा दिवि श्रितां सूर्या ज्योतिश्श्रति चित्रमायुधम्. तमभ्रेण वृष्ट्या गृह्णथो दिवि पर्जन्यं द्रप्सं मधुमन्तं ईरते.. (४)

O Mitra and Varuna, you who dwell in the heavens, you seize the cloud-borne, honey-sweet rain, the radiant, life-giving power of Surya.

हे मित्र एवं वरुण! आकाश में यह तुम्हारी माया है, जो शोभन रूप वाले तुम्हारे आयुध के रूप में तेजस्स्वी सूर्य विचरण करता है. तुम बादल और वर्षा द्वारा आकाश में सूर्य की रक्षा करते हो. हे बादल! तुम मित्र एवं वरुण की प्रेरणा से मधुर जल बरसाते हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
रथं युञ्जते मरुतः शुभे सुखं शूरों न मित्रावरुणां गविष्टिषु. रजांसि चित्रा वि चरन्ति तन्वयो दिवः सम्राजां पयसा न उक्षतम्.. (५)

The Maruts harness their chariot for joyful journeys, O Mitra and Varuna, heroes in the quest for light. Your radiant forms traverse the heavens, showering us with abundance.

हे मित्र व वरुण! युद्धार्थी शूर के समान मरुद्गण जलवर्षा करने के लिए तुम्हारी कृपा से सुंदर दारों वाले रथ में घोड़े जोड़ते हैं एवं विभिन्न लोकों में घूमते हैं. हे भली प्रकार सुशोभित मित्र एवं वरुण! तुम मरुतों के साथ हमारे कल्याण के लिए आकाश से वर्षा करो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
वाचं सु मित्रावरुणाविरावर्तीं पर्जन्यश्रिस्त्रां वदति त्विबीमतीम्. अब्रां वसन्त मरुतः सु मायां द्यां वर्षयन्तमरुणामेपरसम्.. (६)

The divine couple Mitra and Varuna speak forth a flowing speech, the splendor of the rain-god, vibrant and full of power. The Maruts, with their divine skill, cause the earth to be watered by the radiant, life-giving rain.

हे मित्र व वरुण! तुम्हारी कृपा से बादल अन्न का साधक, मनोहर एवं तेजस्स्वी गर्जन करता है, मरुद्गण अपनी शोभन यात्रा द्वारा बादलों को ढक लेते हैं. तुम मरुद्गण के साथ आकाश से लाल रंग की तथा दोपهرहित वर्षा करते हो. (६)

Mandala 1 · Verse 7
धर्मणा मित्रावरुणा विपश्रितां वृता रक्षेथे असुर्यं माया. ऋतेन विश्वं भुवनं वि राजथः सूर्यमा धन्थो दिवि चित्रं रधम्.. (७)

You, Mitra and Varuna, are adorned by Dharma and are the protectors of the divine power and illusion. Through cosmic order, you illuminate the universe and place the radiant sun in the heavens.

हे बुद्धि સંપન્ન मित्र व वरुण! तुम वर्षा द्वारा यज्ञ की रक्षा करते हो एवं बादलों की माया के कारण जल के द्वारा सारे संसार को सुशोभित बनाते हो. तुम गतिशील एवं पूज्य सूर्य को आकाश में धारण करो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
यश्चिते स सुकृतर्दवत्रा स ब्रवीतु नः वरुणो यस्य दर्शतो मित्रो ना वनते गिरः.. (८)

He who is aware, let him speak to us of the good deeds that please Varuna, whose sight is so great, and whose words are not turned away.

जो शोभन कर्म वाला स्तोता देवों में श्रेष्ठ तुम दोनों की स्तुति जानता है एवं सुंदर तुम दोनों—मित्र व वरुण—जिसकी स्तुतियों को स्वीकार करते हो, वही हमें स्तुति के विषय में बताये. (८)

Mandala 1 · Verse 9
asāma yathā suṣakhāya ena svabhiṣṭayo narāṁ na śaṁsaiḥ | asad yathā na indro vandaneṣṭhās turo na karma nayamāna ukthā

Mandala 1 · Verse 10
viṣpardhaso narāṁ na śaṁsair asmākāsad indro vajrahastaḥ | mitrāyuvo na pūrpatiṁ suśiṣṭau madhyāyuva upa śikṣanti yajñaiḥ

Mandala 1 · Verse 11
yajño hi ṣmendraṁ kaś cid ṛndhañ juhurāṇaś cin manasā pariyan | tīrthe nācchā tātṛṣāṇam oko dīrgho na sidhram ā kṛṇoty adhvā

Mandala 1 · Verse 12
mo ṣū ṇa indrātra pṛtsu devair asti hi ṣmā te śuṣminn avayāḥ | mahaś cid yasya mīḻhuṣo yavyā haviṣmato maruto vandate gīḥ

Mandala 1 · Verse 13
eṣa stoma indra tubhyam asme etena gātuṁ harivo vido naḥ | ā no vavṛtyāḥ suvitāya deva vidyāmeṣaṁ vṛjanaṁ jīradānum

Mandala 1 · Verse 1
आ चिकितान सुकृतं देवो मतं रिशादसा. वरुणाय ऋतपेशसे दधीत प्रयसे महे.. (१)

May the divine, all-knowing, and powerful Varuna, who upholds cosmic order, accept our righteous deeds and offerings.

हे चतुर! हे सुकृत (सुकृत करने वाले) देव! तुम (हमें) रिशादसा (रक्षा करने वाले) वरुण के लिए प्रयस (प्रयत्न) से दधीत (धारण करो)। (१)

Mandala 1 · Verse 2
अथ व्रतेव मानुषं स्वर्शण धायि दर्शत्.. (२)

Having taken on human form through vows, the divine vision is perceived.

हे मित्र व वरुण! तुम्हारी शक्ति असुर विनाशिनी एवं विरोधरहित है, तुम्हारा महान् बल व्याप्त है, सूर्य जैसे आकाश में दीखता है, वैसे ही तुम अपनी दर्शनीय शक्ति यज्ञ में स्थापित करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
ता वामेषे रस्थानमुर्वी गव्युतिमेषाम्. रातहव्यस्य सुष्टि दधृक्स्तोमैर्मनामह.. (३)

May the vast, life-giving earth, the abode of the swift, be sustained by our praises and offerings, bringing forth abundance.

हे रातहव्य ऋषि की स्तुतियां सुनने वाले मित्र व वरुण! हम इसलिए तुम्हारी स्तुति करते हैं कि तुम दूर तक फैले मार्ग में चलने वाले हमारे रथों की रक्षा के लिए चलते हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अथा हि काव्या युवं द Lastly पूभिर्दृत्ता. नि केतुना जनानां चिकेथे पूतदक्षा.. (४)

You, O divine poets, are the source of all poetic inspiration, illuminating the minds of people with pure wisdom.

हे स्तुतियोग्य, शुद्ध बलसंपन्न एवं मुझ चतुर यजमान की स्तुति से चकित मित्र व वरुण! तुम अनुकूल मन से यजमानों की स्तुति सुनते हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
तदूतं पृथिवि बृहच्छ्रव एष ऋषीणाम्. जयसानावरं पृष्वति क्षरन्ति यामभि.. (५)

This vast, glorious being, the essence of the Rishis, flows forth, bestowing victory and sustenance.

हे धरती! हम ऋषियों की अन्न की अभिलाषा पूरी करने के लिए तुम्हारे ऊपर बहुत सा जल है. गतिशील मित्र व वरुण गमनो द्वारा बहुत सा जल बरसाते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
आ यद्रामीयवक्षसा मित्रं वयं च सूर्यः. व्यचिष्ठे बहुपाप्ये यतेमहि स्वराज्ये.. (६)

May we, with the strength of Rama, and with Mitra and Surya as our allies, strive for self-rule, free from the grip of many sins.

हे दूर तक देखने वाले मित्र व वरुण! हम यजमान एवं स्तोतागण तुम्हारे परम विस्तृत एवं बहुतों से आकृष्ट करने वाले स्वराज्य में पहुँचें. (६)

Mandala 1 · Verse 7
उग्रो वां ककुहो ययिः शुण्ठे यामेषु सन्तनिः. यद्रां दसोऽभिरश्विनात्रिनररावर्तते.. (७)

O Ashvins, you who are fierce, powerful, and swift, you who traverse the heavens and bring forth the dawn, you are the protectors who turn back the darkness.

हे नेता अश्विनीकुमारो! तुम्हारा उग्र, ऊंचा, गतिशील एवं सदा घूमने वाला रथ यज्ञों में प्रसिद्ध है. तुम्हारे रक्षा प्रयत्न द्वारा ही हमारे पिता अग्नि जीवित रहे थे. (७)

Mandala 1 · Verse 8
मध्व ऊ षु मधुयुवा रुद्रा सिषक्ति पिप्युषी. यत्समुद्राति पर्षथः पक्वाः पृक्षो भरन्त वाम्.. (८)

May the sweet, youthful, and nourishing Rudras, who are full of sweetness, carry you across the waters, bringing you abundant nourishment.

हे सोम-रस मिलाने वाले एवं दयालुचित अश्विनीकुमारो! हमारी मधुर रस से भिगोने वाली स्तुति तुम्हारी सेवा करती है. तुम जब अंतरिक्ष के पार चले जाते हो तो हमारे द्वारा प्रदत्त द्रव्य तुम्हारा भरण करता है. (८)

Mandala 1 · Verse 9
सत्यमिद्रा उ अश्विना युवानामाहुर्मयोभुवा. ता याम्यामहमूत्रा यामन्ना मूल्यत्तम.. (९)

Truth is the strength of Indra, and the Ashvins are the youthful, life-giving ones. I will go there, and there I will find the most valuable.

हे अश्विनीकुमारो! प्राचीन लोगों ने जो तुम्हें सुख देने वाला कहा है, वह सत्य है. तुम यज्ञ में बुलाने योग्य एवं सुख देने योग्य बनो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
इमा ब्रह्माणि वर्धनाऽऽभ्यां सन्तु शन्तम. या तक्षाम रथांऽवावोचाम बृह्ममः.. (१०)

May these sacred utterances grow and bring peace. May they be like chariots, carrying us to the highest knowledge.

ये महान् स्तुतियां अश्विनीकुमारों को अतिशय सुख देने वाली हों. बढ़ई जिस प्रकार रथ बनाता है, उसी प्रकार हमने ये महान् स्तुतियां कही हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 1
कृछो देवाअश्विाधा दिवो मनावसु। तच्छृण्वथो वृष्णवसू अश्विर्मा विवासति.. (१)

The divine Ashvins, who are the life-force of heaven, hear our prayers. They are the protectors of wealth, and they bestow their grace upon us.

हे स्तुतिरूपि धन के स्वामी एवं कामवर्षि अश्विनीकुमारो! आज तुम धरती पर स्थित होकर उस स्तुति समूह को सुनो, जिसके द्वारा अग्नि तुम्हारी सेवा करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
कुह त्या कुह नु श्रुता दिवि देवा नासत्या. कस्मिन्ना यतथो जने को वां नदीनां सच.. (२)

Where are you, O Nasatyas, heard of in the heavens? To what people have you gone, and with whom do you travel by the rivers?

वे देव अश्विनीकुमार आज कहां हैं? आज वे स्वर्ग में कहां निवास कर रहे हैं? तुम किस यजमान के पास आते हो? कौन तुम्हारी स्तुतियों का सहायक होगा? (२)

Mandala 1 · Verse 3
कं याथः कं ह गच्छथः कमच्छा युज्जाथ रधम्. कस्य ब्रह्माणि रणयथो वर्य वामुश्मसीये.. (३)

Where are you going? Whom do you seek? With whom do you unite your chariot? For whom do you strive in this world, or in the next?

हे अश्विनीकुमारो! तुम किस यजमान के प्रति गमन करते हो, किसके पास पहुंचते हो एवं जिसके सामने जाने के लिए रथ में घोड़े जोड़ते हो? तुम किसकी स्तुतियों से प्रसन्न होते हो? हम तुम्हें पाने की इच्छा करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
पौरं छिद्युदपुतं पौर पौराय जिन्वथः. यदि गृभ्नीतातये सिंहमिव द्रुहस्पदे.. (४)

Protect the people, O warriors, and nourish them, for you are their strength. If you seize them, you will be like a lion attacking the helpless.

हे पौर द्वारा स्तुत अश्विनीकुमारो! तुम जल बरसाने वाले बादल को पौर ऋषि के पास भेजो. शूर जिस प्रकार गरजते हुए सिंह को मार गिराता है, उसी प्रकार यजकार्य में व्यस्त पौर के निकट तुम बादल को बरसाओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
प्र च्यवानाजुजुरुषो वग्रिमत्कं न मुञ्चथः. युवा यदी कृथः पुनरा काममृण्वे वध.. (५)

You who are young and powerful, do not abandon the one who has fallen or is suffering. If you act with purpose, you will overcome all obstacles and achieve your desires.

तुमने जराजीर्ण च्यवन ऋषि के शरीर से त्याज्य बुढ़ापे को इस प्रकार अलग कर दिया था, जिस प्रकार योद्धा अपना कवच उतार देता है. जब तुमने उन्हें दुबारा युवा बनाया तो उन्होंने वधू द्वारा चाहने योग्य रूप पाया. (५)

Mandala 1 · Verse 6
अस्ति हि वामिह स्तोता स्मसि वां सन्दृशि श्रिये. नू श्रुतं म आ गतमवोभिवार्जिनीवसू.. (६)

We remember you, the praiseworthy, in our sight, for your glory. Now, the renowned, the giver of wealth, has come to us.

हे देव अश्विनीकुमारो! हम तुम्हारे स्तोता तुम्हारे सामने रहें. हे अन्नयुक्त देवो! तुम हमारी पुकार सुनकर रक्षासाधनों सहित आओ. (६)

Mandala 1 · Verse 1
प्रति प्रियतमं रथे वृषणं वसुवाहनम्। स्तोता वामश्विनृषिः स्तोमेन प्रति भूषति माघ्वी मम् श्रुतं हवम्.. (१)

The worshipper adorns you, O Ashvins, with praise, you who are mighty, swift-moving charioteers, and givers of wealth, and I shall hear your gracious call.

हे अश्विनीकुमारो! तुम्हारा स्तोता ऋषि तुम्हारे अतिशय प्रिय, कामवर्शी एवं धन ढोने वाले रथ को स्तुतियों द्वारा सुशोभित करता है. हे मधु-विद्या जानने वाले! तुम हमारी पुकार सुने. (१)

Mandala 1 · Verse 2
मधुविद्या विशारद हो. तुम हमारी पुकार सुनो. (२)

O master of the Madhu knowledge, hear our plea.

हे मधुविद्या के ज्ञाता! तुम हमारी पुकार सुनो।

Mandala 1 · Verse 3
आ नो रत्नानि बिभ्रताऽश्विना गच्छं युयम् । रुद्रा हिरण्यवर्तनीं जुषणा वाजिनोऽश्विनौ । माध्वी मम् श्रुतं हवम्.. (३)

O Ashvins, bearers of precious gifts, come to us with your divine chariot. May the swift Ashvins, with golden paths, be pleased with our invocation.

हे अश्विनीकुमारो! तुम रत्नों को धारण करते हुए हमारे पास आओ। हे स्तुति योग्य, सोने के रथ के स्वामी, अन्नरूपी धन से युक्त एवं मधुविद्या जानने वाले अश्विनीकुमारो! तुम हमारी पुकार सुनो। (३)

Mandala 1 · Verse 4
सुष्ठु वां वृष्पवसू रथे वाण्युव्याहिता । उत वां ककुहो मृगः पृष्ठः कृणोति वापुषो माध्वी मम् श्रुतं हवम्.. (४)

You two, mighty in wealth and chariot, are well-joined. The deer's back adorns your splendor, and my sweet call is heard.

हे धन बरसाने वाले अश्विनीकुमारो! मुझ उत्तम स्तोता की वाणीरूपी स्तुति तुम्हारे लिए बनाई गई है। तुम दोनों को खोजने वाला महान् यजमान तुम्हें द्रव्य प्रदान करता है। हे मधुविद्या जानने वाले अश्विनीकुमारो! तुम मेरी पुकार सुनो। (४)

Mandala 1 · Verse 5
बोधिन्मनसा रथ्येष्ठिरा हवन्श्रुता । विभिश्वानवानमश्विना नि याथो अद्रयाविने माध्वी मम् श्रुतं हवम्.. (५)

O wise ones, you who are praised by hymns, you who are swift like chariots, you who are the Ashvins, you have come to the mountain dweller. Hear my invocation, O sweet ones.

हे ज्ञानयुक्त मन वाले, रथस्वामी, शीघ्र गतिशील एवं आह्वान को जल्दी सुनने वाले अश्विनीकुमारो! तुम अपने घोड़े पर चढ़कर कपटरहित च्यवन ऋषि के समीप पहुँचे थे। हे मधुविद्या जानने वाले अश्विनीकुमारो! तुम मेरी पुकार सुनो। (५)

Mandala 1 · Verse 6
आ वां नरा मनोयुजोऽश्वासः पृषतप्सवः । वयो वहन्तु पीतये सह सुम्नेभिरश्विना माध्वी मम् श्रुतं हवम्.. (६)

O Asvins, you who are swift and strong, may your chariot horses, yoked by thought, carry you swiftly to drink and to our offerings, bringing with them divine blessings.

हे नेता अश्विनीकुमारो! तुम्हारी इच्छा मात्र से रथ में जुड़ने वाले, विचित्र रूप वाले एवं शीघ्र चलने वाले घोड़े तुम्हें ढ़ात-बाट के साथ सोम रस पीने के लिए यहाँ लावें। हे मधुविद्या जानने वाले अश्विनीकुमारो! तुम मेरी पुकार सुनो। (६)

Mandala 1 · Verse 1
प्रातर्यावाणा प्रथमा यजध्वं पुरा गु nádरूपः पिबतः प्रातहि यज्मश्विना दधाते प्र शंसन्ति कवयः पूर्वभाजः.. (१)

Worship the twin dawn-horses in the early morning, before they drink the nectar. The divine Asvins, who receive the morning oblations, are praised by the wise who partake of the first offerings.

हे ऋत्विजों! यज्ञ में प्रातःकाल उपस्थित होने वाले अश्विनिकुमारों का सबसे पहले यजन करो. वे लालची एवं दान न करने वाले राक्षसों से पहले ही सोम पीते हैं. अश्विनिकुमार प्रातःकाल ही यज्ञ धारण करते हैं, इसलिए प्राचीन ऋषिगण उनकी प्रशंसा करते थे. (१)

Mandala 1 · Verse 2
प्रातर्यजश्वमश्विना हिनोत न सायम्अस्ति देवा अजुषम्. उतान्यो असमअजते वि चावः पूर्वः पूर्वो यजमानो वनीयान्.. (२)

O Ashvins, accept our morning oblations, for the evening is not yet fit for the gods. Another worshipper has already attained greatness and abundance through his offerings.

हे ऋत्विजों! तुम प्रातःकाल ही अश्विनिकुमारों की पूजा करो एवं उन्हें द्रव्य दो. संध्याकाल दिया गया हव्य असेव्य होता है, इसलिए देव उसे स्वीकार नहीं करते. हमसे पहले जो भी यज्ञ करता है अथवा सोम से उन्हें तृप्त करता है, वही यजमान देवों का अधिक प्रिय होता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
हिरण्यवत्ऽइङ्मधुवर्णां घृतस्नुः पृक्षो वह्ना रथो वर्तते वाम्. मनोजवा अश्विनो वातरंहा येनातियाथो दुर्मितानि विश्वा.. (३)

Swift as thought, O Ashvins, you travel with the speed of wind, your golden chariot, rich with honey and ghee, carries you beyond all misfortunes.

हे अश्विनिकुमारो! तुम्हारा सोने से मढ़ा हुआ, आकर्षक रंग वाला, जल बरसाने वाला, मन के समान शीघ्रगामी एवं वायु के सदृश चलने वाला रथ अन्न धारण करके आता है. उस रथ द्वारा तुम सभी दुर्गम मार्गों को पार करते हो. (३)


Mandala 1 · Verse 4
यो भूयिष्ठं नासत्याभ्यां विशेषं चनिष्ठं पिप्तो रते विभागे. स तोकमस्य पीपरच्छमीभिरनूधंभासः सदमितुतुर्युत्.. (४)

He who is most closely united with the twin Asvins, and is most dear to them, nourishes them with his offerings, and they, in turn, protect him.

जो यजमान यज्ञ का हव्य विभक्त करते समय अश्विनिकुमारों को अधिक अन्न देता है, वह यज्ञकर्मा द्वारा अपनी संतान का पालन करता है. अग्नि प्रज्वलित रहने पर सदा हिंसा करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
समश्विनोरवसा नूतनेन मयोभुवा सुप्रणीती गमेम. आ नो रयिं वहतमोट वीरानां विश्वन्यमृता सौभाग्यनि.. (५)

May we, with the fresh and joyful aid of the Ashvins, reach a state of excellent guidance. Bring us wealth and heroes, O divine ones, and grant us abundant prosperity.

हे अश्विनीकुमारों की रक्षा एवं शोभन आगमन को प्राप्त करें। हे मरणरहितो! तुम हमें सब संपत्ति, संतान तथा सभी प्रकार का सौभाग्य दो। (५)

Mandala 1 · Verse 1
अश्विनावेह गच्छतं नासत्य मा वि वेनतम्, हंसाविव पततमा सुतां उप.. (१)

Ashvins, Nasatya, come here, fly like swans to the daughter.

हे अश्विनीकुमारो! इस यज में आओ। हे नासत्यो! तुम हमारे प्रति उदासोन मत बनो। हंस जिस प्रकार निर्मल पानी के पास आता है, उसी प्रकार तुम हमारे सोमरस के पास आओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
अश्विना हरिणाविव गौराववानु यवसम्, हंसाविव पततमा सुतां उप.. (२)

Like two swans, they descend, bringing prosperity and nourishment, like the Ashvins bringing the sun.

हे अश्विनीकुमारो! जिस प्रकार हिरण एवं गौरमृग घास तथा हंस साफ पानी के पास आते हैं, उसी प्रकार तुम हमारे सोमरस के पास आओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
अश्विना वाजिनिवसु जुषेथां यज्मभिये, हंसाविव पततमा सुतां उप.. (३)

O Ashvins, possessors of swift steeds and wealth, accept this sacrifice; like swans, descend to the sweet Soma.

हे अन्नप्राप्ति के लिए घर देने वाले अश्विनीकुमारो! हमारी इच्छा पूरी करने के लिए इस यज में आओ. हंस जैसे साफ पानी के पास जाते हैं, वैसे ही तुम हमारे सोमरस के पास आओ. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अत्रिर्यदामवरोड्रन्बीसमजोहवीन्नामानवेव योषा, शयेनस्य चिज्वसा नूतनेनगच्छतम् अश्विना शन्तेमन.. (४)

O Ashvins, you who have come with new strength, may you bring peace to our minds, just as Atri invoked you when he saw the divine couple.

हे अश्विनीकुमारो! हमारे पिता अग्नि ने तुम्हारी स्तुति की, यदि स्त्री की मनुहार की जाए तो वह पति की इच्छा पूर्ण करती है, उसी प्रकार अग्नि ऋषि ने अग्निदाह से छुटकारा पाया. हे अश्विनीकुमारो! तुम अपने सुखदायक रथ द्वारा बाज पक्षी की अद्वितीय चाल द्वारा हमारी रक्षा करने आओ. (४)

Mandala 1 · Verse 5
वि जिहीष्व वनस्पते योनिः सुष्यन्त्वा इव, श्रुतं मे अश्विना हवं सप्तवर्धं च मुञ्चतम्.. (५)

O tree, expand your essence as if a womb is opening; Ashwin gods, hear my call and release the seven-fold growth.

हे लकड़ी के बने संदूक! तुम बच्चा जन्मती नारी की योनि के समान खुल जाओ. हे अश्विनीकुमारो! तुम मुझे सप्तवर्धि ऋषि की पुकार सुनकर इस संदूक से मुझे छुड़ाओ. (५)

Mandala 1 · Verse 1
महे नो अद्य बोधयो राये दिवित्मतः। यथा चिन्नो अबोधयः सत्यश्रवसि वाव्ये सुजाते अश्वसूनृते.. (१)

May the divine light illuminate us today for prosperity, just as it has enlightened us in the past, O truthful and noble one, giver of horses and wealth.

हे दीप्तिशालिनी, शोभन जन्म वाली, स्तुति सुनकर अश्व प्रदान करने वाली एवं सत्य यश वाली उपादेवी! हमें अधिक धन पाने के लिए, जैसे पहले जगाया था, वैसे ही जागृत करो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
या सुनीथे शचीद्रव्ये व्योच्छो दुहितर्दिवः। सा व्युच्छ सहसीयसि सत्यश्रवसि वाव्ये सुजाते अश्वसूनृते.. (२)

O daughter of the sky, who shines with the brilliance of Indra's wife, may you shine forth with strength and truth, O noble one, giver of horses and sustenance.

हे स्वर्ग की पुत्री उषा! तुमने सुद्रव्य के पुत्र सुनीथि का अंधकार भगाया था. हे शक्तिशालीनी, शोभन जन्म वाली एवं अश्वप्रद स्तुतियुक्त उषा! तुम सत्यश्रवा का अंधकार मिटाओ. (२)

Mandala 1 · Verse 3
सा नो अद्याभद्रसुव्युच्छा दुहितर्दिवः। यो व्योच्छः सहसीयसि सत्यश्रवसि वाव्ये सुजाते अश्वसूनृते.. (३)

O radiant daughter of the sky, may you dispel all darkness and misfortune today. May your brilliance, strength, and truth bring us prosperity and well-being.

हे स्वर्ग की पुत्री एवं धन लाने वाली उषाह्देवी! तुम हमारा अंधकार समाप्त करो. हे शक्तिशालिनी, शोभन जन्म वाली एवं अश्वप्रद स्तुतिवाली उषाह्! तुमने व kuyputra सत्यश्रवा का अंधकार मिटाया था. (३)

Mandala 1 · Verse 4
अभि ये त्वा विभावरी स्तोमैर्गुणन्ति वह्यः। मधर्मेधोनि सुश्रियो दामवन्तः सुरातयः सुजाते अश्वसूनृते.. (४)

Those who praise you with hymns, O radiant one, are blessed with abundance and prosperity, O giver of strength and nourishment.

हे प्रकाशवाली एवं धनस्वामिनी उषाह्! जो ऋत्विज् स्तुतियों द्वारा तुम्हारी प्रार्थना करते हैं, वे संपत्तिशाली एवं ऐश्वर्यसंपन्न होते हैं. हे शोभन-जन्म वाली एवं अश्वप्रद स्तुति वाली उषाह्! लोग दानशील बनने को तुम्हें याद करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
यच्चिद्धि ते गणा इमे छदयन्ति मध्यये। परि चिद्वृभ्यो दधुर्ददतो राधो अहयं सुजाते अश्वसूनृते.. (५)

These divine hosts, O noble one, surround you with their grace, bestowing abundant wealth and strength.

हे उषाह्! तुम्हारे जो भक्त धनप्राप्ति के लिए तुम्हारी प्रार्थना कर रहे हैं, वे सब क्षयरहित द्रव्य देने के लिए हमारे अनुकूल बने हैं. हे शोभन जन्म वाली उषाह्! लोग अश्व पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
एषु धा वीरवइश उषो मघोनिसुरिषु। ये नो राधायस्यह्या मघवानो अरासन्त सुजाते अश्वसूनृते.. (६)

O Dawn, bestow upon us abundant wealth and strength, for those who have generously given us riches have indeed been most munificent.

हे धनस्वामिनी उषाह्! इन यजमान स्तोताओं को वीर संतान के साथ अन्न दो. वे धनस्वामी बनकर अक्षय धन देंगे. हे शोभन जन्म वाली उषाह्! लोग अश्व पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 1
नेत्वा स्तेनं यथा रिपुं तपति सूनो अर्चिषा सुजाते अश्वसूते.. (१)

Just as a father, with affection, burns his son with the heat of his own radiance, so too, O noble one, you who possess many horses.

हे स्वर्गपुत्री उषा! तुम प्रकाश फैलाओ. हमारे यजकर्म में आने में विलंब मत करो. राजा जिस प्रकार अपने शत्रु एवं चोर को दुःखी करता है, उसी प्रकार सूर्य तुम्हें ताप न दे. हे शोभन जन्म वाली उषा! लोग अश्व पाने के लिए तुम्हारी स्तुति करते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
एषा जनं दर्शता बोधयन्ती सुगानपथः कृण्वन्ती यात्यग्रे. वृद्धया बृहती विश्वमिन्वाषा ज्योतिरछव्यग्रे अहम्.. (२)

I, the radiant light, lead all beings forward, illuminating the path to liberation and making it easy to traverse.

दर्शनीया उषा सोने वालों को जगाती है एवं मार्गों को सरल बनाती हुई सूर्य के आगे चलती है. विशाल रथ वाली, महान् एवं विश्वव्यापिनी उषा दिवस से पहले ही प्रकाश फैलाती है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
एषा गोभिररुभिर्युजानासेधन्ती रयिमप्राशु चक्रे. पथो दन्ती सुविताय देवी पुरुहृतां विश्ववारां वि भाति.. (३)

The divine mother, adorned with cows and horses, bestows abundant wealth and shines forth, the beloved of all, for the welfare of the world.

दीप्तिशालिनी, बहुतों द्वारा आहूत एवं सबके द्वारा अभिलषित उपादेवी रथ में लाल रंग के बैलों को जोड़कर अन्न-धन को स्थायी करती है. (३)

Mandala 1 · Verse 4
एषा व्येनी भवति द्विबह्मा आविष्टकृष्णानां तन्वं पुरस्तात्. ऋतस्य पन्थामन्वेति साधु प्रजानान्तीव न दिशो मिनाति.. (४)

She, the radiant one, pervades the bodies of those filled with divine knowledge, illuminating the path of righteousness. Understanding, she does not deviate from the directions of truth.

अंतरिक्ष के दो भागों में स्थित यह उज्ज्वल उषा पूर्वी दिशा से अपना शरीर प्रकट कर रही है. वह जगत को अपना ज्ञान कराती हुई सूर्य के मार्ग पर भली प्रकार चल रही है. यह दिशाओं की हिंसा नहीं करती. (४)

Mandala 1 · Verse 5
एषा प्रतीची दुहिता दिवो नन्योषेभद्रा नि रिणीते अप्स्ः । व्यूर्णवती दाशुषे वायोणि पुनज्योर्तियुर्वतिः पूर्व्वाकः.. (५)

The western daughter of the sky, the dawn, shines forth with light, bestowing blessings upon the worshipper.

यह प्रतीची (पश्चिम की ओर जाने वाली) दिवो (द्युलोक की) दुहिता (पुत्री) अप्स्ः (जल) को निरिणीते (फैलाती है)। व्यूर्णवती (सुन्दर) दाशुषे (यज्ञकर्ता को) वायोणि (वायु के समान) पुनज्योर्तियुर्वतिः (पुनः ज्योति से युक्त होकर) पूर्व्वाकः (पूर्व की ओर से आती है)। (५)

Mandala 1 · Verse 6
ni yad yuvethe niyutaḥ sudānū upa svadhābhiḥ sṛjathaḥ puraṁdhim | preṣad veṣad vāto na sūrir ā mahe dade suvrato na vājam

Dawn, like a benevolent woman, reveals herself to us, bestowing wealth upon the sacrificer and ever shining with youthful radiance.

स्वर्ग की पुत्री उषा कल्याण करने वाली नारी के समान हमारे सामने अपना रूप प्रकट करती है, उषा हव्यदाता यजमान को धन देती हुई सदा युवती रहकर प्रकाश बिखेरती है. (६)

Mandala 1 · Verse 7
आ विश्वदेवं सपर्यैः सूक्तेरैंया वृणीमहे. सत्यसवं सवितारम्.. (७)

We choose the All-God, the Truth-Maker, the Illuminator, through hymns and worship.

हम यज्ञकर्ता आज सब देवों के प्रतिनिधि, सज्जनों के पालक एवं सत्य के शासक सविता देव की सेवा करते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
य इमे उभे अहनी पुर एत्युप्रचन्न्. स्वाधीदेवः सविता.. (८)

The divine Sun, Savitr, who precedes both day and night, shines forth with great brilliance.

शोभन-कर्म वाले सविता देव प्रमादरहित होकर रात और दिन दोनों के आगे-आगे चलते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
य इमा विश्वा जातान्याश्रयवति श्लोकेन. प्र च सुवाति सविता.. (९)

The Sun, who sustains all these beings, also causes them to move and flourish.

सविता देव सभी प्राणियों को अपनी स्तुति सुनाते हैं एवं उन्हें प्रेरणा देते हैं. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अवर्षीर्विभमुद ष् गृभयाकर्धन्वान्येत्यतवा उ. अजीजन औषधीभोंजनय कमुत प्रजाभ्योऽविदो मनीषाम्.. (१०)

The wise have brought forth nourishment from the earth and from plants, bestowing it upon all beings.

हे पर्जन्य! तुमने जल बरसाया, अब जल रोक लो, तुमने सूखे स्थानों को जलपूर्ण कर दिया है, जिन्हें बचाकर चलना पड़ता है, तुमने प्रजाओं के भोजन के लिए औषधियाँ एवं जल उत्पन्न किया, इस कारण तुम्हें उनकी स्तुतियाँ प्राप्त हुईँ। (१०)


Mandala 1 · Verse 1
बळित्वा पर्वतानां खिद्रं बिभर्षि पृथिवि. प्र या भूभिं प्रवर्तति महा जिनोपि महि.. (१)

You bear the strength of mountains, O Earth, and the essence of the sky. You are the foundation upon which all beings move and thrive.

हे महती एवं शक्तिशाली पृथ्वी! तुम सभी प्राणियों को प्रसन्न करती हो एवं धारण करती हो। (१)

Mandala 1 · Verse 2
स्तोमासस्त्वा विचारिणि प्रति ष्ोभन्त्यकुभिः प्र या वाजन न हेषन्तं पेरुमस्यस्यजुनि.. (२)

O Unwavering One, praises rise to You, like waves, with their pure sounds. They surge towards You, O Nourisher, like horses rushing towards their master.

हे विचरण करने वाली पृथ्वी! स्तोता गतिशील स्तोत्रों से तुम्हारी प्रशंसा करते हैं, हे श्वेत रंग वाली! तुम घोड़े के समान गरजनें वाले बादल को दूर फेंकती हो। (२)

Mandala 1 · Verse 3
दृढ्हा चिदा वनस्पतीन्क्ष्मया दर्भ्यौजासा. विद्युतो दिवो वर्षन्ति वृष्यः.. (३)

The strong, pure waters, like lightning from the heavens, descend with life-giving power.

हे पृथ्वी! तुम्हारे बादल जब चमकते हुए जल बरसाते हैं, तब तुम अपनी शक्ति द्वारा वनस्पतियों को धारण करती हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
उन्निं भूमिं पृथिवीमुत द्यां यदा दुग्धं वरुणो वृष्यदित्। सभ्रेण वसत पर्वतासस्तविष्यन्तः श्रयन्त वीरा... (४)

When Varuna, the cosmic orderer, nourishes the earth and sky, the mountains stand firm and strong, supporting the heroes.

वरुण जब वर्षारूपी दूध की अभिलाषा करते हैं तो वे धरती, अंतरिक्ष एवं स्वर्ग को गीला करते हैं. पर्वत बादलों द्वारा घेर लिए जाते हैं एवं शक्तिशाली मरुत् बादलों को शिथिल करते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
इमाम् ष्वासुरस्य श्रुतस्य महीं मायाँ वरुणस्य प्र वोचम्। मानेनैव तस्थिवाँ अन्तरिक्षे वि यो ममे पृथिवीं सूर्यो.. (५)

I shall declare the great, divine illusion of Varuna, the mighty and renowned. He who measured the earth and the sky, and established them in the firmament.

हम वरुण की असुरघातिनी माया का वर्णन करते हैं. वरुण ने अंतरिक्ष में रहकर सूर्य के द्वारा धरती-आकाश को इस प्रकार नापा है, जैसे कोई डंडे से नापता है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
इमाम् नु कविततमस्य मायाँ महीं देवस्य नकिरा दर्ष। एक यदुदना न पूणन्त्येनीरासिञ्चन्तीरवनयः समुद्रम्.. (६)

The great illusion of this divine being, the most excellent poet, is such that no one can truly perceive it. Even the rivers, though they flow ceaselessly, cannot fill the ocean.

अत्यंत मेघावी वरुणदेव की स्तुति का कोई विरोध नहीं कर सकता. जलपूर्ण अनेक नदियाँ अकेले सागर को नहीं भर पातीं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अर्थयं वरुण मित्रं वा सखायं वा सदमिद् भ्रातरं वा। वेशं वा नित्यं वरुणार्ण वा यत्सीमागकृमा शिश्नथस्त.. (७)

Whether we have sought Varuna as a friend, companion, or brother, or have entered his abode, may he forgive our transgressions.

हे वरुण! दान देने वाले, मित्र, सखा, भ्राता, पड़ोसी एवं गुंगो के प्रति किए गए हमारे अपराध को नष्ट करो. (७)

Mandala 1 · Verse 8
सर्वा ता वि ष्य शिथिरैव देवाधा ते स्याम वरुण प्रियासः..(८)

May we be dear to you, O Varuna, and may all our bonds be loosened.

हे वरुण! बेईमान जुआरी जिस प्रकार जानबूझ कर अपराध करता है, उसी प्रकार हमने जानकर या अनजाने में जो पाप किया है, उसे तुम पके फलों के समान हमसे दूर करो। हे वरुण! हम तुम्हारे प्रिय बनें। (८)

Mandala 1 · Verse 9
गन्ता नो यज्ञं यजिशियाः सुशमि श्रोता हवमरक्ष एवयामरुत्. ज्येष्ठासो न पर्वतासो व्योम्नि यूयं तस्य प्रचेतसः स्यात् दुर्दंर्वावो निदः.. (९)

May the wise, the performers of sacrifice, the listeners to prayers, and the protectors of the divine, who are mighty and radiant in the heavens, be our leaders and guides.

हे यज्ञपात्र मरुतो! तुम हमारे यज्ञ को पूर्ण करने हेतु यहां आओ. हे विझरहित मरुतो! तुम एवयामरुत् की पुकार सुनो. हे उत्तम धन संपन्न मरुतो! तुम अत्यंत विशाल पर्वत के समान अन्तरिक्ष में रहकर निंदकों को वश में करो. (९)

Mandala 1 · Verse 1
त्वं ह्यग्ने प्रथमो मनोज्ञास्या धियो अभवो दस्म होता. त्वं सीं वृष्क्रणोदृग्घरीतुं संहो विश्वमै सहसे सहै.. (१)

You, O Agni, are the first and most delightful of thoughts, the divine priest. You are the powerful one who sustains all, the one who conquers all with strength.

हे अग्नि! तुम्ही देवों में श्रेष्ठ हो. उनका मन तुमसे संबद्ध है. हे दर्शनीय! तुम ही इस यज्ञ में देवों को बुलाने वाले हो. हे कामवर्शी! सभी शत्रुओं को पराजित करने के लिए तुम हमें अद्वितीय शक्ति दो. (१)


Mandala 1 · Verse 2
अथा होता न्यसीदो यजीयानिळस्पद् इषयनीडः सन्. तं त्वा नरः प्रथं देवयन्तो महो राये चिन्त्यन्तो अनु गन्.. (२)

The priest, worthy of sacrifice, sits in his place, the abode of nourishment. The men, seeking the divine, follow you, the first, for great prosperity.

हे अतिशय यज्ञपात्र व होता अग्नि! तुम द्रव्य ग्रहण करके प्रशंसनीय बनते हुए यज्ञवेदी पर बैठो. देव बनने की कामना करते हुए ऋत्विज् आदि विशाल धन पाने के लिए तुझ देवोत्तम अग्नि का अनुगमन करते हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वृतेव यन्तं बहुभिरवस्यैः स्वे रयिं जागृवांसो अनु गन्. रूशन्तमग्निं દર્શતં બ્રહ્મન્તં વપાવાન્તં વિશ્વહા દીદિવાંસમ્.. (૩)

The vigilant ones follow the radiant, all-pervading, ever-shining Agni, who is the source of wealth and sustenance.

हे दीप्तिशाली, दर्शनीय, महान्, हव्य के स्वामी, सभी कालों में प्रकाशयुक्त एवं वसुओं के मार्ग से गमन करने वाले अग्नि! धन के अभिलाषी यजमान तुम्हारा अनुगमन करते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
पद देवस्य नमसा व्यन्तः श्रवस्यवः श्रव आपृणमकृम्. नामानि विद्धिघिरे यज्यानि भद्रायां ते रणयन्त सन्दृष्टौ.. (४)

With devotion to the divine, we have attained glory and filled ourselves with its essence. Knowing the sacred names, we rejoice in the auspicious sight of the divine.

अन्न चाहने वाले यजमान स्तुतियों के साथ अग्नि के स्थान में जाकर दूसरों द्वारा बाधारहित धन पाते हैं. हे अग्नि! तुम्हारा दर्शन हो जाने पर वे तुम्हारी स्तुतियों में आनंद पाते हैं एवं तुम्हारे यज्ञसबंधी नामों को बोलते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्वा वर्धन्ति क्षित्यः पृथिव्यां त्वां राय उभयासो जनानाम्. त्वां त्राता तरणे चेत्यो भूः पिता माता सदमिन्मातुषणाणाम्.. (५)

You grow on Earth, and you are the wealth of all people. You are the protector, the rescuer, the one to be worshipped, the father, the mother, and the source of nourishment for all.

हे पृथ्वी के रक्षक! तुम सबके लिए धन हो. तुम सबके रक्षक हो. तुम सबके लिए पिता, माता एवं सब प्रकार के पोषण के हेतु हो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
सपर्योणः स प्रियो विश्वग्निर्निहोता मन्त्रो नि भसादा यजीयान्. तं त्वा वयं दम आ दीदिवांसमुप शुबाधो नमसा सदेम.. (६)

We approach you, the radiant and beloved, the all-pervading fire, the invoked priest, with reverence and devotion, to dwell with you in our home.

हे विश्वग्नि! तुम पूजनीय, प्रिय हो और मन्त्रों से युक्त हो। हम तुम्हें नम्रतापूर्वक, दीप्तिमान् अग्नि के पास बैठकर, यज्ञ के लिए प्राप्त करते हैं। (५)

Mandala 1 · Verse 7
तं त्वा वयं सुधियो नव्यमग्ने सुम्नायव ईमहे देवयन्तः. त्वं विशो अनयो दीघानो दिवो अग्ने बहुता रोच. (७)

O Agni, we, with pure minds and devotion, invoke you for your blessings. You, the radiant one, lead all beings and illuminate the heavens.

हे अग्नि! हम बुद्धिमान्, कल्याण चाहने वाले, देवों की इच्छा करने वाले, तुम्हें सुख के लिए प्राप्त करते हैं। हे अग्नि! तुम प्रकाशमान होकर, दीप्तिमान् होकर, बहुतों के लिए प्रकाशमान होते हो। (७)

Mandala 1 · Verse 8
विशां कवि विशपतिं शश्रुतीनां नितोशं वृषभं चर्षणोनाम्. प्रेतीष्णिभिरष्यन्तं पावकं राजतमग्निं यजतं रयीणाम्.. (८)

The radiant Agni, purifier and lord of sacrifices, is the poet of the people, the protector of all beings, and the bestower of wealth.

हे कवि! हे विशों के स्वामी! हे शक्तियों के स्वामी! हे मनुष्यों के वृषभ! हे पावक! तुम राजत (चांदी जैसे) अग्नि हो, जो यज्ञों में धन प्राप्त करने के लिए पूजे जाते हो। (९)

Mandala 1 · Verse 1
त्वं हि क्षैतवघ्‌ओग्ने मित्रो न पतयसे। त्वं विचर्षणे श्रवो वसो पुष्टिं न पुष्यसि.. (१)

You, O Agni, are the friend of the righteous, never falling. You, O brilliant one, bestow glory and nourishment.

हे अग्नि! तुम सुखी लकड़ियों से युक्त हव्य पर मित्र के समान टूटते हो. हे सबको विशेषरूप से देखने वाले एवं धनस्वामी अग्नि! हमारे अन्न और पुष्टि को बढ़ाओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
त्वां हि ष्मा चर्षणयो यज्ञेभिरभिरीळते। त्वां वाजी यात्यवको राजस्तूविश्र्वचर्षणिः.. (२)

You are indeed worshipped by men through sacrifices. The swift horse, the king, and all-seeing beings are drawn to you.

Mandala 1 · Verse 3
हे यज्ञ का संकेत करने वाले अग्नि! परस्पर प्रेम रखने वाले ऋत्विज तुम्हें प्रज्वलित करते हैं. मनु के वंशज यजमान सुख पाने की इच्छा से तुम्हें यज्ञ में बुलाते हैं. (३)

O Agni, people worship you with sacrifices and praises. Protected from harm, the sun, giver of rain, approaches you. Men, with devotion, offer oblations to you, the beacon of sacrifice, in their sacred rites.

हे अग्नि! प्रजाजन यजसाधन, इव्यों एवं स्तुतियों द्वारा तुम्हारी सेवा करते हैं. हिंसकों से सुरक्षित, वर्षारूपी जल के प्रेरक एवं सर्वदृष्टा सूर्य तुम्हारे समीप जाते हैं. (२) सजोष्षत्वा दिवो नरो यजस्य केतुमिन्चते. यद्व स्थ मानुषो जनः सुमायुर्जुह्वे अध्वरे.. (३)

Mandala 1 · Verse 4
ऋधघ्‌अस्ते सुदानवे धिया मर्तः शशमते. ऊती ष बृहतो दिवो द्विषो अंहो न तरति.. (४)

By the grace of the great divine, the mortal, with wisdom and generosity, overcomes hatred and distress.

हे शोभनदानशील अग्नि! जो मरणधर्मा यजमान यज्ञकर्ता बनकर तुम्हारी स्तुति करता है, वह संपतिशाली बने. हे दीप्त एवं महान अग्नि! तुम्हारे द्वारा रक्षित यजमान भयानक पाप के समान शत्रुओं पर आक्रमण करता है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
समिधा यस्त आहुतिं निशिभिर् मत्त्यो नशत्. वयावन्तं स पुष्यति क्षयमनं शतायुषम्.. (५)

By offering oblations with fuel and by performing sacrifices, a mortal attains a long life, full of strength and sustenance.

हे अग्नि! जो मनुष्य हमारी मंत्र्युक्त आहुति को समिधाओं द्वारा विस्तृत करता है, वह सौ वर्ष तक पुत्र-पौत्र युक्त गृह को पाता है. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वेष्ते धूम श्रण्वति दिवि ष्ष्छ्क आततः: सृरो न हि ध्रुता त्वं कृपां पावक रोचसे.. (६)

You are the blazing fire, heard in the heavens, whose light is spread. For you are not moved by anything, O purifier, and you shine with grace.

हे दीप्तिशाली अग्नि! तुम्हारा निर्मल धुआं अंतरिक्ष में विस्तृत होकर बादल के रूप में चलता है. हे पवित्रकर्ता अग्नि! तुम स्तुतियां सुनकर सूर्य के समान दीप्ति युक्त होते हो. (६)

Mandala 1 · Verse 1
अग्ने स क्षेष्डतपा ऋतेजा उरु ज्योतिर्नशते देवयुटे। यं त्वं मित्रोण वरुणः सजोषा देव पासि मर्तमं:..(१)

O Agni, you are the radiant one, the powerful, the light that expands, the one who is worshipped by those who seek the divine. You, along with Mitra and Varuna, protect the mortal who is devoted to you.

हे अग्नि! यज्ञपालनकर्ता एवं यज्ञ के हेतु जन्म देने वाला यजमान चिरकाल जीवित रहे एवं देवाभिलाषी बनकर तुम्हारी विशाल ज्योति धारण करे. हे अग्नि देव! तुम मित्र एवं वरुण के साथ मिलकर तेज द्वारा पाप से उसकी रक्षा करते हो. (१)

Mandala 1 · Verse 2
ईजे यज्ञेभिः शशमे शमीभिंद्रद्वारायायनये द्वादश. एवा चन तं यशसामजुष्टिर्नाहो मतं नशते न प्रदृष्टिः.. (२)

He who worships with sacrifices and offerings, and through the twelve gates of Indra's realm, his glory is never diminished by envy, nor by the gaze of the envious.

समृद्ध धन वाले अग्नि को हव्य देने वाला यजमान समस्त यज्ञों में सफल एवं चांगुणादि व्रतों द्वारा शांत बनाता है, यशस्वी संतान से रहित नहीं होता तथा पाप व घमंड से दूर रहता है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
सृरो न यस्य दृशतिररेपा भीमा यदेति शुचतस्त आ धीः। हेषस्वत्तः शरुधो नायमत्कोः कुत्रा चिद्रणवो वसतिवनेजाः.. (३)

The divine vision of the formidable one, whose purity is unblemished, inspires profound thoughts. He is the swift, powerful, and unassailable one, who dwells in no fixed place, yet pervades all.

हे सूर्यतुल्य एवं पापरहित दर्शन वाले अग्नि! तुम्हारी भयानक ज्वालाएँ सभी जगह जाती हैं. रात्रि में रंभाती हुई गाय के समान विस्तृत, सबके निवास एवं वन में उत्पन्न अग्नि बहुत कम स्थानों में रमणीय होते हैं. (३)

Mandala 1 · Verse 4
तिग्मं चिदेम महि वर्पो अस्य भसदक्षो न यमसान असा. विजेहमानः परशुर्न जिह्वां द्रविर्न द्रायवति दारु धक्षत्. (४)

The sharp, luminous consciousness of the Divine Being, like a blazing fire, consumes all that is perishable. Like a sharp axe, it cuts through falsehood, and like a swift river, it carries away all impurities.

अग्नि का मार्ग तीक्ष्ण एवं रूप परम दीप्तिशाली है. वे घोड़ों के समान मुख से घास आदि भक्षण करते हैं. वे फरसे के समान काठ पर अपनी जीभ चलाते हैं एवं सोने को गलाते हुए सुनार के समान पिछला देते हैं. (४)

Mandala 1 · Verse 5
स इदृतेव प्रति धादसिष्यज्जिछ्शीत तेजोऽयसो न धाराम्, चित्रघञ्जरितरत्त्यो अत्कोवेर्न द्रुष्द्वा रुधृपत्मजंहाः...(५)

He who is like the sun, whose brilliance is like the edge of a sword, and whose strength is like that of a lion, is the protector of the universe.

अग्नि बाण फंकने वाले के समान अपनी ज्वालाएँ आगे बढ़ाते हैं एवं फरसे की धार के समान तेज करते हैं. वे विचित्र गति एवं पैर सिकोड़कर रात में वृक्ष पर निवास करने वाले पक्षी के समान रात बिताते हैं. (५)

Mandala 1 · Verse 6
स ई र्भमो न प्रति वस्त उसाः शोचिषा ररपीति मित्रमइाः. नत्कं य ईमरुषो यो दिबा नृमत्यों अरुषो यो दिबा नृन्.. (६)

He, the radiant one, does not dwell with the dawn, but shines forth with his brilliance. He is the mighty one, who, like the sun, illuminates all beings.

अग्नि स्तुतियोग्य सूर्य के समान तेजस्वि किरणें फैलाते हैं, सबके अनुकूल प्रकाश बढ़ाते हुए अपने तेज से शब्द करते हैं एवं रात में प्रकाशित होकर लोगों को दिन के समान अपने-अपने काम में लगा देते हैं. तेजस्वि एवं मरणरहित अग्नि दिन में देवों के प्रति अपनी किरणें भेजते हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 1
प्र न्यसा सहसः सूनुमच्छा यज्ञेन गातुम् इच्छमानः. वृद्धंनं कृष्णामं रश्नन्तं वीती होतारं दिव्वं जिगाति.. (१)

Seeking the path through sacrifice, the intelligent one approaches the mighty son of strength. He finds the radiant, dark, and praised divine priest, the invoker.

अन्न का इच्छुक स्तोता स्तुति योग्य एवं बलपुत्र अग्नि के समीप नवीन यज्ञ के सहित जाता है. अग्नि वन नष्ट करने वाले, काले मार्ग वाले, श्वेतवर्ण, यजयुक्त, होता एवं दिव्य हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स श्चितानस्तन्य रोचनस्था अजरेभिर्निनादद्विर्विविधः. यः पावकः पुरतणः पूष्णिष्यग्निमनुयति भर्वन्.. (२)

He who is the radiant, ever-youthful, and all-pervading light, the purifying fire, moves forward, bringing forth diverse brilliance.

जो अग्नि पवित्र करने वाले, अतिशय महान् हैं एवं मोटी लकड़ियों को खाते हुए चलते हैं, वे श्वेतवर्ण, शब्द करने वाले, अंतरीक्ष में स्थित, जरारहित एवं बार-बार गर्जने वाले मरुतों से युक्त तथा अतिशय युवा हैं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वि ते विश्ववाजुतासो अग्ने भामासः शुचे शुच्यश्रन्ति. तुविप्रक्षासो दिव्वा नवग्वा वना वन्नन्ति धृषता रुजन्तः.. (३)

O Agni, your brilliant flames, all-consuming and pure, fiercely consume the forests, powerful and ever-renewing.

Mandala 1 · Verse 4
ये ते शुक्रस्यः शुचयः क्षां वपन्ति विष्टितासो अझः। अथ भृमस्त उर्ध्विया वि भाति यातमयानो अधि सानु पृष्ठेः.. (४)

The pure, bright waters, spread across the earth, ascend upwards, shining brilliantly upon the mountain peaks.

हे दीप्तिशाली अग्नि! तुम्हारी तेजपूर्ण ज्वालाएँ धरती से घास-रूपाी बालों को मूड़ती हैं एवं स्वच्छंद घोड़ों के समान इधर-उधर जाती हैं। इस समय तुम्हारी भ्रमणशील ज्वालाएँ नानारूप वाली धरती के पर्वत पर चढ़ती हुई विशेषरूप से शोभा पाती हैं। (४)


Mandala 1 · Verse 5
अथ जिह्वा पापतिप्रि वृष्णो गोषुधो नाशनिः सृजाना. शूरस्यैव प्रसितिः क्षातिरग्नेर्दुर्वर्त्ममो दयते वनानि.. (५)

The tongue, a divine instrument, when wielded with strength, destroys obstacles and illuminates the path, just as Agni's brilliance dispels darkness and clears the way through forests.

जैसे चुराई गई गायों के लिए लड़ने वाले इंद्र का वज्र बार-बार चलता था, उसी प्रकार कामवर्शी अग्नि की ज्वालाएँ निकलती हैं। वीरों की दृढ़ता के समान असह्य अग्नि की भयानक ज्वालाएँ वनों को जलाती हैं। (५)

Mandala 1 · Verse 6
आ भानुना पार्थिवानि ज्यायांसि महस्तोदस्य धृषता ततन्थ. स बाधस्वप्र भवा सहोभिः स्पृधो वनुष्यन्वनुष्पो नि जूर्व.. (६)

By the sun's brilliance, the great earthly powers are stretched forth with boldness. May you overcome all rivalries and conquer the adversaries.

हे अग्नि! तुम अपनी दीप्त ज्वालाओं से धरती के सब गंतव्य स्थानों पर अधिकार करो, भयंकर आपत्तियों को रोको, अपने तेज से स्पर्धा करने वालों की हिंसा करो एवं शत्रुओं का नाश करो। (६)

Mandala 1 · Verse 7
स चित्रं चित्रं चिन्त्यन्तमस्मे चित्रक्षत्रं चित्रतमं वयोथाम्. चन्द्रं रयिं पुरवीरं बृहन्तं चन्द्रं चद्राभिर्गुणते युक्व.. (७)

This radiant, most radiant, and all-pervading power, the source of strength and sustenance, is praised with luminous qualities.

हे विचित्र एवं आकर्षक शक्ति वाले तथा आनंदकारी अग्नि! हम प्रसनताकारक स्तुतियों वालों को तुम विचित्र, अद्वितीय यश देने वाला, अन्न धारण करने वाला एवं संतान से युक्त धन प्रदान करो। (७)

Mandala 1 · Verse 8
मूधनिं दिवो अरतिं पृथिव्या वैश्वानरभूत आ जात मग्निम्. कविं सम्राजमतिथिं जनानांमासन्ना पात्रं जनयन्त देवाः.. (८)

The gods brought forth Agni, the universal fire, born from the sky and earth, the guest and king of all beings, the most worthy vessel.

स्तोताओं ने स्वर्ग के शीश तुल्य, धरती पर चलने वाले, सभी जनों से संबंधित, यज्ञ के निमित्त उत्पन्न, मेघावी, तेजस्वी, यजमानों के यज्ञ के लिए सतत गमनशील, मुख तुल्य एवं रक्षक अग्नि को उत्पन्न किया। (८)

Mandala 1 · Verse 9
त्वं होता मन्द्रतमो नो अधुगन्त्देवो विदथा मर्त्येषु. पावकाया जुहृाग् वहिरासाग्ने यजस्व तन्वं त्वं स्वाम्.. (९)

O Agni, you are the divine priest, the most gentle, who brings us offerings. You are the god who knows all mortals; therefore, with pure offerings and a welcoming seat, worship yourself with your own body.

हे होता! मन्त्रों से युक्त, मनुष्यों में प्रिय, पावक अग्नि! तुम अपने शरीर से यज्ञ करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
तं सुप्रतीकं सुदृशं स्वय्यमविद्वांसो विदुष्टरं सपेम. स यक्षदविभ्ना वयुनानि विद्ान्प्र हव्यमग्निर्ममेषु वोचत्.. (१०)

May we worship Him, the well-formed, the radiant, whom the ignorant know less than the wise. He, the knowing Agni, bestows gifts and reveals knowledge, speaking forth our offerings.

हम अल्प बुद्धि वाले लोग तुझ अतिशय विद्वान्, शोभन अंग वाले, देखने में सुंदर एवं उत्तम गति वाले अग्नि की सेवा करते हैं. सबको जानने वाले अग्नि अमर देवों को हमारा हव्य बतावें एवं देवों का यजन करें. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
यज्ञस्य वा निशिंतिं वोदितिं वा تمितृणक्षि शसोत राया.. (११)

Whether you offer sacrifice by night or by day, it is all for the sake of the King.

हे शूर एवं क्रांतदर्शी अग्नि! तुम उस व्यक्ति की रक्षा करते हो एवं अभिलाषाएं पूर्ण करते हो, जो तुम्हारी स्तुति करता है, जो यज्ञासाधन द्रव्य का संस्कार करता है अथवा उसे उत्तम बनाता है, तुम उस व्यक्ति को बल संपन्न करके धनों से पूर्ण करते हो. (११)

Mandala 1 · Verse 1
त्वमग्ने यज्ञानां होता विश्वेषां हितः. देवेभिरभिनु * जने.. (१)

O Agni, you are the priest of all sacrifices, the well-wisher of all, invoked by the gods.

हे अग्नि! तुम समस्त यज्ञों को पूर्ण करने वाले हो. देवों ने मानवों प्रजाओं में तुम्हें होता बनाया है. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स नो मन्द्राभिरधरे जिह्वाभिरिर्याजा महः। आ देवान् वन्क्षि यक्ष्चि व.. (२)

May the tongue, with its sweet hymns, invoke the great ones, bringing the gods and the divine.

हे अग्नि! तुम प्रसन्नता देने वाली ज्वालाओं द्वारा हमारे यज्ञ में देवों का यजन करो. तुम देवों को यहां लाओ एवं उन्हें हव्य दो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
वेत्था हि वेधो अध्वनः पथश्च देवाऽज्जासा. अग्ने यजेषु सुकृतो.. (३)

O Agni, you know the paths of the universe and the ways of the gods. You are the bestower of rewards for righteous deeds in sacrifices.

हे यज्ञविधाता एवं शोभनयज्ञकर्मयुक्त अग्नि! तुम यज्ञ में देवों के छोटे एवं बड़े मार्गों को शीघ्रता से जानते हो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
ईजे यजेषु यजिम्.. (४)

He who worships the Worshipper in sacrifices, sacrifices himself.

हे अग्नि! भरत ने सुख पाने के लिए ऋत्विजों के साथ मिलकर तुम्हारी स्तुति की थी एवं तुझ यज्ञयोग्य अग्नि का हव्यात्रों द्वारा यजन किया था. (४)

Mandala 1 · Verse 5
त्वमिमा वार्या पुरू दिवोदासास्य सुन्वते. भरद्वाजाय दाशुषे.. (५)

You, O Indra, are the bestower of abundant boons, and you accept the offerings of those who perform sacrifices, like Divodasa and Bharadvaja.

हे अग्नि! तुमने सोम.रस निचोड़ने वाले दिवोदास को जिस प्रकार उत्तम धन अधिक मात्रा में दिए थे, उसी प्रकार हव्य देने वाले मुझ भरद्वाज को दो. (५)

Mandala 1 · Verse 6
त्वं दूतो अमर्त्य आ वहा देव्यं जनम्. शृण्वन्निप्रस्य सुश्रुतिम्.. (६)

You are the immortal messenger, bringing the divine people. Hear the excellent hearing of the singer.

हे मरणरहित एवं देवदूत अग्नि! तुम मेघावी भरद्वाज की शोभन स्तुति को सुनते हुए इस यज्ञ में देवों को लाओ. (६)

Mandala 1 · Verse 7
त्वामग्ने स्वाध्यो३ मतार्सो देववीतये. यजेषु देवमीळते.. (७)

O Agni, the wise and devoted praise you, the divine one, for the sustenance of the gods and for the sacrifices.

हे अग्नि देव! शोभन चिंतन वाले मनुष्य देवों को प्रसन्न करने के हेतु यज्ञों में तुम्हारी स्तुति करते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
तव प्र यश्चि सन्दृशमुत कृणुं सुदानवः. विश्वे जुषन्त कामिनः.. (८)

O generous one, you create a beautiful and pleasing form, which all beings desire.

हे अग्नि! हम सब दानशील यजमान तुम्हारे दर्शनीय तेज की पूजा तथा सेवा करते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
त्वं होता मनुहितो वह्निरासा विदुष्टरः. अग्ने यश्चि दिवो विशः.. (९)

You are the invoked priest, the divine fire, the most knowing, O Agni, who pervades the heavens and the people.

हे ज्वालाओं द्वारा हव्य वहन करने वाले एवं उत्तम विद्वान् अग्नि! मनु ने तुम्हें यज्ञ का होता नियुक्त किया है. तुम देवों का यजन करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अन आ याहि वीतये गृणानो हव्यदात्.य. नि होता सप्ति बहिषि.. (१०)

Come, O Agni, to our invocation and offering, you who are the priest of sacrifice, seated on the sacred grass.

हे अग्नि! देवों को हव्य देने के लिए तुम्हारी स्तुति की जा रही है. तुम हव्य भक्षण के लिए आओ एवं बिछे हुए कुशों पर बैठो. (१०)


Mandala 1 · Verse 11
तं त्वा समिद्भिरिङ्ग्रो घृतेन वर्धयामस. बृहच्छोचा यविष्ठ्य.. (११)

We nourish you, O Agni, with fuel and ghee, you who are radiant and ever-youthful.

हे अगारूप अग्नि! हम समिधाओं एवं घृत द्वारा तुम्हें बढ़ाते हैं. हे अतिशय युवा अग्नि! तुम अधिक दीप्त बनो. (११)

Mandala 1 · Verse 1
पिबा सोममभि यमुग्रं तर्हं ऊर्ध्वं गव्यं महिं गुणान इन्द्र. वि यो धृष्नो वधिषो वज्रहस्त विश्वा वृत्रममित्रिया शवोभिः.. (१)

Drink the potent Soma, O Indra, and with your mighty, thunderbolt-wielding arms, slay all enemies and the Vrātra.

हे उग्र इंद्र! तुमने अंगिरागोत्रीय ऋषियों की स्तुति सुनकर जिस सोम रस के उद्देश्य से पणियों द्वारा चुराई गई गायों को खोजा था, उस सोम रस को पियो. हे हाथ में वज्रधारण करने वाले एवं शत्रुनाशक इंद्र! तुमने अपनी शक्तियों द्वारा सभी शत्रुओं को मारा था. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स ई पाहि य ऋजीषी तरुत्रो यः शित्रवान् वृष्भे यो मतीनाम्. यो गोत्रभिद्रग्भृद्यो हरिःसः स इन्द्र चित्रां अभि तृन्धि वाजान्.. (२)

He protects us, the strong, the destroyer of foes, the giver of gifts, the mighty one, the lord of thoughts. He, the thunderbolt-wielder, the golden one, Indra, may you shatter all abundance for us.

हे सोमलता का फोक धारण करने वाले इंद्र! तुम शत्रुओं से रक्षा करने वाले, सुंदर थोड़ी वाले एवं स्तोताओं की इच्छा पूरी करने वाले हो. हे इंद्र! तुम पर्वतों के भेदक, वज्रधारी एवं घोड़ों को रथ में जोड़ने वाले हो. तुम अपना विचित्र अन्न हम पर प्रकट करो. (२)

Mandala 1 · Verse 3
एवा पाहि प्रत्नथा मन्दन्तु त्वा श्रुधि ब्रह्म वावधस्वोत गीर्भिः. आविः सूर्यं कृणुहि पीपिहीषो जहि शूरुभिं गा इन्द्र तृन्धि.. (३)

O Indra, drink the Soma, be gladdened by the hymns, and be strengthened by our praises. Reveal the sun, satisfy your hunger, and slay the enemies with your might.

हे इंद्र! प्राचीन काल के समान ही हमारा सोम पियो. सोम तुम्हें प्रसन्न करें तुम हमारी स्तुतियों को सुनकर बढ़ो. तुम सूर्य को प्रकट करो. हमें अन्न प्राप्त कराओ, शत्रुओं को नष्ट करो एवं पणियों द्वारा चुराई गई गाएं खोजो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
ते त्वा मदां बृहदिन्द्र स्वधाव इमे पीता उक्ष्यन्त घुमन्तम्. महामनूनं तवसं विभूतिं मत्सरसो जहृषन्त प्रसाहम्.. (४)

They, O Indra, the mighty and self-sustaining, having drunk these Soma juices, rejoice in your greatness, your power, and your abundant strength.

हे अन्न के स्वामी इंद्र! पिया हुआ सोम रस तुझ तेजस्वी को बहुत प्रसन्न करे एवं सींच दे. तुम महान् सर्वगुणसंपन्न विभूतियुक्त एवं शत्रुपराजयकारी हो. (४)

Mandala 1 · Verse 5
येभिः सूर्यमुपस मन्दसानोवासयोऽप दृढानि दर्. महामद्रि परि गा इन्द्र सन्तं नृत्या अच्युतं सदसः परि स्वात्.. (५)

By whom the sun is approached, the firm ones are made to tremble, and the unshakeable is made to dance around the assembly, O Indra, may we be protected.

हे इंद्र! जिस सोम से प्रसन्न होकर तुमने गाढ़े अंधकार को नष्ट करते हुए सूर्य एवं उषा को अपने-अपने स्थान पर स्थापित किया तथा उस पर्वत के टुकड़े कर दिए जो पणियों द्वारा

Mandala 1 · Verse 6
और्णार्दुर उसियाभ्यो वि दृढोदूर्दगा असृजो अङ्गिरस्वान्. (६)

The divine weaver, strong and unyielding, has created the radiant Angiras.

तव कृत्वा तव तदसनाभिरामासु पक्व शच्या नि दीधः। और्णार्दुर उसियाभ्यो वि दृढोदूर्दगा असृजो अङ्गिरस्वान्. (६)

Mandala 1 · Verse 7
पप्राथ क्षां म Ис दंसो व्युश्मीमुप घामृष्वो वृहदिन्द्र स्तभायः। अधारयो रोदसी देवपुत्रे मात्र यही ऋतस्य.. (७)

Indra, the mighty, upholds the earth and sky, the two divine children, supporting the cosmic order.

हे महान् इन्द्र! तुमने अपने महान् कर्म द्वारा धरती को विशेष रूप से पूर्ण बनाया है, विस्तृत आकाश को स्थिर किया है एवं देवों के माता-पितास्वरूप धरती-आकाश को धारण किया है. धरती-आकाश अति प्राचीन एवं उदक के जन्मदाता हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
अथ त्वा विश्वे पुर इन्द्र देवा एकं तवसं दधिरे भराय. अदेवो यदभ्यहिष्ट देवान्त्वर्षिता वृणत इन्द्रम.. (८)

The gods, recognizing Indra's supreme strength, have placed him in the forefront. When the non-divine attacked the gods, the wise chose Indra.

जब वृत्र असुर ने संग्राम के लिए देवों को ललकारा तो उन्होंने तुम्हें ही अपने आगे चलने वाला बनाया. हे बलवान् इन्द्र! मरुतों के युद्ध में भी तुम्हें वरन किया गया था. (८)

Mandala 1 · Verse 9
अथ घृष्णिते अप सा नु वज्रादद्धितानमृक्षयसा स्वस्य मन्योः। अहिं यदिन्द्रो अभ्यहोसानं नि चिछिश्वायः शयथे जघान.. (९)

When Indra, with his thunderbolt, struck the serpent, he shattered its strength and killed it, just as one might crush a stone.

हे अधिक अन्न के स्वामी इन्द्र! जब तुमने आक्रमणकारी वृत्र को धरती पर सोने के लिए मार डाला था, तब तुम्हारे क्रोध एवं वज़्र से आकाश भी काँप गया था (९)

Mandala 1 · Verse 10
अथ त्वष्टा ते मह उग्र वज्र सहस्रभृष्टिं वृवृतच्छताश्रिम्। निकाममरमणंसेन येन नवन्तमहि सं पिणग्जीभिन.. (१०)

Then Tvastr, the divine craftsman, forged for you, O Indra, a mighty thunderbolt, thousand-edged and hundred-pointed. With this, you crushed the ninety-nine Vrtra-like demons.

हे उग्र इन्द्र! त्वष्टा ने तुम्हारे लिए हजार धार एवं सौ टुकड़ों वाला वज्र बनाया था. हे सोमलता का नीरस अंश ग्रहण करने वाले इन्द्र! तुमने उस वज्र द्वारा निश्चित अभिलाषा वाले शत्रुओं से भिड़ने को उतावले एवं गर्जन करते हुए वृत्र को पीस डाला था. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
वर्धन्त्यं विश्वे मरुतः सजोषाः पचच्छतं महर्षि इन्द्रं तुभ्यम्. पूषा विष्णूसीणि सरांसि धावन्वृत्रहणं मदिर्मशुस्मै.. (११)

The divine winds, united and joyful, praise Indra, the great sacrificer. Pushan and Vishnu, with their radiant energies, flow through the waters, bringing forth the intoxicating Soma, the slayer of Vritra.

Mandala 1 · Verse 1
तमु ष्टिहि यो अभिमभ्त्जोआ वन्वनवात्तः पुरुहूत इन्द्रः, अषाळहमुग्रं सहमानमाभिर्भिर्धर्धं वृष्भं चर्ष्णीनाम्.. (१)

Indra, the invoked, the mighty and unconquerable, who is the sustainer of all beings, is the powerful bull of men.

हे भरद्वाज ऋषि! उस इंद्र की स्तुति करो जो शत्रुओं को पराजित करने वाले, तेज से युक्त, शत्रुहिसंक, अपराजित एवं बहुतों द्वारा बुलाए गए हैं. तुम इन स्तुतिवचनों द्वारा अपराजित, ओजस्वी, शत्रुनाशक एवं प्रजाओं की इच्छा पूर्ण करने वाले इंद्र को बढ़ाओ. (१)

Mandala 1 · Verse 2
स युध्मः सत्वा खजकृत्समद्रा तुविमप्रक्षो नदनुमाँ ऋजीषी, बृहद्रणृश्यवनो मानुषीणामेकः कृषीणामभवत्सहवा.. (२)

He, the mighty warrior, the destroyer of enemies, the swift, the powerful, the strong, the righteous, the one who bestows strength, the protector of all beings, became the sole leader of humanity.

इन्द्र! योद्धृन्, दाता, धूल उडाने वाले, यजमानों के साथ प्रसन्न, वर्षा द्वारा बहुतों को प्रसन्न करने वाले, गर्जनयुक्त, तीनों सवर्णों में सोम पीने वाले, युद्धकर्ता प्रमुख एवं मनु की सभी प्रजाओं के रक्षक हैं. (२)


Mandala 1 · Verse 3
त्वं ह नु त्यददमायो दस्यु रैकः कृषी रणोरायैः । अस्ति स्विन्नु वीर्यं ? तत इन्द्र न स्वदिस्तं तदुत्वा वि वोचः.. (३)

O Indra, you are the sole, powerful, and fearless enemy of the wicked. Do you possess the strength? If so, declare it, for it is worthy of praise.

हे प्रसिद्ध इंद्र! तुम यज्ञकर्मरहित लोगों को शीघ्र वश में करो. एकमात्र तुम्ही ने यज्ञकर्ताओं को पुत्र, वासादि दिए हैं. तुम में वह शक्ति अब है या नहीं. समय-समय पर तुम शक्ति को प्रकट करो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
सदृद्धि ते तुविजात्यस्य मन्ये सहः सहिष्ठ तुरस्तुरस्य । उग्रमुग्रस्य तवसस्तवीयोऽद्रस्य रघुरो बभूव.. (४)

He who is mighty among the mighty, swift among the swift, and fierce among the fierce, has become the most powerful and swift, the most vigorous and strong.

हे शक्तिशाली इंद्र! बहुत से यज्ञों में प्रकट होने वाले एवं हमारे शत्रुओं की हिंसा करने वाले तुम में अधिक बल है, ऐसा मैं मानता हूं. तुम्हारा बल उग्र शत्रुओं द्वारा वश में न होने वाला एवं शत्रुओं को वश में करने वाला है. (४)

Mandala 1 · Verse 5
तन्त्रं: प्रत्नं सख्युमस्तु युष्मे इत्था वदद्वृद्धवलमडगि रोभिः । हन्नव्युच्चुदस्मेष्यन्तमृणोः पुरो वि दुरो अस्य विश्वाः.. (५)

May this ancient wisdom, like a steadfast friend, strengthen you with its profound truths. May it dispel all obstacles and open the doors to your highest potential.

हे दृढ़ पर्वतों को गिराने वाले एवं दर्शनीय इंद्र! तुम्हारे साथ हमारी मित्रता चिरकाल तक रहे. तुमने स्तुतिकर्ता अंगिरागोत्रीय ऋषियों के ऊपर शस्त्र चलाने वाले बल नामक असुर को मारा एवं उसके सभी नगरों तथा उनके द्वारों को नष्ट कर दिया. (५)

Mandala 1 · Verse 6
स हि धीभिर्ह्व्यो अस्तुग्र ईशनकृणमहति वृत्रयैः । स तोकसाता तनये स वज्री वितन्तसाव्यो अभवत्स मस्तु.. (६)

He, the powerful, is invoked by the wise, the sustainer of all, the wielder of the thunderbolt, who grants abundant progeny and protection.

हे ओजस्वी एवं स्तोताओं को समर्थ बनाने वाले इंद्र! तुम महान् संग्राम में स्तोताओं द्वारा बुलाए जाते हो. पुत्र एवं पौत्र प्राप्ति के लिए बुलाए जाने वाले वज्रधारी इंद्र विशेषरूप से वंदनीय हैं. (६)

Mandala 1 · Verse 7
स मज्जनां जनिमं माणुषाणममर्त्यं नाम्नाति प्र सर्से. स घुम्मेन श्वासोत राया स वीर्येण नृतमः समोकाः.. (७)

He who is not immersed in the divine, nor born of mortal men, nor known by name, nor praised, nor honored with wealth and strength, is truly alone.

इंद्र ने अपने अविनाशी एवं शत्रुओं को झुकाने वाले बल से मानवसमूहों पर अधिकार पाया है. इंद्र यश, बल, धन एवं वीर्य से नेताओं में श्रेष्ठ तथा साथ निवास करने वाले बनते हैं. (७)

Mandala 1 · Verse 8
वृत्राण्यपि शम्बरं शुष्णामिन्द्रं: पुरां च्यौत्नाय शयथाय नृ चित्.. (८)

Indra, the mighty warrior, shattered the fortresses of Vritra, Shambara, and Sushna, bringing them to ruin and slumber.

वे इन्द्र युद्ध में कभी कर्तव्य विमुख नहीं होते एवं मिथ्या वस्तुओं को जन्म नहीं देते. प्रसिद्ध नाम वाले इंद्र ने चुमुंरि, पिपु, शंबर, शुष्ण एवं धुनि नामक राक्षसों को मारा है. वे उनके नगरों को गिराने एवं उन शत्रुओं को मारने के लिए शीघ्र काम करते हैं. (८)

Mandala 1 · Verse 9
उदावत्ता त्वक्षसा प्यन्सा च वृत्रहत्याय रथमिन्द्र तिष्ठ. धिष्ष्व वज्रं हस्त आ दक्षिणत्राभि प्र मन्द पुरूद्रा माया:.. (९)

Indra, stand ready with your chariot, swift and strong, for the slaying of Vritra. Grip your thunderbolt firmly, and with your might, crush the illusions of the enemy.

हे उन्नतशील एवं शत्रुनाशक बल से युक्त इंद्र! तुम वृत्र को मारने के लिए रथ पर बैठो एवं अपने दाहिने हाथ में वज्र धारण करो. हे विशाल धन के स्वामी इंद्र! तुम असुरों की माया को समाप्त करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
अग्निर्नं शुष्कं वनमिन्द्र हेती रक्षो नि धक्ष्यशर्निं भीमा. गम्भीय ऋष्वया यो रुरोजाध्यानयदुदरिता दम्भयच्च.. (१०)

Indra, like fire consuming dry wood, destroys the fierce Rakshasas. He, the mighty and profound, tears them asunder and crushes them.

हे वज्र के समान भयानक इंद्र! अग्नि जिस प्रकार सूखे वन को जला देती है, उसी प्रकार तुम अपने वज्र से राक्षसों को जलाओ. इंद्र ने अपराजित एवं महान् वज्र द्वारा शत्रुओं को नष्ट किया. संग्राम में गर्जन करने वाले इंद्र शत्रुओं का भेदन करते हैं. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
आ सहस्रं पथिभिरिन्द्र राया तुविद्युम्न तुविवाजेभिरर्क्क्. याहि सूनो सहसो यस्य नृ चिददेव ईशे पुरुहू यतो:.. (११)

O Indra, possessor of great wealth and abundant sustenance, come with your thousand paths, O son of mighty strength, whom even the godless cannot control, O you who are invoked by many.

हे बहुधनसंपन्न, बल के पुत्र एवं बहुतों द्वारा पुकारे गए इंद्र! कोई भी असुर तुम्हें बल रहित नहीं कर सकता. तुम धनयुक्त होकर हजारों सवारियों द्वारा शीघ्र हमारे सामने आओ. (११)

Mandala 1 · Verse 1
महाँ इन्द्रो नवदा चर्षणप्रा उत द्विबहर्‌अमिनः सहोभिः। अस्मद्रयग्वावृधे वीर्यायोरुः सुकृतं कर्तृभर्‌तू.. (१)

The great Indra, the protector of all beings, with his manifold powers, grants strength and protection to us, the doers of good deeds.

महाँ इन्द्रो नवदा चर्षणप्रा उत द्विबहर्‌अमिनः सहोभिः। अस्मद्रयग्वावृधे वीर्यायोरुः सुकृतं कर्तृभर्‌तू.. (१) जैसे राजा मनुष्यों की कामना पूर्ण करता है, उसी प्रकार स्तोताओं की इच्छा पूरी करने वाले इन्द्र आवें. दोनों लोकों में पराक्रम दिखाने वाले एवं शत्रुओं द्वारा अपराजित इन्द्र हमारे सामने वीरता के कार्यों के लिए बढ़ते हैं. विस्तृत शरीर एवं गुणों वाले इन्द्र को यजमान भली प्रकार जानते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
इन्द्रमेव धिषणा सातये धाद्बृहन्तममजरं युवानम्। अषाळहेन शवसा शृशुवांसं सहस्रिष्ठो वावृधे असामि.. (२)

May intellect, the giver of strength, lead us to the mighty, immortal, youthful Indra. He, who is invincible and ever-growing, is the most powerful.

इन्द्रमेव धिषणा सातये धाद्बृहन्तममजरं युवानम्। अषाळहेन शवसा शृशुवांसं सहस्रिष्ठो वावृधे असामि.. (२) हमारी स्तुति दान के निमित्त महान्, गमनशील, युवा एवं शत्रुओं द्वारा अपराजित बल से उन्नत इन्द्र को प्राप्त होती है. इंद्र उत्पन्न होते ही अधिक मात्रा में बढ़ गए थे. (२)

Mandala 1 · Verse 3
पृथुं करस्ना बहुला गभस्ती असमद्रयक्स्ं मिमीहि श्रवांसि। यूथेव पश्वः पशुपो दमुना अस्माँ इन्द्राभ्या वृत्त्वावाजै.. (३)

O Indra, you who are mighty and all-pervading, you measure out vast glories, like a herdsman tending his cattle, and with your strength, you bestow abundant wealth.

पृथुं करस्ना बहुला गभस्ती असमद्रयक्स्ं मिमीहि श्रवांसि। यूथेव पश्वः पशुपो दमुना अस्माँ इन्द्राभ्या वृत्त्वावाजै.. (३) हे शांत मन वाले इन्द्र! तुम अन्न देने के लिए अपने विस्तीर्ण, कार्यकुशल एवं अधिक देने वाले हाथों को हमारे सामने करो. जिस प्रकार ग्वाला पशुओं के समूह को हांकता है, उसी प्रकार तुम युद्ध में हमारा संचालन करो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
शतेरपन्नणय इन्द्रात्र दशोणये कवयेऽर्कसाती. वधैः षण्णशष्पस्य मायाः पित्त्वो नारिरचीत्किं चन प्र.. (४)

Indra, the lord of gods, with his hundred powers, and the poet, with his thousand rays, have not created even a speck of dust.

हे इंद्र! बहुत अन्न देने वाले एवं মেধवी कुत्स से युद्ध करने वाले सौ सेनाओं के साथ पणि तुम्हारी सहायता के कारण भाग गए. इंद्र ने समस्त शक्तियों वाले वृषण असुर के कपटों को समाप्त करके उसका सभी अन्न छीन लिया. (४)

Mandala 1 · Verse 5
महौ दृहो अप विश्वायु धयि वज्रस्य यत्पतने पादि षण्णः. उषं स रथं सारथये करिन्र्दः कृत्साय सूर्यस्य साती.. (५)

May the mighty, strong, and life-sustaining Vajra, when it falls, protect us. May Surya, the sun, grant us his chariot and his swiftness.

वृषण असुर जब वज्र लगने से धरती पर गिरा, तब उसकी सब शक्ति नष्ट हो गई. इंद्र ने सूर्य को प्राप्त करने के निमित्त अपने सारथि कुत्स द्वारा रथ आगे बढ़वाया. (५)

Mandala 1 · Verse 6
प्र श्नो न मदिंरशंश्मै शिरो दासस्य नमुचेर्मथायन्. प्रावचमीं साप्पं ससन्तं पण्णयाया समिषा स स्वस्ति.. (६)

May the divine strength that shattered Namuchi's head and brought forth the intoxicating Soma, now grant us protection and well-being with its essence.

गरुड़ इंद्र के लिए नशीला सोम लाए. इंद्र ने भी उपद्रवी नमुचि का शिर मथ डाला एवं स्य के पुत्र निमि नामक ऋषि की सोते समय प्राण रक्षा की. साथ ही उसे धन, अन्न एवं कल्याणों से युक्त किया. (६)

Mandala 1 · Verse 7
वि पिप्रोरहिमायस्य दृढ्हाः पुरो वज्रिच्छवसा न दर्दः. सुदामन्त्द्रक्णो अप्रमृष्यजिश्ने दात्रं दाशुषे दा.. (७)

The mighty Indra, with his thunderbolt, has shattered the fortresses of the enemy, bringing victory to the worshipper.

हे वज्रधारी इंद्र! तुमने अधिक माया वाले पिपृ असुर के दृढ़ नगरों को अपने बल द्वारा तोड़ा था. हे शोभन दान वाले इंद्र! तुमने हव्य देने वाले ऋजिश्वा नामक राजा को बाधारहित धन दिया था. (७)


Mandala 1 · Verse 8
स वेतसुं दशमायं दशोणिं तूतुजिमिन्द्रः स्वभिष्टिसुमनः. आ तुग्रं शष्दिभं घोतनाय मातर्नं सीमुप सृजा इयधै.. (८)

Indra, the swift and powerful, brings forth the ten-fold, the ten-limbed, the victorious, the one who delights in his own will. O Mother, bring forth the strong and the swift, that we may be filled.

Mandala 1 · Verse 1
इमा उ त्वा पुरूतम्स्य कारोह्यं वीर हव्या हवन्ते । धियो रथेभामजरं नवीयो रयिर्विभूतिरयतो वचस्या.. (१)

O mighty hero, the people call upon you, the most generous, with offerings. They invoke you, the ageless and ever-new, the source of wealth and inspiration, with their prayers.

हे शूर इंद्र! अधिक यज्ञकर्म की अभिलाषा करने वाले भरद्वाज नामक स्तोता की प्रशंसनीय स्तुतियाँ तुझ बुलाने योग्य को बुलाती हैं. हे रथ में बैठे हुए, जरारहित एवं अतिशय नवीन इंद्र! श्रेष्ठ विभूतियां हव्यान्त्र के रूप में तुम्हें प्राप्त होती हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
तमु स्तुष इन्द्र यो विदानो गिरहसं गीर्भिर्ऋत्वृद्धम् । यस्म दिवमति महा पृथिव्याः पुरुषायस्य रिरिचे महित्वम्.. (२)

Praise Indra, the knowing one, whose greatness, like the vast sky and earth, is immeasurable and ever-increasing through hymns.

हम उन इंद्र की स्तुति करते हैं जो सब कुछ जानते हैं, स्तुतियों द्वारा पाने योग्य हैं एवं यज्ञों द्वारा उन्नत हुए हैं. परम बुद्धिमान् इंद्र की महत्ता धरती और आकाश से भी अधिक है. (२)

Mandala 1 · Verse 3
स इत्मोऽवयुं ततत्वस्येण वयुनच्चच्चार । कदा ते मर्ता अमूतस्य धाय्यक्षन्तो न मिनन्ति स्वधावः.. (३)

He, the Self, is the impeller of all, the source of knowledge and action. Mortals, by their actions, perceive and sustain this boundless Being.

इंद्र ने ही ज्ञाननाशक एवं वृत्र द्वारा विस्तृत अंधकार को सूर्य के द्वारा प्रकाशवान् बनाया है. हे बलशाली एवं मरणरहित इंद्र! तुम्हारे स्वर्ग के उद्देश्य से यज्ञ करने के इच्छुक लोग किसी की हिंसा नहीं करते. (३)

Mandala 1 · Verse 4
यस्ता चकार स कुछ स्वदिन्द्रः कमा जनं चरति कासु विष्ठु. कस्ते यज्ञो मनसे शं वराय को अर्क् इन्द्र कतमः स होता.. (४)

Who is this, O Indra, who has made this, and what people does he move among? What sacrifice is pleasing to the mind, and what hymn is the priest?

जिस इंद्र ने प्रसिद्ध कर्म किए हैं वे कहां हैं, किन लोगों के बीच घूमते हैं एवं किस दिशा में स्थित हैं? इंद्र! कौन सा यत्र तुम्हारे मन को सुख देता है? कौन सा मंत्र तुम्हारा वरण करता है? तुम्हें वरण करने वाला होता कौन सा है? (४)

Mandala 1 · Verse 5
इदा हि ते वेविषत: पुराजा: प्रत्नास आसु: पुरुकूतसखायः. ये मध्यमास उत नूतनास उतावमस्य पुरुहूत बोधि.. (५)

O greatly invoked one, those ancient ones, your companions, were indeed powerful and wise. Grant us understanding, both of those who came before and those who are now.

ये मध्यमास उत् नूतनास उतावमस्य पुरुहूत बोधि.. (५)

Mandala 1 · Verse 6
तं पृच्छन्तोऽवरास: पराणि प्रत्ना त इन्द्र श्रुत्यानु येमु:. अर्चमसि वीर ब्रह्मवाहो यादव विद्म तान्त्वा महान्तम्.. (६)

Seeking you, the lesser ones have approached, O Indra, having heard of your greatness. We know you, the mighty hero, the best of Brahmins, to be the greatest.

त पृच्छन्तोऽवरास: पराणि प्रत्ना त इन्द्र श्रुत्यानु येमु:. अर्चमसि वीर ब्रह्मवाहो यादव विद्म तान्त्वा महान्तम्.. (६)

Mandala 1 · Verse 7
अभि त्वा पाजो रक्षसो वि तस्थे महि ज्ञानमभि तत्सु तिष्ठ. तव प्रत्नेन युज्येन सख्या वज्रेण धृष्नो अप ता नुदस्व.. (७)

O mighty one, your great knowledge has been revealed, and it stands firm. With your ancient, potent friendship and thunderbolt, forcefully drive away the demons.

हे इंद्र! राक्षसों की सेना तुम्हारे सामने खड़ी होती है. तुम भी उस महान् एवं उन्नत सेना के सामने डट जाओ. हे शत्रु पराभवकारी इंद्र! तुम प्राचीन, साथ रखने योग्य एवं नित्य-सहायक वज्र द्वारा उन्हें दूर भगाओ. (७)

Mandala 1 · Verse 8
स तु श्रुधीन्द्र नूतनस्य ब्राह्मण्यो वीर कारुधायः. त्वं ह्य ऽ ऽ पिः प्रदिदि पितृणां शृद्ध्दभभ सुहव एतै.. (८)

O Indra, listen to the praise of the new Brahman, the heroic and bountiful one. You are indeed the fire for the ancestors, invoked with these hymns.

हे स्तोताओं के रक्षक एवं वीर इंद्र! आधुनिक एवं स्तुति करने के इच्छुक हम लोगों के वचनों को तुम सुनो. तुम्ही यज्ञ में सुंदर आह्वान सुनकर अंगिरागोत्रीय ऋषियों के चिरकाल बंधु बने थे. (८)


Mandala 1 · Verse 1
य एक इन्द्र इडव्यश्रृणीनामिन्द्रं तं गीर्भिभिरभ्यर्च आभिः। यः पतत्ये वृष्भो वृषयायावन्त्यस्यः सत्वा पुरुषायः सहस्वान्.. (१)

He who is the one Indra, the best among the strong, is worshipped with these hymns. He is the powerful bull, the mighty one, whose strength is immense and who is the protector of men.

जो एकमात्र इन्द्र प्रजाओं द्वारा विपत्तियों में बुलाने योग्य हैं, जो स्तोताओं की पुकार सुनकर दौड़े आते हैं, जो कामवर्शी, शक्तिशाली, सत्यभाशी, शत्रुनाशक, विशाल बुद्धि वाले एवं शत्रुपराभवी हैं, उन्हें हम इन स्तुतियों द्वारा बुलाते हैं. (१)

Mandala 1 · Verse 2
तमु नः पूर्व पितरो नवग्वाः सप्त विप्रामो अभि वाजयन्तः। नक्षद्भिं ततुर्ये पर्वतेऽशमद्रोघवाचं मतिभिः शविष्ठम्.. (२)

The ancient sages, with their wisdom and devotion, invoked the powerful deity, who resides on the mountain, with their hymns and prayers.

नौ महीने वाला यज करने वाले, बुद्धिमान् हमारे सप्त अंगिरा आदि पूर्व पुरुषों ने आक्रमणकारी शत्रुओं का दमन करने वाले, गतिसंपन्न, अतिक्रमणहीन आदेश वाले तथा पर्वतों पर स्थित इन्द्र को अन्न का स्वामी बनाकर स्तुतियां कीं. (२)

Mandala 1 · Verse 3
तमीमह इन्द्रमस्य रायः पुरुवीरस्य नृवतः पुरुषोः। योऽस्कृधोयुर्जरः स्वर्णात्मा भरि हरि वो मादयध्व.. (३)

O Indra, the giver of wealth, the strong and heroic, may you delight us with your abundant riches.

हम इन्द्र से बहुत पुत्र-पौत्रों सहित, अनेक सेवकों सहित, विविध पशुओं से युक्त, सदा रहने वाला, नाशरहित एवं सुख देने वाला धन मांगते हैं. हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी इन्द्र! तुम हमारे सुख के लिए हमें वह धन दो. (३)

Mandala 1 · Verse 4
तन्नो वि वोचो यदि ते पुरा चिज्जजरितार आनशुः सुम्नमिन्द्र. कस्ते भागः किं वयो दुग्ध खिद्रः पुरूहूत पुरुषसोऽसुरघ्नः.. (४)

O Indra, have your ancient worshippers attained your favour? What is your share, and what sustenance do you receive, O greatly invoked, powerful slayer of demons?

हे इन्द्र! तुम्हारे पुराने स्तोताओं ने जिस सुख को प्राप्त किया था, उसे हमें भी बताओ. हे दुर्धर शत्रुओं को दुःख देने वाले बहुतों द्वारा बुलाए हुए, असुरनाशक एवं अधिक संपत्ति वाले इन्द्र! तुम्हारे लिए कौन सा भाग एवं द्रव्य निश्चित किया गया है? (४)

Mandala 1 · Verse 5
तं पृच्छन्ती वज्रहस्तं रथेष्ठामिन्द्रं वेपी वक्रवरी यस्य नू गीः। तुविग्राभं तुविकर्मि र्भमोदां गातुमिषे नक्षते तुग्रमच्छ.. (५)

Seeking the thunderbolt-wielding Indra, who rides in his chariot, the singer praises him, the mighty, the powerful in action, who grants sustenance and strength.

यजकर्म करने वाले एवं गुणवर्णनयुक्त वाणी वाले यजमान वज्रधारी, रथ पर बैठने वाले, अनेक यज्ञां को स्वीकार करने वाले एवं अनेक यज्ञों के करने हेतु शक्ति देने वाले इन्द्र की पूजा

Mandala 1 · Verse 6
अया ह त्वं मायाया वावृधानां मनोजुवा स्वजवः पर्वतेन. अच्युता चिद्धिष्ठिता खञ्जो रुजो वि दृढा धृष्टता विरन्शिन्.. (६)

O Mother, you are the ever-expanding, mind-swift, self-powered Maya, who resides in the mountains. You are the unshakeable, the one who dispels illness and firmly establishes strength.

हे स्वयं शक्तिशाली इंद्र! तुमने मन में समान गतिशील व अनेक धारों वाले वज्र द्वारा माया के सहारे बढ़ने वाले वृत्र को नष्ट किया. हे शोभन-तेज वाले एवं महान् इंद्र! तुमने उसी तेजस्वी वज्र द्वारा विनाशरहित, दृढ़ एवं अशिशिल शत्रुन्गरियों को तोड़ा. (६)

Mandala 1 · Verse 7
तं वो धिया न्यस्यया शविष्ठं प्रत्नं प्रत्नवत्परित्सयध्वै. स नो वक्षद्निमानः सुवहोन्द्र विश्वाऽन्यति दुर्गाणि.. (७)

May you, with your intellect, firmly place your faith in the ancient, powerful Indra. May he, the strong and easily invoked, carry us across all difficult passages.

हम प्राचीन ऋषियों के समान अति नवीन स्तुतियों द्वारा अतिशय शक्तिशाली एवं प्राचीन इंद्र का यश बढ़ाते हैं. सीमारहित एवं शोभन वाहन वाले इंद्र हमें सभी पापों से सुरक्षित रखें. (७)

Mandala 1 · Verse 8
आ जनाय द्रुहणे पार्थिवानि दिव्यानि दीप्तयोऽन्तरिक्षा. तपा वृष्निविभुतः शोचिषा तान्ब्रह्मऋषि शोच्य क्षामपञ्च.. (८)

The divine lights of the celestial realm, shining brightly, are like the radiant powers of a king, illuminating the earth. These brilliant energies, born from the sun's heat, are to be contemplated by the wise, who seek to overcome worldly suffering.

हे इंद्र! तुम सज्जन पुरुषों के विरोधी लोगों के लिए धरती, स्वर्ग और अंतरिक्ष के स्थानों को अतिशय दुःखदायी बना दो. हे कामवर्षि इंद्र! तुम अपने तेज से सर्वत्र व्याप्त राक्षसों को जलाओ एवं उन ब्रह्मऋषियों को जलाने के लिए धरती और आकाश को तपाओ. (८)


Mandala 1 · Verse 9
भुवो जनस्य दिव्यस्य राजा पार्थिवस्य जगतस्त्वेषसन्दृक्. धिष्व वज्रं दक्षिण इन्द्र हस्ते विश्वा अर्जुर्यं दयसे वि मायाः.. (९)

O Indra, king of this divine world and ruler of the earthly realm, you are the radiant one. Hold your thunderbolt in your right hand, for you are the one who dispels all illusions.

हे दीप्तदर्शन इंद्र! तुम धरती एवं स्वर्ग में रहने वाले लोगों के स्वामी हो. हे जरा रहित इंद्र! अपने दाहिने हाथ में वज्र धारण करो एवं राक्षसों की सभी मायाओं को समाप्त करो. (९)

Mandala 1 · Verse 10
आ संयतेन्द्र णः स्वस्तिं शत्रूतूराय बृहती मम्ध्राम्. यया दासान्याण्याणि वृत्रा करो वज्रिणस्तृत्का नाहूषानि.. (१०)

May the self-controlled one, with the great thunderbolt, bring welfare and destroy enemies, just as the wielder of the thunderbolt subdued the Dasas and Vritra.

हे इंद्र! हमें शत्रुओं पर विजय पाने के हेतु विशाल, अहिंसित, एकीभूत एवं कल्याणकारिणी संपत्ति दो. हे वज्रधारी इंद्र! उस कल्याण द्वारा तुमने यज्ञकर्मरहित मनुष्यों को यज्ञशील बनाया एवं शत्रु लोगों को भली प्रकार हिंसित किया. (१०)

Mandala 1 · Verse 11
स नो नियुद्धिः पुरुहूत वेधो विश्वावाराभिग ग्राहि प्रयज्यो. न या अदेवो वरते न देव आभियाहिं त्यूमा मद्रदृक्.. (११)

May the all-pervading, all-sustaining, and all-embracing divine power, whom the invoked and the wise worship, protect us. This divine power, which no non-divine being can grasp, is the source of all blessings.

हे बहूतों द्वारा बुलाए गए, यज्ञकर्म के विधाता एवं अतिशय यज्ञपात्र इंद्र! तुम सबके द्वारा पसंद किए गए घोड़ों की सहायता से हमारे समीप आओ। देवों एवं दानवों द्वारा न रोके जाने वाले घोड़ों के द्वारा तुम हमारे सामने आओ। (११)

Mandala 1 · Verse 12
triḥ sapta viṣpuliṅgakā viṣasya puṣyam akṣan | tāś cin nu na maranti no vayam marāmāre asya yojanaṁ hariṣṭhā madhu tvā madhulā cakāra

Mandala 1 · Verse 13
navānāṁ navatīnāṁ viṣasya ropuṣīṇām | sarvāsām agrabhaṁ nāmāre asya yojanaṁ hariṣṭhā madhu tvā madhulā cakāra

Mandala 1 · Verse 14
triḥ sapta mayūryaḥ sapta svasāro agruvaḥ | tās te viṣaṁ vi jabhrira udakaṁ kumbhinīr iva

Mandala 1 · Verse 15
iyattakaḥ kuṣumbhakas takam bhinadmy aśmanā | tato viṣam pra vāvṛte parācīr anu saṁvataḥ

Mandala 1 · Verse 16
kuṣumbhakas tad abravīd gireḥ pravartamānakaḥ | vṛścikasyārasaṁ viṣam arasaṁ vṛścika te viṣam



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Amaranath Amar


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